डिजिटल अर्थव्यवस्था: भारत में नई क्रांति
डिजिटल अर्थव्यवस्था का मतलब है वह आर्थिक व्यवस्था, जो डिजिटल तकनीकों पर आधारित है—जैसे इंटरनेट, मोबाइल एप्स, ई-कॉमर्स, डिजिटल पेमेंट, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। नीति आयोग के 2024-25 के आर्थिक सर्वे के अनुसार 2022 में भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था का आकार लगभग $537 बिलियन था, जो 2025 के अंत तक $1 ट्रिलियन के पार जा सकता है।
2016 में जब “स्टार्टअप इंडिया” मिशन शुरू हुआ, तब कुछ ही हज़ार स्टार्टअप्स थे। लेकिन जनवरी 2025 तक भारत में 1.6 लाख से अधिक स्टार्टअप्स पंजीकृत हो चुके हैं। यह आँकड़ा (DPIIT) का है। इनमें से 50% टेक्नोलॉजी आधारित हैं, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम कर रहे हैं। अनुमान है कि केवल स्टार्टअप सेक्टर ने 11 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार दिये हैं। उदाहरण के लिए झिरोधा भारत में ट्रेडिंग को पूरी तरह से डिजिटल करने की दिशा कार्यरत है और हजारों युवाओं को कस्टमर सपोर्ट, डेटा एनालिसिस तथा कोडिंग में नौकरी दी है। दूसरा उदाहण है फार्माईजी, जो मेडिकल डिलीवरी के साथ डिजिटल हेल्थ सेक्टर में भर्ती बढ़ाने की दिशा में कार्यरत है।
भारत में डिजिटल इंडिया ने फ्रीलांसर और गिग वर्कर्स की फौज खड़ी कर दी है।
स्वयं नीति आयोग के आँकड़ों के अनुसार 2023 तक भारत में लगभग 77 लाख गिग वर्कर्स थे, जिसे 2025 के अंत तक बढ़कर 2.3 करोड़ होने का अनुमान है। इस क्षेत्र में कंटेंट राइटर, डिजिटल मार्केटर, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर, कोडर, ट्रांसलेटर जैसे रोजगार दिये जाते हैं। और इस क्षेत्र के कुछ प्रमुख प्लेटफॉर्म्स हैं: Upwork, Freelancer, Fiverr, Urban Company आदि।
ई-कॉमर्स—गांव से विदेश तक का सफर
भारत में 2024 तक ई-कॉमर्स मार्केट का आकार $100 बिलियन से अधिक था। ऐमजॉन, फ्लिपकार्ट के साथ ही मीशो, जियोमार्ट जैसे लोकल प्लेयर्स ने गांव-गांव तक अपना व्यापार फैला लिया है। इनमें से मीशो जैसी कंपनी ने महिलाओं को छोटे व्यापारी से डिजिटल उद्यमी बनाने का काम किया है। जनवरी 2025 तक मीशो पर 70% विक्रेता महिलाएं हैं।
लेकिन… सबकुछ इतना आसान भी नहीं है
डिजिटल विस्तार के साथ साइबर खतरों का ग्राफ भी ऊपर गया है।
DSCI और Seqrite की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक 8.44 मिलियन डिवाइसेस पर 369 मिलियन से ज्यादा साइबर हमले हुए हैं। यानी हर मिनट 702 खतरे सामने आये हैं। इन साइबर अपराधियों के निशाने पर बैंकिंग, रिटेल और ई-कॉमर्स से जुड़े लोग होते हैं। केवल 2024 में ही बैंकिंग धोखाधड़ी से भारत में ₹1,266 करोड़ की क्षति हुई है। यह आँकड़ा आरबीआई मॉनिटरिंग रिपोर्ट 2024 का है।
इस क्षेत्र में डेटा लोकलाइजेशन और विदेशी कंपनियों से टकराव की समस्या भी आ रही है क्योंकि भारत सरकार ने RBI और MeitY के जरिये डेटा लोकलाइजेशन नियम सख्त कर दिये हैं। अब सभी विदेशी डिजिटल कंपनियों को भारतीय नागरिकों का डेटा भारत में स्टोर करना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे गुगल, ऐमजॉन तथा माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों को लागत में वृद्धि झेलनी पड़ी है। साथ ही छोटे भारतीय स्टार्टअप्स के लिए भी क्लाउड सर्विस महंगी हो गई है।
ग्रामीण भारत की डिजिटल खाई
एक अनुमान के अनुसार 2023 तक भारत के शहरी क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच 71% थी जबकि ग्रामीण क्षेत्र में यह सिर्फ 37% थी। और सिर्फ डिजिटल कनेक्टिविटी ही नहीं, बल्कि डिजिटल साक्षरता की भी अभी भारी कमी है। ग्रामीण युवाओं को न तो डिजिटल भुगतान का पूरा ज्ञान है और न ही साइबर सुरक्षा की समझ।
सरकार क्या कर रही है?
नरेंद्र मोदी की सरकार ने 2023 में “डिजिटल इंडिया 2.0” की घोषणा की, जिसके प्रावधानों के तहत 6 लाख गांवों तक फाइबर इंटरनेट का जाल बिछाने की योजना है। सरकार डिजिटल साक्षरता के लिए PMGDISHA नामक योजना भी लेकर आयी है। साथ ही डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने हेतु UPI इंटरफेस का विस्तार भी किया जा रहा है। एक अनुमान के अनुसार 2024 में UPI के माध्यम से 1200 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन हुए, जो इस मुहिम की सफलता की कहानी को आगे बढ़ाती हुई बता रही है।
भारत सरकार ने 2024 में ही “IndiaAI Mission” को मंज़ूरी दी है जिसके लिए कुल 10,371 करोड़ रुपये का बजट प्रायोजित किया गया है। इस योजना में स्वदेशी AI प्लेटफॉर्म बनाने, डेटा लेक तैयार करने, स्टार्टअप्स को अनुदान देने जैसे कार्यों को शामिल किया गया है। यह योजना भारत को चीन और अमेरिका के AI वर्चस्व से मुक्त कर सकती है।
ONDC यानी ई-कॉमर्स में UPI जैसी क्रांति
ONDC (Open Network for Digital Commerce) को 2022 में लॉन्च किया गया था। जनवरी 2025 तक ONDC पर 1 लाख से अधिक विक्रेता सक्रिय थे। इस पहल से ऐमजॉन या फ्लिपकार्ट की तरह किसी एक कंपनी पर निर्भर न रहकर उपभोक्ता सीधे दुकानदार से जुड़ सकता है।
नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार के अनुसार “डिजिटल अर्थव्यवस्था भारत को 10 वर्षों में 10 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बना सकती है, बशर्ते डेटा सुरक्षा और डिजिटल साक्षरता पर ध्यान हो।” और इस संबंध में इन्फोसिस के को-फाउंडर नंदन निलेकणी का कथन भी खासा उल्लेखनीय है। वे कहते हैं कि, “भारत में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सफलता दुनिया के लिए एक मॉडल है।”
रास्ता लंबा जरूर है, लेकिन हमारी रफ्तार भी सही है
कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि डिजिटल अर्थव्यवस्था भारत को तेजी से विकास की ओर ले जा रही है। यह न केवल रोजगार बढ़ा रही है बल्कि व्यापार को भी वैश्विक बना रही है। परंतु, साइबर खतरे, कौशल की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों की पिछड़ती कनेक्टिविटी एक बड़ी चुनौती है। यदि सरकार, निजी क्षेत्र और समाज मिलकर डिजिटल सुरक्षा, शिक्षा और पारदर्शिता को प्राथमिकता दें, तो यह परिवर्तन 140 करोड़ भारतीयों के जीवन को पूरी तरह बदल सकने में सक्षम है।


