बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक सीए शौर्य डोभाल ने कहा कि वैश्विक शांति और संतुलित व्यवस्था भारत के बिना अधूरी है। यह विचार उन्होंने बॉम्बे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसायटी (बीसीएएस) द्वारा आयोजित विशेष सत्र में व्यक्त किए, जिसका विषय था—“प्राचीन जड़ें, वैश्विक मार्ग: भारतीय सीए के लिए वैश्विक नेतृत्व की पुनर्कल्पना।”
सीए डोभाल ने कहा कि बीते दशक में भारत का उभार केवल आर्थिक या सैन्य ताकत तक सीमित नहीं रहा। भारत अब एक जिम्मेदार और भरोसेमंद वैश्विक शक्ति के रूप में सामने आया है। उन्होंने दक्षिण एशिया, अफ्रीका, पश्चिम एशिया और यूरोप में भारत के बढ़ते प्रभाव को इसी बदलती वैश्विक सोच का उदाहरण बताया।
भविष्य की दिशा में उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की असली “हार्ड पावर” अब उसकी बौद्धिक शक्ति होगी। योग, आयुर्वेद और भारतीय दर्शन की वैश्विक स्वीकार्यता इसका प्रमाण हैं। उनका मानना है कि आने वाले समय में भारत की वैश्विक पहचान न केवल शक्ति के आधार पर, बल्कि ज्ञान, मूल्य और जिम्मेदारी के साथ नेतृत्व करने से बनेगी। “प्रभुत्व नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ नेतृत्व करना ही भारत की असली ताकत होगी,” उन्होंने कहा।
इस अवसर पर बीसीएएस के अध्यक्ष सीए जुबिन बिलिमोरिया ने कहा कि ऐसे सत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को वैश्विक अर्थव्यवस्था में नेतृत्व की नई अपेक्षाओं के लिए तैयार करते हैं। कार्यक्रम में नैतिक नेतृत्व, मूल्य-आधारित निर्णय और वैश्विक आर्थिक बदलावों में सीए समुदाय की भूमिका पर भी गहन चर्चा हुई।
सत्र का समापन संवाद और नेटवर्किंग के साथ हुआ, जिसने पेशेवर विकास के साथ-साथ वैश्विक नेतृत्व में भारत की भूमिका को मजबूत करने की बीसीएएस की प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया।
सीए डोभाल के विचार इस दिशा में संकेत देते हैं कि भारत न केवल आर्थिक और तकनीकी ताकत के मामले में, बल्कि अपने ज्ञान, संस्कृति और बौद्धिक संपदा के माध्यम से भी वैश्विक परिदृश्य में नेतृत्व करने की तैयारी कर रहा है। यही भारत के नए वैश्विक युग की नींव होगी।
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