आकाश छूते आंकड़े: वैश्विक और भारतीय विमानन का एक झलक
एयरलाइन इंडस्ट्री की शुरुआत
- पहली व्यावसायिक विमान सेवा 1 जनवरी 1914 को अमेरिका के सेंट पीटर्सबर्ग और टैम्पा के बीच शुरू हुई, दूरी सिर्फ 21 मील।
- 110 साल बाद, यह इंडस्ट्री हर साल अरबों यात्रियों को उड़ान देती है।
वैश्विक विमानन पर एक नजर
- दुनिया भर में हवाई अड्डों की संख्या: 41,700+
- व्यावसायिक एयरलाइंस की संख्या: 5,000 से अधिक
- वार्षिक वैश्विक हवाई यात्री (2023): लगभग 4.7 अरब (IATA के अनुसार)
- 2040 तक अनुमानित यात्री संख्या: 10 अरब+ प्रति वर्ष
- वैश्विक विमानन बाज़ार का मूल्य (2024): लगभग $841 अरब
- सबसे व्यस्त हवाई अड्डा (2023): हर्ट्सफील्ड-जैक्सन अटलांटा (अमेरिका) – 10.4 करोड़ यात्री
भारत का विमानन विस्फोट
- संचालित हवाई अड्डों की संख्या (2025 लक्ष्य): 200+ (2023 में 157 से)
- घरेलू हवाई यात्री (2023): 153 मिलियन से अधिक
- अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्री (2023): लगभग 63 मिलियन
- 2047 तक अनुमानित कुल यात्री: 1.3 अरब/वर्ष
- भारत की वैश्विक रैंकिंग: तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार (अमेरिका और चीन के बाद)
- हवाई अड्डा इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश (2025 तक): ₹92,000 करोड़ (~$11 अरब)
- भारत में कार्यरत एयरलाइंस: 15+ व्यावसायिक कंपनियां
क्या आप जानते हैं?
- Digi Yatra ऐप के 30 लाख से अधिक उपयोगकर्ता मार्च 2025 तक पंजीकृत हो चुके हैं।
- दिल्ली, कोची और हैदराबाद जैसे भारतीय एयरपोर्ट्स कार्बन-न्यूट्रल पहल में अग्रणी हैं।
- भारत के 45+ एयरपोर्ट्स अब चेहरे की पहचान तकनीक से बायोमेट्रिक बोर्डिंग की सुविधा दे रहे हैं।
आगे की उड़ान
- डिजिटल ट्रैवल क्रेडेंशियल (DTC) को 2030 तक वैश्विक मानक बनाने की योजना है – एक पेपरलेस, सहज यात्रा अनुभव के लिए।
- ICAO का अनुमान है कि अगले 15 वर्षों में वैश्विक हवाई यातायात दोगुना हो जाएगा, जिसमें एशिया-पैसिफिक विशेषकर भारत सबसे तेज़ ग्रोथ ड्राइवर रहेगा।
कल्पना कीजिए कि आप एयरपोर्ट पहुंचे हैं, ना कोई लंबी चेक-इन लाइन है, ना बोर्डिंग पास की झंझट। बस एक डिजिटल आईडी स्कैन हुई और आप सीधे सुरक्षा जांच की ओर बढ़ गए। यह कोई साइंस फिक्शन नहीं, बल्कि निकट भविष्य की एक हकीकत बनने जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र की संस्था इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) अब एक बड़े बदलाव की तैयारी में है, जिससे हवाई यात्रा की पूरी प्रक्रिया एकदम बदल सकती है। यह बदलाव है – डिजिटल ट्रैवल क्रेडेंशियल (DTC) का।
क्या है डिजिटल ट्रैवल क्रेडेंशियल?
डिजिटल ट्रैवल क्रेडेंशियल (DTC) एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज है जो यात्रियों की पासपोर्ट जानकारी, बॉयोमीट्रिक डेटा और यात्रा विवरण को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समेटेगा। यह डेटा यात्री के स्मार्टफोन, ऐप या क्लाउड पर सुरक्षित रहेगा और एयरलाइंस व सुरक्षा एजेंसियां इसे पहले से सत्यापित कर सकेंगी।
सीधे शब्दों में कहें तो यह पेपरलेस पासपोर्ट जैसा होगा। जब आप एयरपोर्ट पहुंचेंगे, तो आपको ना पासपोर्ट दिखाना होगा, ना टिकट निकालना होगा। एक बार चेहरा स्कैन हुआ और सब कुछ सिस्टम में अपने-आप अपडेट हो गया।
दशकों पुराना सिस्टम अब बदलेगा
वर्तमान में इस्तेमाल हो रहे बोर्डिंग प्रोसेस और पासपोर्ट वेरिफिकेशन सिस्टम करीब 50 साल पुराना है। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे बोझिल, समय खपत वाली और कागज़ आधारित होती जा रही है, खासकर तब जब हवाई यात्रा करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
ICAO के अनुसार, मौजूदा पासपोर्ट सिस्टम “फिजिकल डॉक्यूमेंट डिपेंडेंट” है, जो डिजिटल सुरक्षा के नए मापदंडों को पूरी तरह नहीं निभा पा रहा। इसीलिए अब DTC को लागू करने की योजना बन रही है।
यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?
- चेक-इन से बोर्डिंग तक एक ही डिजिटल सिस्टम
- किसी भी एयरलाइन, देश या एयरपोर्ट पर एक जैसा अनुभव
- बायोमेट्रिक पहचान से फास्ट बोर्डिंग
- खोने वाले बोर्डिंग पास की चिंता खत्म
- नकली पासपोर्ट और फर्जी पहचान की गुंजाइश कम
यह बदलाव खासकर बिजनेस ट्रैवलर्स, बार-बार उड़ान भरने वाले यात्रियों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए बड़ी राहत बन सकता है।
डेटा सुरक्षा और गोपनीयता की चुनौती
डिजिटल होने के साथ-साथ डेटा सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। इस सिस्टम में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, फेशियल रिकग्निशन प्राइवेसी प्रोटोकॉल, और यूज़र कंसेंट जैसे फीचर्स अनिवार्य होंगे।
ICAO यह भी स्पष्ट कर चुका है कि यह डिजिटल सिस्टम यात्रियों की अनुमति के बिना डेटा एक्सेस नहीं करेगा। इसके लिए बायोमेट्रिक डेटा को केवल सीमित समय के लिए स्टोर किया जाएगा।
भारत की भूमिका और तैयारी
भारत पहले से ही Digi Yatra जैसे प्रयोगों से इस दिशा में बढ़ चुका है। Digi Yatra एक मोबाइल ऐप आधारित प्रणाली है जो यात्रियों की फेस रिकग्निशन तकनीक से चेक-इन और बोर्डिंग को सहज बनाता है।
- मार्च 2025 तक 30 लाख से ज्यादा लोग इस ऐप से जुड़ चुके हैं।
- दिल्ली, हैदराबाद, बेंगलुरु और वाराणसी एयरपोर्ट्स पहले ही इस तकनीक पर काम कर रहे हैं।
- सरकार का लक्ष्य है कि 2025 तक सभी मेट्रो और प्रमुख नॉन-मेट्रो एयरपोर्ट्स पर यह तकनीक लागू हो जाए।
इसके अलावा, UDAN योजना, नए एयरपोर्ट्स का निर्माण, और निजी क्षेत्र के निवेश के साथ भारत का एविएशन सेक्टर पहले से ही ट्रांसफॉर्मेशन की राह पर है।
ग्लोबल असर: हवाई यात्रा का नया युग
ICAO के मुताबिक, DTC प्रणाली 2025 से चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएगी और 2030 तक यह वैश्विक मानक बन सकती है। इससे ना केवल समय बचेगा बल्कि यात्रियों का अनुभव एकदम स्मूद हो जाएगा।
DTC से अंतरराष्ट्रीय यात्रा एक जैसी और बिना बाधा वाली हो जाएगी। चाहे आप अमेरिका जा रहे हों, यूरोप या जापान – चेक-इन और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया हर जगह एक जैसी होगी।
डिजिटल उड़ानों का दौर शुरू
जैसे ट्रेनिंग टिकट डिजिटल हुए, बैंकिंग पेपरलेस हुई, वैसे ही अब हवाई यात्रा का नंबर है। डिजिटल ट्रैवल क्रेडेंशियल सिस्टम यात्रियों के लिए सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि एक नई सोच का प्रतीक है।
भारत जैसे युवा, टेक-सेवी और तेजी से बढ़ते देश के लिए यह मौका है कि वह वैश्विक मानकों के अनुरूप खुद को साबित करे और डिजिटल एविएशन युग का नेतृत्व करे।


