भारत में हर साल बसंत पंचमी के दिन धूमधाम से सारस्वती पूजा मनाई जाती है। यह पर्व ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी माँ सारस्वती को समर्पित है और बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है। खेतों में सरसों के पीले फूल खिलते हैं और चारों तरफ हरियाली और नई ऊर्जा का माहौल बन जाता है। यही कारण है कि इसे बसंत पंचमी के रूप में भी मनाया जाता है।
सारस्वती पूजा का महत्व सिर्फ धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। यह पर्व शिक्षा और विद्या के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। छात्र, शिक्षक, कलाकार और विद्वान इस दिन माँ से आशीर्वाद लेने के लिए अपने घरों, स्कूलों और कॉलेजों में पूजा करते हैं। घरों में पुस्तकों, कलम और वाद्य यंत्रों को देवी के समक्ष रखा जाता है। माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा से बुद्धि, ज्ञान और रचनात्मकता में वृद्धि होती है।
छोटे बच्चों के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है। विद्या-अरंभ और अक्षर-अभ्यास जैसी परंपराएँ बच्चों को शिक्षा की ओर प्रेरित करती हैं। इस दिन माता के आशीर्वाद से बच्चों का अध्ययन बेहतर होता है और उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। यही कारण है कि इस पर्व को विद्या और शिक्षा का पर्व भी कहा जाता है।
सारस्वती पूजा का एक और महत्वपूर्ण पहलू है इसका रंग — पीला। पीला रंग बसंत ऋतु, ऊर्जा, समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक है। इस दिन पीले वस्त्र पहनना और पीले फूल, हल्दी व हल्की मिठाइयाँ देवी को अर्पित करना आम परंपरा है। यह न केवल पूजा को सुंदर बनाता है, बल्कि वातावरण में उत्साह और खुशी भी भर देता है।
भारत के विभिन्न हिस्सों में इस पर्व को अलग तरीके से मनाया जाता है। उत्तर भारत में लोग पतंगबाजी का आनंद लेते हैं, जबकि पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा में बड़े पंडाल सजाए जाते हैं और सामूहिक पूजा की जाती है। स्कूलों और कॉलेजों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, नाटक और संगीत प्रतियोगिताएँ आयोजित होती हैं। यह पर्व सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का भी अवसर बनता है।
आज के डिजिटल युग में भी सारस्वती पूजा का उत्सव सोशल मीडिया पर जीवंत दिखाई देता है। लोग माँ सारस्वती की तस्वीरें, संदेश और शुभकामनाएँ साझा करते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पूजा, वर्कशॉप और ज्ञान संबंधित इवेंट भी आयोजित किए जाते हैं। इससे युवा पीढ़ी में इस पर्व के प्रति जागरूकता और उत्साह बढ़ता है।
सारस्वती पूजा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, कला, संस्कृति और आध्यात्मिकता का पर्व है। यह हमें याद दिलाता है कि जीवन में विद्या और बुद्धि का महत्व सर्वोपरि है। इस बसंत पंचमी, आइए माँ सारस्वती से आशीर्वाद लें और अपने जीवन में ज्ञान, रचनात्मकता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें।
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