31 जनवरी 2026 को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (IICA) में नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल (NPC) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया गया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व NPC की महानिदेशक नीरजा शेखर और उप महानिदेशक (ग्रुप) उमाशंकर प्रसाद ने किया। बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच प्रशिक्षण, अनुसंधान, उत्पादकता, स्थिरता और अनुपालन के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करना था।
IICA के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया और उन्हें शॉल व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि आज के उद्योग जगत की बदलती और उभरती मांगों के अनुरूप संस्थानों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप प्रासंगिक बने रहने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि “विकसित भारत” के लक्ष्य को पूरा करने में संस्थागत सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बैठक के दौरान IICA के विभिन्न स्कूलों और केंद्रों के प्रमुखों ने संस्थान की भूमिका, गतिविधियों तथा सरकार और निजी क्षेत्र की पहलों के समर्थन में इसके योगदान पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं। इन प्रस्तुतियों में शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, एडवोकेसी और परामर्श सेवाओं जैसे क्षेत्रों में IICA की बहुआयामी भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
NPC की महानिदेशक नीरजा शेखर ने NPC के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि इसकी स्थापना 1958 में हुई थी। उस समय देश सीमित संसाधनों के साथ उत्पादकता बढ़ाने की चुनौती का सामना कर रहा था और इसी जरूरत ने NPC की नींव रखी। उन्होंने जापान की उत्पादकता यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उसे अपनाने से भारत में उत्पादकता आंदोलन को मजबूती मिली। आज NPC का दायरा सिर्फ उद्योग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कृषि, सेवाएँ, MSME, स्थिरता, हरित उत्पादकता और ESG आधारित पहलों तक विस्तृत हो गया है।
NPC द्वारा खास तौर पर एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए अनुपालन सहायता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसमें पर्यावरण ऑडिट, ऊर्जा अनुपालन, जल प्रबंधन, BRSR रिपोर्टिंग और ESG परामर्श शामिल हैं। NPC पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ मिलकर उद्योग की नियामक आवश्यकताओं और पेशेवर क्षमता निर्माण में भी काम कर रहा है।
IICA के महानिदेशक ने आगे कहा कि आज प्रशिक्षण संस्थान, शोध निकाय और नीति संगठन अलग-अलग काम नहीं कर सकते। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र कार्यक्रम, CSR प्रभाव ढांचा, अनुपालन क्षमता निर्माण और अनुप्रयुक्त अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में दोनों संस्थान मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा प्रभाव पैदा कर सकते हैं।
दोनों संस्थानों ने मिलकर काम करने की मजबूत प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि IICA की नीति अनुसंधान, प्रशिक्षण और परामर्श क्षमता को NPC की व्यवहारिक और कार्यान्वयन आधारित विशेषज्ञता के साथ जोड़कर भारत को एक उच्च आय, प्रतिस्पर्धी, नवोन्मेषी और सतत अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर किया जा सकता है। इस कार्यक्रम का समन्वय डॉ. नवीन सिरोही, प्रमुख – स्कूल ऑफ फाइनेंस एंड मैनेजमेंट, IICA ने किया।
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