भारत की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र का महत्त्वपूर्ण योगदान है। यह क्षेत्र रोजगार सृजन, नवाचार और आर्थिक विकास का एक प्रमुख चालक है। लेकिन नीति आयोग के सीईओ का यह कहना कि “भारत में पर्याप्त मध्यम आकार की कंपनियां नहीं हैं,” बताती है कि यह एमएसएमई क्षेत्र कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है। और जो इसकी वृद्धि और विकास को बाधित कर रही हैं। इस रिपोर्ट में, हम एमएसएमई क्षेत्र की वित्तीय चुनौतियों का विश्लेषण करेंगे, और साथ ही उनके समाधान के लिए कुछ मार्ग भी तलाशने का प्रयास करेंगे।
नीति आयोग की दृष्टि में एमएसएमई क्षेत्र की वित्तीय चुनौतियाँ :
मध्यम आकार की कंपनियों की कमी:
जब खुद नीति आयोग के सीईओ कहते हैं कि, “भारत में पर्याप्त मध्यम आकार की कंपनियां नहीं हैं।” तो उनका यह कथन ही एमएसएमई क्षेत्र की गंभीर समस्या को उजागर करता है। भारत में लगभग 6.18 करोड़ एमएसएमई हैं, जिनमें 6.09 करोड़ सूक्ष्म, 7.44 लाख लघु और 70,000 मध्यम उद्यम शामिल हैं, यह डेटा “उद्यम” पर उपलब्ध नवीनतम आंकड़े के अनुसार हैं। यह “उद्यम” एमएसएमई पंजीकरण के लिए एकमात्र सरकारी पोर्टल है।
नियामक बाधाएँ:
जब नीति आयोग के सीईओ कहते हैं कि “एमएसएमई क्षेत्र विनियमों से बुरी तरह प्रभावित है; जबकि उन्हें फलने-फूलने के लिए एक सहायक पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता है,” तो उनका यह कथन नियामक बाधाओं की गंभीरता को ही दर्शाता है। अनुपालन लागतें और जटिल नियामक प्रक्रियाएं छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमों के लिए एक भारी बोझ साबित हो रहा है।
ग्लोबल वैल्यू चेन में भागीदारी की कमी:
ऐसा अनुभव किया गया है कि किसी भी देश में खासकर भारत में “एमएसएमई की वृद्धि के लिए ग्लोबल वैल्यू चेन की उपस्थिति को बढ़ावा देना अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण है,” यह कथन है नीति आयोग के सीईओ बी. वी. आर. सुब्रमन्यम का जो बीते बुधवार को एक लंबे इंटरव्यू में बात कर रहे थे। भारतीय एमएसएमई क्षेत्र के उद्यमियों को ग्लोबल सप्लाई चेन में भाग लेने में भी कठिनाई कठिनाई होती है और यह भी एक अलग तरह की चुनौती है।
क्लस्टर विकास की समस्या:
जब उन्होंने कहा कि “एमएसएमई द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों को समूहों में संबोधित किया जाना चाहिए, न कि अलगाव में,” तो इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि एमएसएमई क्षेत्र के लिए क्लस्टर विकास का भी काफी महत्त्व है। उन्होंने सुझाव दिया कि समस्याओं को अलग-अलग सुलझाने से कोई ठोस परिणाम नहीं मिलेगा। एक क्लस्टर में आने वाले सभी व्यवसायों की समस्याओं को एक साथ ही सुलझाना जरूरी है।
यूके सिन्हा समिति की रिपोर्ट: वित्तीय चुनौतियों का विस्तृत विश्लेषण
यूके सिन्हा समिति की रिपोर्ट में एमएसएमई क्षेत्र की वित्तीय चुनौतियों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में निम्नलिखित प्रमुख निष्कर्ष निकाले गए हैं:
ऋण पहुंच में कमी:
रिपोर्ट में एमएसएमई क्षेत्र के लिए ऋण पहुंच में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। छोटे उद्यमों के पास अक्सर कोलेटेरल की कमी होती है, जो बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करने में बाधा डालती है।
बाजार लिंकेज में कमी:
रिपोर्ट में एमएसएमई क्षेत्र के लिए बाजार लिंकेज में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। उस समिति ने पाया कि छोटे उद्यमों के पास अक्सर सेल्स और मार्केटिंग के लिए पर्याप्त ही संसाधन नहीं होते हैं। इस रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि “एमएसएमई क्षेत्र को सही बाजार तक पहुंच की कमी का सामना करना पड़ता है।”
नियामक बाधाओं का प्रभाव:
इस रिपोर्ट में भी स्पष्ट रूप से एमएसएमई क्षेत्र के लिए नियामक बाधाओं को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। अनुपालन लागतें और जटिल नियामक प्रक्रियाएं छोटे उद्यमों के लिए एक महत्त्वपूर्ण बोझ साबित हो रही हैं।
नीति आयोग की भूमिका और आलोचना:
नीति आयोग भारत सरकार का एक थिंक टैंक है, जो आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए नीतियों और कार्यक्रमों की सिफारिश करता है। एमएसएमई क्षेत्र के विकास में भी नीति आयोग की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। हालांकि, कुछ आलोचकों का मानना है कि “नीति आयोग भारत में विफल रहा है। भारत को एक नए संस्थागत अनुबंध की आवश्यकता है।” यह आलोचना नीति आयोग की प्रभावशीलता पर ही सवाल उठाती है।
नीति आयोग और यूके सिन्हा समिति के आधार पर समाधान और सुझाव :
वित्तीय समावेशन (फायनांशियल इन्क्लूजन) को बढ़ावा देना:
एमएसएमई क्षेत्र में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अधिक अनुकूल वित्तीय उत्पाद विकसित करने चाहिए। डिजिटल वित्तीय सेवाओं का उपयोग एमएसएमई क्षेत्र के लिए ऋण पहुंच में सुधार करने में मदद कर सकता है। यह बात यू के सिन्हा समिति की रिपोर्ट में कहा गया है।
नियामक सुधार:
एमएसएमई क्षेत्र में नियामक बाधाओं को कम करने के लिए सरकार को अनुपालन लागतों को कम करने और नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने हेतु पर्याप्त कदम उठाने चाहिए। इस हेतु एक ऐसा ऑनलाइन पोर्टल स्थापित किया जाना चाहिए जहां एमएसएमई क्षेत्र के लिए सभी नियामक जानकारी एक साथ उपलब्ध हो।
बाजार पहुंच में सुधार:
एमएसएमई क्षेत्र के लिए बाजार तक पहुंच में सुधार करने हेतु सरकार को सेल्स और मार्केटिंग के लिए सहायता प्रदान करनी चाहिए। साथ ही यह क्षेत्र ग्लोबल सप्लाई चेन में आसानी से भाग ले सके, इस हेतु निर्यात प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की जानी चाहिए।
प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देना:
एमएसएमई क्षेत्र में प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए, सरकार को अनुसंधान और विकास के लिए अनुदान और प्रोत्साहन प्रदान करना चाहिए। इस हेतु पर्याप्त प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।
क्लस्टर विकास को बढ़ावा देना:
क्लस्टर में आने वाले सभी व्यवसायों की समस्याओं को एक साथ सुलझाना जरूरी है। इस हेतु सरकार को बुनियादी ढांचे और अन्य सुविधाओं में निवेश करना चाहिए। क्लस्टर में नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए जगह-जगह पर सक्षम केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए।
नीति आयोग में सुधार:
नीति आयोग को एमएसएमई क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान करने के लिए अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। नीति आयोग को एमएसएमई क्षेत्र के लिए नीतियों और कार्यक्रमों को विकसित करने के लिए एक विशेषज्ञ समूह स्थापित करना चाहिए। नीति आयोग को एमएसएमई क्षेत्र के लिए एक डेटाबेस स्थापित करना चाहिए, जो उनकी आवश्यकताओं और चुनौतियों को समझने में मदद करेगा।
सरकारी सहायता:
सरकार को एमएसएमई क्षेत्र को आर्थिक सहायता प्रदान करने हेतु आगे आना चाहिए। इस हेतु सरकार को ऋण गारंटी योजनाएं शुरू करनी चाहिए तथा सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहन प्रदान करना चाहिए।
आखिर में समझने वाली बात यह है कि एमएसएमई क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। भारत में सर्वाधिक रोजगार पैदा करने वाला यही क्षेत्र है। इसलिए इस क्षेत्र की वित्तीय चुनौतियों का समाधान करना आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। सरकार, बैंकों और वित्तीय संस्थानों और नीति आयोग को एमएसएमई क्षेत्र की वृद्धि और विकास को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। खुद नीति आयोग और यूके सिन्हा समिति की रिपोर्टों में दिए गए सुझावों को लागू करके, हम एमएसएमई क्षेत्र की वित्तीय चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं और भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं।

