हाल के वर्षों में वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख के साथ-साथ एक चिंताजनक प्रवृत्ति भी उभर रही है—’एंटी-इंडिया मॉब अटैक’। यह शब्द केवल मीडिया की सुर्खियों तक सीमित नहीं, बल्कि उन संगठित या अर्ध-संगठित हिंसक घटनाओं को दर्शाता है जहां विदेशी धरती पर भीड़ द्वारा भारतीय नागरिकों, संस्थानों या प्रतीकों को निशाना बनाया जाता है। 2023 से 2025 तक की अवधि में ऐसी घटनाएं न केवल बढ़ी हैं, बल्कि इनकी तीव्रता भी चिंतनीय स्तर पर पहुंच गई है। उदाहरण स्वरूप, दिसंबर 2025 में बांग्लादेश में एक युवा नेता की हत्या के बाद उभरी एंटी-इंडिया भावना ने सड़कों पर हिंसा को जन्म दिया, जहां भारतीय दूतावासों और हिंदू समुदाय पर हमले हुए। ये घटनाएं मात्र स्थानीय कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि गहरी राजनीतिक, वैचारिक और प्रचारात्मक साजिशों का परिणाम हैं, जिनके भारत पर कूटनीतिक, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव दूरगामी हैं।
‘एंटी-इंडिया मॉब अटैक’ एक ऐसा सामूहिक हिंसक कार्य है जो भारत-विरोधी भावनाओं से प्रेरित होकर विदेशी देशों में होता है। इसमें शामिल होते हैं भारत-विरोधी नारों के साथ हिंसा, जैसे ‘भारत मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाते हुए हमले; भारतीय नागरिकों पर लक्षित हमले, जैसे छात्र, प्रवासी मजदूर या पर्यटकों पर शारीरिक या मौखिक आक्रमण; भारतीय संस्थानों को नुकसान, जैसे दूतावास, सांस्कृतिक केंद्रों या व्यवसायों पर पथराव, आगजनी या तोड़फोड़; तथा राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान, जैसे भारतीय झंडे को जलाना या मंदिरों-मस्जिदों जैसे स्थलों को निशाना बनाना। यह व्यक्तिगत विवादों से अलग, वैचारिक या राजनीतिक एजेंडे से संचालित होता है। उदाहरण के लिए, 2023 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों ने भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हमला किया, जिसमें आगजनी और तोड़फोड़ शामिल थी। इसी प्रकार, बांग्लादेश में 2024 की एंटी-हिंदू हिंसा में 2,010 से अधिक घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें मंदिरों को नुकसान पहुंचाया गया।
2023-2025 के बीच ऐसी घटनाओं में वृद्धि के पीछे बहुआयामी कारण हैं। ये न केवल स्थानीय असंतोष से जुड़े हैं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति से भी प्रभावित हैं। कई देशों में आंतरिक संकट के दौरान भारत को ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाया जाता है। जैसे, बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद 2024-25 में उभरी अस्थिरता ने एंटी-इंडिया प्रचार को हवा दी, जहां हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर जनता का ध्यान भटकाया गया। खालिस्तानी, इस्लामी कट्टरपंथी या चीन-पाकिस्तान समर्थित समूह भारत-विरोधी एजेंडा चलाते हैं। कनाडा में 2023 के खालिस्तानी प्रदर्शनों ने भारतीय राजनयिकों को खतरे में डाल दिया। ऑस्ट्रेलिया और आयरलैंड में 2025 में भारतीय छात्रों पर रेसिस्ट हमलों की वृद्धि इसी का परिणाम है, जहां सोशल मीडिया पर ‘एंटी-इंडियन’ कैंपेन चले। नेपाल में सितंबर 2025 में भारतीय पर्यटकों पर हमला धार्मिक-राष्ट्रीय भावनाओं से प्रेरित था, जहां एक बस को आग लगा दी गई। ऐसे मामलों में सांस्कृतिक मतभेदों को राजनीतिक हथियार बनाया जाता है। ये कारण मिलकर एक खतरनाक चक्र बनाते हैं, जहां स्थानीय असंतोष को भारत-विरोधी रंग दिया जाता है।
इन हमलों का स्वरूप अक्सर संगठित और तेजी से फैलने वाला होता है। सार्वजनिक स्थलों पर हिंसक प्रदर्शन, जैसे सड़कों, विश्वविद्यालयों या बाजारों में अचानक उभरती भीड़; प्रतीकों का अपमान, जैसे भारतीय ध्वज जलाना या मूर्तियों को तोड़ना, जैसा बांग्लादेश में 152 मंदिरों के साथ हुआ; राजनयिक संपत्तियों पर आक्रमण, जैसे कनाडा और अमेरिका में भारतीय दूतावासों पर पथराव; समुदायों में भय का माहौल, जैसे भारतीय प्रवासियों को घरों में कैद रहने को मजबूर करना; तथा मीडिया पर हमले, जैसे समाचार कार्यालयों को निशाना बनाना, जैसा दिसंबर 2025 में ढाका में हुआ। यह स्वरूप दर्शाता है कि ये घटनाएं सहज नहीं, बल्कि पूर्वनियोजित होती हैं, जहां सोशल मीडिया भूमिका निभाता है।
ये हमले भारत को बहुआयामी चुनौतियों से रूबरू कराते हैं। द्विपक्षीय संबंधों में तनाव बढ़ता है। भारत को राजनयिक स्पष्टीकरण मांगने पड़ते हैं, जैसे बांग्लादेश में हालिया घटनाओं के बाद भारतीय उच्चायुक्त को बुलाना। इससे व्यापार और सहयोग प्रभावित होते हैं। विदेश में 3 करोड़ से अधिक भारतीय प्रवासी हैं। ऐसी घटनाएं यात्रा सलाहकारियां जारी करने को मजबूर करती हैं। ऑस्ट्रेलिया में 2025 की घटनाओं ने छात्रों की सुरक्षा पर सवाल उठाए। भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ को नुकसान पहुंचता है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में गलत संदर्भों से भारत को ‘आक्रामक’ दिखाया जाता है, जो निवेश और पर्यटन प्रभावित करता है।
नहीं, हर भीड़-हिंसा को ‘एंटी-इंडिया’ लेबल देना अतिशयोक्ति होगी। भेदभाव निम्न हैं: यदि यह स्थानीय अपराध जैसे चोरी या व्यक्तिगत झगड़े से जुड़ा हो; भारत-विरोधी संकेतों की अनुपस्थिति, बिना नारों या प्रतीकों के; वैचारिक मकसद का अभाव, यदि राजनीतिक एजेंडा स्पष्ट न हो। ऐसे मामलों में ‘एंटी-इंडिया’ टैग भ्रामक नैरेटिव बना सकता है, जो वास्तविक खतरों को कमजोर करता है।
‘एंटी-इंडिया मॉब अटैक’ हिंसा का एक घातक रूप है, जो राजनीति, विचारधारा और डिजिटल प्रचार का मिश्रण है। 2023-2025 में बांग्लादेश, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और नेपाल जैसी घटनाएं साबित करती हैं कि यह प्रवृत्ति वैश्विक है। भारत को इनका सामना तथ्य-आधारित विश्लेषण, मजबूत कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से करना होगा। साथ ही, मीडिया को संतुलित रिपोर्टिंग अपनानी चाहिए। अंततः, इन हमलों का जवाब जवाबदेही और संवाद से ही दिया जा सकता है, ताकि भारतीय समुदाय सुरक्षित रहे और भारत की वैश्विक यात्रा निर्बाध बनी रहे।
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