By: Shreekant Amrute
सोशल मीडिया में एक अलग ही दौर चल रहा है। सोशल मीडिया कभी भी इतना व्यस्त नहीं रहा, जितना अब हो गया है। विज्ञापन, रील्स, AI-जनरेटेड कंटेंट और वायरल वीडियो ध्यान खींचने के लिए होड़ कर रहे हैं। फिर भी, इस शोर के बीच, जो लोग कभी इन प्लेटफॉर्म्स को जीवंत बनाते थे, वे अब चुप हो रहे हैं।
50 देशों और 250,000 से ज़्यादा प्रतिभागियों पर किए गए एक नए ग्लोबल सर्वे से पता चलता है कि सोशल मीडिया एक्टिविटी में 10 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह गिरावट युवा यूज़र्स में सबसे ज़्यादा साफ़ दिखती है, यह वह है पीढ़ी जो स्मार्टफोन के साथ बड़ी हुई है। शोधकर्ताओं ने इस घटना को एक नाम भी दिया है: ‘पोस्टिंग ज़ीरो।’ यह अपनी पर्सनल जिंदगी को ऑनलाइन शेयर करना पूरी तरह से बंद करने की बढ़ती प्रवृत्ति को बताता है।
इस के अनेक कारण हैं, सोशल मीडिया ने अपना असली, मानवीय स्पर्श खो दिया है। शुरुआती दिनों में, सोशल मीडिया जिंदगी की तस्वीरों से भरे होते थे। नाश्ते की प्लेटें, पालतू जानवर, जिम सेल्फी और सफर करते हुए लिए फोटोज आदि। आज, वे प्रोग्रामिंग द्वारा या फिर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस बॉट द्वारा बनाये गए चमकदार शॉपिंग मॉल जैसे लगते हैं, जिन पर बार-बार आने वाले विज्ञापनों, खुद को गुरु कहने वालों और नकली इन्फ्लुएंसर्स का दबदबा है। असली आवाजें दब गई हैं, और कृत्रिम आवाज उनकी जगह ले रही है।
कई यूजर्स अभी भी लगातार स्क्रॉल करते हैं लेकिन पोस्ट करने से बचते हैं, इस बात से सावधान रहते हैं कि उन्हें कैसे जज किया जा सकता है। ऐसी दुनिया में जहाँ संकट सुर्खियों में छाए रहते हैं। युद्ध, बाढ़, विरोध प्रदर्शन, एक सेल्फ़ी या छुट्टियों की तस्वीर शेयर करना जेन-ज़ी को बेतुका लगता है। नतीजा यह है कि दर्शक चुप हैं, वे मौजूद तो हैं लेकिन अब हिस्सा नहीं ले रहे हैं, सिर्फ स्क्रोल कर रहे है।
और एक कारण यह है जिसे कुछ लोग ‘डेड इंटरनेट थ्योरी’ कहते हैं। 2024 से ही, ऑटोमेटेड ट्रैफिक ने मानवीय गतिविधि को पीछे छोड़ दिया है, जिसमें बॉट्स, नकली अकाउंट और AI-संचालित कंटेंट आदि, आधे से ज़्यादा ऑनलाइन कंटेंट को जेनरेट कर रहे है। सोशल मीडिया की जीवंतता की जगह बनावटी बातचीत (ChatGPT) ने ले ली है।
हर कोई पार्ट-टाइम आलोचक बन गया है, हर कोई पार्ट-टाइम इन्फ्लुएंसर बन गया है, हर कोई किसी प्रोडक्ट की विज्ञापन तथा एडवर्टटीजमेंट कर रहा है। विडंबना चौंकाने वाली है, इंटरनेट पहले कभी इतना शोरगुल वाला नहीं रहा, फिर भी इसके यूजर्स पहले कभी इतने शांत नहीं रहे। लोगों को जोड़ने के लिए बनाए गए प्लेटफॉर्म अब बॉट्स और विज्ञापनों से गूंज रहे हैं, और इंसान ‘पोस्ट’ बटन दबाते-दबाते थक गया है। यही ‘पोस्टिंग जीरो’ की शुरुआत है।
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