राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्षों के वैचारिक और सामाजिक सफर को समेटती बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘शतक: संघ के 100 वर्ष’ का ट्रेलर आज मुंबई में भव्य समारोह के बीच लॉन्च किया गया। यह सिर्फ एक ट्रेलर रिलीज़ का अवसर नहीं था, बल्कि संघ के शताब्दी वर्ष में उसकी यात्रा और विचारधारा को आम जनता तक सिनेमा के माध्यम से पहुँचाने का महत्वपूर्ण क्षण था।
ट्रेलर का लोकार्पण संघ के वरिष्ठ प्रचारक और अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य डॉ. मनमोहन जी वैद्य ने कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में किया। उनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई और यह संकेत दिया कि फिल्म अपने विषय के प्रति गंभीर और संतुलित दृष्टिकोण अपनाती है।
इस अवसर से पहले, फिल्म निर्माताओं ने चुनिंदा मीडिया प्रतिनिधियों के लिए विशेष प्रीव्यू का आयोजन किया, जिसमें डॉ. वैद्य भी शामिल रहे। इस संवादात्मक सत्र में पत्रकारों को फिल्म की सोच, उद्देश्य और ऐतिहासिक संदर्भ समझने का अवसर मिला।
साल 2025 में संघ ने अपने 100 वर्ष पूरे किए। इस एक शताब्दी में संगठन ने भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक परिदृश्य को गहराई से प्रभावित किया। फिल्म ‘शतक’ इसी पृष्ठभूमि में खड़ी होकर संघ के इतिहास, संगठनात्मक विकास और विचारधारा को संतुलित और व्यापक दृष्टि से पेश करती है।
ट्रेलर में संघ से जुड़ी पुरानी मिथकों और भ्रांतियों को चुनौती देने की झलक साफ़ दिखती है। स्वतंत्रता संग्राम में संघ की भूमिका, समय-समय पर लगे प्रतिबंध और आपातकाल जैसे संवेदनशील विषयों को फिल्म संदर्भ और तथ्यों के साथ दर्शकों तक पहुँचाने का प्रयास करती है।
डॉ. मनमोहन जी वैद्य ने कहा कि फिल्म के माध्यम से संघ की जानकारी समाज तक प्रभावशाली तरीके से पहुँचेगी। उन्होंने बताया कि संघ की निरंतरता, विस्तार और प्रासंगिकता उसकी सबसे बड़ी ताकत रही है। फिल्म की टैगलाइन ‘ना रुके, ना थके, ना झुके’ इसी भावना को दर्शाती है।
निर्देशक आशीष मॉल ने साझा किया कि यह फिल्म उनके लिए व्यक्तिगत रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। महीनों के शोध और मार्गदर्शन के दौरान उन्हें संघ से जुड़े कई नए पहलू जानने को मिले। निर्माता वीर कपूर ने कहा कि लेखक और विचारकों ने पुस्तकों और उपलब्ध साहित्य के आधार पर फिल्म की कहानी तैयार की और इसे सिनेमाई रूप दिया।
अनिल डी. अग्रवाल की परिकल्पना पर आधारित और आशीष मॉल द्वारा निर्देशित यह फिल्म 19 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। यह फिल्म संघ के शताब्दी वर्ष की यात्रा को समझने और समाज तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित होगी।
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