भारत में गरीबी को अक्सर संघर्ष और लाचारी से जोड़ा जाता है, लेकिन एक दूसरा पहलू भी है — जहां कम संसाधनों में भी ज़िंदगी जीने का सलीका, हौसला और ह्यूमर दिखाई देता है। गरीब होना सिर्फ आर्थिक स्थिति नहीं, एक खास सोच और जुगाड़ से भरा ज़िंदादिल नज़रिया भी है, जो कई मायनों में अमीरों से कहीं ज़्यादा मज़ेदार है।
टैक्स, ITR और फाइनेंशियल टेंशन? हमारे लिए ये शब्द डिक्शनरी में भी नहीं होते
हर साल मार्च आते ही देश के मिडिल और अपर क्लास के लोग इनकम टैक्स रिटर्न की फाइलिंग और ऑडिट की चिंता में डूब जाते हैं। सीए के ऑफिस की लाइनें लंबी हो जाती हैं, और वॉट्सऐप पर ‘टैक्स सेविंग टिप्स’ वायरल होने लगते हैं।
लेकिन गरीब तबके के लिए ये दुनिया कहीं और की लगती है। न कोई ITR भरने का झंझट, न इनकम टैक्स नोटिस की टेंशन। सरकारी सिस्टम की नजरों से जैसे हम अदृश्य हो जाते हैं – एक तरह का इंकॉग्निटो मोड। हमसे कोई टैक्स क्या वसूलेगा, जब कमाने का हिसाब ही ‘आज का दिन काट लिया तो काफी है’ में सिमटा हो?
फोन टूटा हो सकता है, लेकिन दिल हमेशा connected रहता है
आज जहां हर कुछ महीनों में स्मार्टफोन अपग्रेड करना एक स्टेटस सिंबल बन गया है, गरीब तबके का मोबाइल एक वफादार साथी होता है। स्क्रीन भले ही दरकी हो, लेकिन उसमें मां की तस्वीर से लेकर पुरानी लव चैट्स तक सब संभालकर रखी होती है।
बैटरी 5% पर दो घंटे चले तो लगता है ये किसी स्पेस मिशन का स्पेशल एडिशन है। कैमरा चाहे धुंधला हो, लेकिन उससे ली गई तस्वीरें दिल को सबसे ज्यादा साफ लगती हैं। ये मोबाइल केवल डिवाइस नहीं, हमारी यादों और जरूरतों का थैला है — थोड़ा पुराना, थोड़ा टूटा, लेकिन बेहद ज़रूरी।
बैंक लोन और क्रेडिट कार्ड्स? नाम सुनते ही मुस्कान आ जाती है
जब अमीरों को ‘सर, आपको ₹5 लाख का प्री-अप्रूव्ड ऑफर मिला है’ जैसी कॉल्स आती हैं, गरीब तबके का मोबाइल शांत रहता है। न कोई कॉल, न कोई स्कैम। कारण भी साफ है — हमारे अकाउंट्स में जितना बैलेंस होता है, वो देखने के बाद बैंक वाले खुद चुप हो जाते हैं।
कभी गलती से बैंक स्टेटमेंट में ₹100 से ज़्यादा दिख जाए, तो खुद ही शक होता है कि ये ट्रांजेक्शन कहां से आया! ऐसे में फाइनेंशियल स्कैम से भी हम अपने आप ही सेफ हो जाते हैं। कोई ओटीपी नहीं मांगता, क्योंकि लुटाने को कुछ है ही नहीं।
शादी में दिखावा नहीं, दिल से ‘दिलवाले दुल्हनिया’ बनते हैं
अमीरों की शादियों में लाखों-करोड़ों खर्च होते हैं — थीम वेडिंग, डेस्टिनेशन लोकेशन, डिजाइनर कपड़े। वहीं गरीब तबके की शादी ज़्यादा भावुक, ज़्यादा जीवंत होती है। एक स्कूल का मैदान, स्टील की प्लेटें, रसगुल्लों की बाल्टी और डीजे का बजता लाउडस्पीकर। यहाँ रिश्तेदार खुद खाना परोसते हैं, बारात में बिन बुलाए मेहमान भी नाचते हैं और दूल्हे का दोस्त ‘DJ wale babu’ के ऊपर चार डांस स्टेप्स और जोड़ देता है। शादियाँ यादें बनती हैं — वो भी बिना किसी ईएमआई के।
जुगाड़ – हमारा देसी इनोवेशन, जो किसी स्टार्टअप से कम नहीं
गरीबी सिर्फ अभाव नहीं, जुगाड़ का अद्भुत संसार भी है। AC नहीं है? कोई बात नहीं – बाल्टी में ठंडा पानी, सामने पंखा, और हवा की दिशा सेट — बन गया गरीबों का ‘कूलर’। दूध रखने की जगह नहीं? पड़ोसी के फ्रिज में रख दो, बदले में उनके बच्चे को होमवर्क में मदद कर दो।
हमारे यहां हर समस्या का हल होता है — कभी किताबों के नीचे ईंट लगाकर स्टडी टेबल बनाना, तो कभी टूटी कुर्सी पर कपड़े की तह लगा कर काम चलाना। ये जुगाड़ ही असली देसी आइडिया है।
छुट्टियाँ = मामा का गाँव, तालाब, और सच्ची खुशी
अमीर लोग छुट्टियों में विदेश यात्रा करते हैं — मॉलदीव्स, थाईलैंड, यूरोप। लेकिन गरीब वर्ग की गर्मी की छुट्टियाँ मामा या मौसी के गाँव में कटती हैं, जहाँ तालाब में नहाना, खेतों में दौड़ना और आम के पेड़ के नीचे बैठना ही असली ‘हॉलिडे पैकेज’ है। वहाँ टिकट नहीं, रिश्ता चलता है। कोई बोर्डिंग पास नहीं, बस छेनी-हँसिए वाली ज़िंदगी। वहाँ की मिट्टी में जो अपनापन है, वो किसी रिसॉर्ट में नहीं मिलता।
फिटनेस – जिम फ्री, एक्सरसाइज़ इनबिल्ट
जब अमीर लोग जिम में पैसे खर्च कर पसीना बहाते हैं, गरीब लोग रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ही फिटनेस पा लेते हैं। सब्ज़ी लेकर सीढ़ियाँ चढ़ना, बस पकड़ने के लिए दौड़ना, पानी की लाइन में खड़ा होना — सब फ्री वर्कआउट प्लान है। ऊपर से डाइट भी एकदम देसी – बेसन का चीला, चावल-दाल और हफ्ते में एक दिन पानी पूरी। शरीर भी स्वस्थ, जेब भी सुरक्षित।
प्यार में ना खर्च होता है, ना दिखावा – बस दिल से दिल जुड़ते हैं
अमीर लोग जहां डेटिंग ऐप्स और महंगे डिनर के सहारे अपने रिश्ते बनाते और बिगाड़ते हैं, वहीं गरीब तबका सच्चे एहसासों के साथ रिश्ता बनाता है। दोपहर की धूप में पान की दुकान के पास मुलाकात, 1.5GB डेटा पैक में चैटिंग, और रिचार्ज खत्म होते ही रिलेशनशिप का ‘ब्रेक’ – ये हैं उनकी मोहब्बत की सच्ची तस्वीरें।
ना नकली वादे, ना फैंसी डिनर – सिर्फ एक बेंच, एक नज़र, और सच्चा रिश्ता।
मौसम हो कैसा भी, हमारी तैयारी हमेशा ready रहती है
जब अमीर लोग सनस्क्रीन और हीटर खरीदते हैं, गरीब तबका घर में मौजूद साधनों से मौसम का सामना करता है। सर्दियों में दो रजाई और एक पुरानी जैकेट, गर्मियों में खिड़की पर गीला तौलिया, और बारिश में बाल्टी रखकर पानी पकड़ना – ये सब रोज़ की रूटीन है। हम मौसम से डरते नहीं, हम उसके साथ जीना सीख चुके हैं।
थोड़ी कमाई में बहुत सारी ज़िंदगी
भारत में गरीब होना कोई शर्म की बात नहीं, ये एक जीवनशैली है जिसमें मज़ाक है, आत्म-सम्मान है, और सादगी में खुश रहने की कला है। इस जीवन में भले ही पैसों की चमक ना हो, लेकिन रिश्तों की रौशनी, हंसी की गूंज और आत्मनिर्भरता की खुशबू जरूर होती है।
और जब कोई पूछे – “भाई, कितना कमाते हो?”
तो हँसकर कहना – “पैसे नहीं, पर हर दिन एक नई कहानी कमाता हूँ!”


