प्रिया नायर ने इतिहास रच दिया है। हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) की पहली महिला सीईओ और एमडी बनकर उन्होंने 90 साल पुरानी कंपनी में नया अध्याय जोड़ा। 1995 में एक मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में शुरुआत करने वाली प्रिया ने तीन दशकों में ब्यूटी, होम केयर और पर्सनल केयर जैसे क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ी। यूनिलीवर में ग्लोबल चीफ मार्केटिंग ऑफिसर और ब्यूटी एंड वेलबीइंग की प्रेसिडेंट रह चुकीं प्रिया अब 1 अगस्त 2025 से HUL की कमान संभालेंगी। उनकी कहानी सिखाती है कि मेहनत, सीखने की ललक और उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व सपनों को सच कर सकते हैं।
कभी सोचा है कि एक साधारण शुरुआत से कोई कैसे इतिहास रच देता है? प्रिया नायर की कहानी ऐसी ही है। हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), भारत की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी, ने 10 जुलाई 2025 को ऐलान किया कि प्रिया नायर 1 अगस्त से इसकी नई सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर होंगी। यह खबर न केवल कॉर्पोरेट जगत में, बल्कि हर उस भारतीय के लिए गर्व का पल है जो सपनों को सच करने में यकीन रखता है। प्रिया न केवल HUL की पहली महिला सीईओ हैं, बल्कि वह एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने तीन दशकों की मेहनत से यह मुकाम हासिल किया। उनकी कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि जुनून, सीखने की ललक और उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व की है।
प्रिया की यात्रा 1995 में शुरू हुई, जब वह मुंबई के सिडेनहम कॉलेज और पुणे के सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट से एमबीए करने के बाद HUL में मैनेजमेंट ट्रेनी बनीं। उस दौर में, जब कॉर्पोरेट जगत में महिलाओं की मौजूदगी सीमित थी, प्रिया ने हिम्मत और हुनर के दम पर अपनी राह बनाई। उन्होंने होम केयर, ब्यूटी और पर्सनल केयर जैसे क्षेत्रों में सेल्स और मार्केटिंग की बारीकियां सीखीं। डव, रिन, सनसिल्क और कम्फर्ट जैसे ब्रांड्स को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में उनकी भूमिका अहम रही। HUL के चेयरमैन नितिन परांजपे ने कहा, “प्रिया की भारतीय बाजार की गहरी समझ और शानदार ट्रैक रिकॉर्ड HUL को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।”
लेकिन प्रिया की कहानी सिर्फ डिग्रियों और पदों तक सीमित नहीं है। वह एक ऐसी लीडर हैं जिन्होंने हमेशा उद्देश्य को प्राथमिकता दी। 2014 से 2020 तक HUL के होम केयर डिवीजन की कार्यकारी निदेशक रहते हुए उन्होंने सस्टेनेबिलिटी और प्रीमियमाइजेशन पर जोर दिया। रिन और कम्फर्ट जैसे ब्रांड्स को उन्होंने नया जीवन दिया। इसके बाद, 2020 से 2022 तक ब्यूटी एंड पर्सनल केयर की कार्यकारी निदेशक के तौर पर उन्होंने डव और सनसिल्क जैसे ब्रांड्स को डिजिटल युग में ले जाने का काम किया। उनकी रणनीतियां सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग पर केंद्रित रहीं, जिसने युवा उपभोक्ताओं को आकर्षित किया।
2022 में प्रिया ने यूनिलीवर के ग्लोबल लीडरशिप एग्जीक्यूटिव (ULE) में जगह बनाई, जो भारतीय मूल की महिलाओं के लिए एक दुर्लभ उपलब्धि थी। लंदन में रहते हुए उन्होंने यूनिलीवर के ब्यूटी एंड वेलबीइंग डिवीजन की कमान संभाली, जिसका कारोबार 13 बिलियन यूरो से ज्यादा का है। डव, वेसलीन और लक्स जैसे ग्लोबल ब्रांड्स को उन्होंने नई दिशा दी। उनकी नेतृत्व शैली में एक खास बात है—वह सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक प्रभाव के लिए काम करती हैं। प्रिया का मानना है कि ब्रांड्स को सिर्फ प्रोडक्ट्स बेचने नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने चाहिए।
प्रिया की इस सोच को महान उद्योगपति जे.आर.डी. टाटा के एक कथन से समझा जा सकता है: “उद्देश्य के बिना व्यापार केवल धन कमाने का साधन है, न कि समाज का निर्माण करने का।” प्रिया ने इस विचार को अपने करियर का आधार बनाया। सस्टेनेबिलिटी, डिजिटल इनोवेशन और समावेशिता उनके नेतृत्व के मूल में हैं। यूनिलीवर में ग्लोबल चीफ मार्केटिंग ऑफिसर रहते हुए उन्होंने ऐसी कैंपेन चलाईं जो युवाओं और डिजिटल-प्रेमी उपभोक्ताओं के बीच हिट रहीं।
HUL में प्रिया का आगमन ऐसे समय में हो रहा है जब भारतीय एफएमसीजी बाजार चुनौतियों से जूझ रहा है। महंगाई, बदलते उपभोक्ता रुझान और डिजिटल क्रांति ने कंपनियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं। प्रिया के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी HUL को इन चुनौतियों से उबारना और कंपनी की ‘एस्पायर’ रणनीति को और मजबूत करना। रोहित जावा, जिन्हें प्रिया रिप्लेस करेंगी, ने अपने दो साल के कार्यकाल में HUL को स्थिरता दी। लेकिन प्रिया से उम्मीदें और भी बड़ी हैं।
प्रिया की निजी जिंदगी भी उनकी प्रोफेशनल जिंदगी जितनी ही प्रेरक है। वह शादीशुदा हैं और उनकी एक बेटी है। लंदन में रहते हुए भी वह अपनी भारतीय जड़ों से जुड़ी रहीं। उनकी कहानी उन लाखों भारतीय महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो कॉर्पोरेट जगत में अपनी जगह बनाना चाहती हैं। HUL की प्रतिष्ठा हमेशा से एक ‘सीईओ फैक्ट्री’ की रही है, जहां से लीना नायर (अब शनल की ग्लोबल सीईओ) और रोहित जावा जैसे लीडर्स निकले हैं। प्रिया इस परंपरा को और मजबूत करती हैं।
प्रिया का नेतृत्व सिर्फ HUL के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए एक मिसाल है। वह न केवल एक कंपनी की कमान संभाल रही हैं, बल्कि लाखों महिलाओं के सपनों को पंख दे रही हैं। उनकी कहानी सिखाती है कि मेहनत, सीखने की ललक और सही मकसद के साथ कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। जैसे ही वह 1 अगस्त 2025 को HUL के बोर्डरूम में कदम रखेंगी, भारत की नजरें उन पर होंगी। क्या वह HUL को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी? यह तो वक्त बताएगा, लेकिन प्रिया की अब तक की यात्रा कहती है कि वह असंभव को संभव करने का दम रखती हैं।


