सोचिए, आप राष्ट्रीय प्रतियोगिता जीतकर लौट रहे हैं, पर ट्रेन में आपकी सीट तय नहीं है और ठंड में आपको शौचालय के पास बैठना पड़ रहा है। यही हाल ओडिशा के छात्र पहलवानों के साथ हुआ, जिन्होंने हाल ही में अपने राज्य का नाम रोशन करने के बाद घर वापसी के दौरान असुविधाजनक और अपमानजनक यात्रा का सामना किया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना ओडिशा स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग की अपर्याप्त योजना का परिणाम थी। खिलाड़ी बिना पक्के टिकट यात्रा करने के लिए मजबूर हुए, और उन्हें ट्रेन के असुरक्षित और अस्वच्छ स्थानों पर बैठना पड़ा, जिससे ठंड और असुविधा में और इजाफा हुआ।
इस मामले पर चर्चा करते हुए CREDAI-MCHI, NAREDCO, BDA और PEATA के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह स्थिति स्पष्ट रूप से प्रशासनिक चूक को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि लंबे समय से खेलों के लिए छात्र खिलाड़ियों के यात्रा और आवास की बेहतर योजना की मांग की जा रही थी, लेकिन इस बार यह पूरी तरह विफल रही।
अभिभावकों ने भी इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की। कई माता-पिता ने कहा कि उनका बच्चों का अनुभव न केवल शारीरिक रूप से कठिन था, बल्कि मानसिक रूप से भी अपमानजनक रहा। कुछ ने मांग की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुनियोजित टिकट व्यवस्था और सुरक्षित यात्रा की गारंटी दी जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना खेल नीति और प्रशासनिक तंत्र की खामियों को उजागर करती है। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले छात्र खिलाड़ियों की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान को प्राथमिकता देने की जरूरत है। वे बताते हैं कि बिना तैयारी और योजना के इस तरह की परिस्थितियाँ युवा खिलाड़ियों की मनोबल और प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
इस मामले के बाद ओडिशा प्रशासन ने तत्काल जांच का आदेश दिया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी लापरवाहियों को रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे और आवश्यक सुधार लागू किए जाएंगे। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खेल प्रतिभा का सम्मान केवल पुरस्कार या पदक से नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की सुरक्षा, सुविधा और आराम से भी जुड़ा है।
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