भारत के समुद्री क्षेत्रों में इस समय दो चक्रवात सक्रिय हैं — सेन्यार और दितवा। सेन्यार पहले बना था और अब कमजोर होकर खतरा कम हो चुका है, जबकि दितवा तेजी से मजबूत हो रहा है और दक्षिण भारत के तटीय इलाकों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। मौसम विभाग के अनुसार दितवा आने वाले दिनों में तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों पर असर डाल सकता है।
सेन्यार नाम इंडोनेशिया ने सुझाया था, जो वहाँ की स्थानीय भाषा का शब्द है। अच्छी बात यह है कि यह चक्रवात भारत के तटों पर बड़ा नुकसान नहीं करेगा, लेकिन इसके कारण समुद्र में लहरें ऊँची उठ रही हैं, इसलिए मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। भले ही सेन्यार भारत से दूर चला गया हो, इसके अवशेषों के कारण अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में 26 और 27 नवंबर को भारी बारिश हुई, और 28-29 नवंबर को भी कई जगहों पर तेज बारिश जारी रहने की संभावना है।

सेन्यार के ठीक बाद, 27 नवंबर 2025 को बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में एक नया चक्रवात ‘दितवा’ बन गया। यह इस मौसम का चौथा चक्रवात है और मौसम विभाग के अनुसार यह तेजी से ताकत पकड़ रहा है। अनुमान है कि 30 नवंबर की सुबह तक यह तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटों के करीब पहुंच सकता है।
28 से 30 नवंबर के बीच इन तटीय इलाकों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश, तेज़ हवाएं, समुद्री लहरें और तटीय जोखिम की चेतावनी जारी की गई है। समुद्र में लहरों की ऊंचाई अचानक बढ़ने की संभावना के कारण मछुआरों और नाविकों को समुद्र में न जाने की कड़ी सलाह दी गई है। दितवा की रफ्तार चिंता बढ़ा रही है क्योंकि यह कम समय में ताकतवर हो रहा है और इसकी दिशा में भी जल्दी बदलाव हो सकता है, इसलिए मौसम विभाग लगातार अपडेट जारी कर रहा है।
इन चक्रवातों का मुख्य असर तटीय इलाकों पर होगा। तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, सड़क जाम और ट्रैफिक बाधित हो सकता है। कई जगह बाढ़ की स्थिति भी बन सकती है क्योंकि नदी-नाले उफान पर आ सकते हैं। तेज हवाओं से पेड़ गिर सकते हैं, बिजली के खंभे और तार टूट सकते हैं, जिससे बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। समुद्री किनारों पर बसे गांव और मछुआरा बस्तियां खासतौर पर प्रभावित हो सकती हैं क्योंकि ऊंची लहरें तटरेखा को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
दितवा की सबसे खतरनाक बात इसकी तेजी से विकसित होना है। आमतौर पर तूफान बनने और मजबूत होने में समय लगता है, लेकिन दितवा ने बेहद कम समय में ताकत पकड़ ली है। इससे प्रभावित इलाकों को तैयारी का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता और नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, पिछले महीनों की भारी बारिश ने पहले ही जमीन कमजोर कर दी है, जिससे तेज बारिश और हवाओं का असर और भी अधिक हो सकता है।
लोगों के लिए जरूरी है कि वे मौसम से जुड़े अपडेट लगातार देखें, अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। समुद्र के पास रहने वाले लोग सतर्क रहें और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट हो जाएं। घरों में टॉर्च, बैटरियां, पीने का साफ पानी, जरूरी दवाइयां और फोन चार्जर तैयार रखें। तेज हवा में ढीली दीवारें, अस्थायी शेड और टिन की छतें खतरा बन सकती हैं, इसलिए उनकी जांच और मरम्मत पहले से कर लेना समझदारी होगी।
कुल मिलाकर, अभी यह साफ नहीं है कि दितवा कहाँ और कितनी ताकत से टकराएगा, लेकिन चेतावनियां स्पष्ट हैं कि दक्षिण भारत के तटीय राज्य इस समय जोखिम में हैं। सेन्यार के कमजोर होने के बाद जो राहत मिली थी, दितवा ने उसे खत्म कर दिया है और अब पूरा ध्यान इसकी गतिविधियों पर है। आने वाले कुछ दिन बेहद सतर्क रहने और पूरी तैयारी करने की जरूरत है क्योंकि यही नुकसान को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है।
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