आपने 70 के दशक की क्लासिक फिल्म ‘डॉन’ तो देखी ही होगी। पर क्या कभी सोचा है, अमिताभ बच्चन को असली ‘डॉन’ किसने बनाया? 1978 में रिलीज़ हुई जिस फिल्म ने बच्चन को एक अलग मुकाम दिया, उसके पीछे एक शांत और गंभीर शख्स था, जो ज्यादा लाइमलाइट में नहीं आया। चंद्रा बारोट, वही निर्देशक, जिन्होंने ‘डॉन’ जैसी आइकॉनिक फिल्म दी, अब हमारे बीच नहीं रहे।
बीमारी से लंबी लड़ाई
चंद्रा बारोट पिछले सात साल से पल्मोनरी फाइब्रोसिस नामक गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनका इलाज लगातार चल रहा था, लेकिन हालत बिगड़ती गई। 20 जुलाई 2025 को उनका निधन हो गया। इस खबर से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई। कई फिल्मी हस्तियों ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि दी।
डॉन से बनाई पहचान
चंद्रा बारोट शुरुआती दिनों में एक बैंक में नौकरी करतेे थे, लेकिन फिल्मों का जुनून उन्हें भारत खींच लाया। मुंबई आने के बाद उन्होंने मशहूर अभिनेता-निर्देशक मनोज कुमार के साथ असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम करना शुरू किया।
उन्होंने ‘पूरब और पश्चिम’, ‘यादगार’, ‘शोर’ और ‘रोटी कपड़ा और मकान’ जैसी चर्चित फिल्मों में सह-निर्देशन किया। इन फिल्मों में उनका योगदान तकनीकी से लेकर रचनात्मक तक हर स्तर पर रहा। ‘पूरब और पश्चिम’ के दौरान वो मनोज कुमार के काफी करीबी हो गए थे।
1978 में आई फिल्म ‘डॉन’ चंद्रा बारोट के निर्देशन में बनी एक बड़ी हिट रही। इस फिल्म ने अमिताभ बच्चन को डबल रोल में एक जबरदस्त पहचान दिलाई और बॉलीवुड को एक नया क्लासिक दे दिया। ‘डॉन’ की स्टाइल, म्यूजिक और कहानी आज भी उतनी ही ताजगी लिए हुए है।
दिलचस्प बात यह है कि चंद्रा बारोट ने ‘डॉन’ को एक दिवंगत दोस्त की मां की मदद के लिए बनाया था, ताकि उनके परिवार का कर्ज चुकाया जा सके।
निजी जीवन
चंद्रा बारोट एक निजी जिंदगी जीने वाले व्यक्ति रहे। उनके परिवार की जड़ें भारत से जुड़ी थीं। उनकी शादी और बच्चों के बारे में सार्वजनिक जानकारी बेहद सीमित रही है। फिल्मी चमक-धमक से दूर, वो अपने काम में विश्वास रखते थे।
एक विरासत छोड़ गए
चंद्रा बारोट भले ही ज्यादा फिल्में न बना सके, लेकिन एक ही फिल्म ‘डॉन’ ने उन्हें अमर बना दिया। उनकी फिल्म ने कई रीमेक्स और नई कहानियों को जन्म दिया, यहां तक कि शाहरुख खान की ‘डॉन’ सीरीज़ भी उसी विरासत की एक कड़ी है।


