फिल्म को नाम सही दिया गया है, भूल चूक माफ। शायद मैडॉक ने अचानक फिल्म को थिएटर रिलीज से हटाकर ओटीटी रिलीज की कोई भूल कर दी है , या फिर उनसे अनजाने में बड़ी चूक हुई है।
भारत-पाकिस्तान के तनाव में जो उन्होंने रणनीतिक देशभक्ति दिखाई, काफी लोग अभी भी सोच में हैं। लोगों का सोचना और कहना है की अगर देशभक्ति ही थी तो पहलगाम हमले से लेकर अब तक कोई भी प्रमोशन रोका क्यूँ नहीं। इतनी ही देशभक्ति थी, तो फिल्म को कुछ समय के लिए स्थगित कर सकते थे। जिस तरह आईपीएल 2025 को कुछ समय के लिए स्थगित किया है उसी तरह फिल्म को भी रोका जा सकता था। लेकिन शायद प्रडूसर दिनेश विजन को ये मंजूर नहीं था। क्यूंकी उन्हे उनके परफेक्ट बिजनेस के लिए जाना जाता है। चाहे फिल्म कोई भी हो, उन्हे बिजनेस करना बखूबी आता है।
भूल चूक माफ की ओटीटी रिलीज ने सबको चौंका दिया। यह फिल्म 9 मई 2025 को सिनेमाघरों में आने वाली थी। लेकिन एक दिन पहले, मैडॉक फिल्म्स ने इसे रद्द कर दिया। 16 मई को अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज की घोषणा हुई, कारण बताया…भारत-पाकिस्तान का तनाव। लेकिन ये दिल से लिया फैसला था, या ये चालाकी भरा कदम था?
जोश में होश खोया
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकी हमले के बाद माहौल गमगीन था। फिर भी, मैडॉक ने प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी। 24 अप्रैल को चोर बज़ारी गाना लॉन्च हुआ। राजस्थान, लखनऊ, दिल्ली में दौरे हुए। मुंबई में सड़क प्रचार, इंदौर में ट्रेलर लॉन्च। 5 मई को बुकिंग शुरू। अगर राष्ट्रीय भावनाएं इतनी भारी थीं, तो मैडॉक ने ये जल्दबाजी क्यों की? एक तरफ मैडॉक देशभक्ति तो दिखाता है, लेकिन फिल्म के प्रचार को रोकना जरूरी नहीं। ये कैसा भावनाएं हैं। शायद अगर मैडॉक प्रमोशन रोक देता तो लोगों की नज़रों में और इज्जत बढ़ती।
तनाव या बहाना?
भारत-पाकिस्तान तनाव वास्तविक था। ऑपरेशन सिंदूर, जम्मू-कश्मीर में ड्रोन हमले, सुरक्षा ड्रिल… सब कुछ चल रहा था। मैडॉक ने कहा, “राष्ट्र का सम्मान पहले।” एकदम परफेक्ट टाइमिंग। क्यूंकी भूल चूक माफ़ के केवल 3,000-5,000 टिकट बिके थे। रेड 2 की चर्चा भी जोरों पर थी। ओटीटी शिफ्ट तब हुआ, जब बुकिंग फ्लॉप हो गई। क्या ये देशभक्ति थी, या बॉक्स ऑफिस के डर से लिया गया कदम? सवाल तो लाज़मी बनता है।
थिएटर ना सही ओटीटी ने तो बचा लिया
भूल चूक माफ ओटीटी रिलीज की चतुराई साफ-साफ दिखाई देती है। सरकार के निर्देश सख्त हैं, कभी भी पब्लिक प्लेस पर प्रतिबंध लग सकता है, जिस वजह से सिनेमाघरों में कम दर्शक आएंगे या पूर्ण बंदिशें लग सकती हैं। इसलिए ओटीटी का सहारा ले लिया, की चलो थिएटर न सही ओटीटी से तो कमा लिया जाएगा। इस चाल के बाद प्राइम वीडियो की वैश्विक पहुँच ने दर्शक पक्के कर लिए… मैडॉक का ये कदम तेज था, शायद पहले से सोचा हुआ। लेकिन इसे देशभक्ति के पीछे छुपाने की बजाय, साफ-साफ कहना बेहतर होता… की देशहित में हम इस फिल्म को थोड़ा आगे लेके जा रहे हैं, फिल्म अभी नहीं माहौल शांत होने के बाद रिलीज होगी, जैसा की हाल ही में आईपीएल ने किया है।
प्रशंसक और थिएटर नाराज़
प्रशंसकों को “जय हिंद” वाला दावा बिल्कुल नहीं पचा… एक्स पर लोगों ने इसे “छल” कहा। एक यूज़र ने पूछा, “माहौल बुरा था, तो प्रचार क्यों?” थिएटर मालिक भी गुस्से में। उन्हें टिकट रिफंड करने पड़े, शेड्यूल बदलने पड़े। इससे थिएटरों और निर्माताओं का भरोसा डगमगाया। अगर मैडॉक पहले बात करता, तो शायद ये गड़बड़ टल सकती थी।
सच कहें, मैडॉक का कदम सोचा-समझा लगता है। उन्होंने जोरदार प्रचार कर हाइप बनाई, लेकिन ओटीटी को बैकअप रखा। जब बुकिंग फ्लॉप हुई तो उन्होंने तनाव का बहाना देकर, मौका लपक लिया।
गलती जो सुधरी जा सकती थी
शायद पहलगाम हमले के बाद प्रचार रोक देते, तो और इज्जत मिलती। थिएटर मालिकों को पहले बताते, तो भरोसा बना रहता। ये गलतियाँ थीं, जिन्हें सुधारना आसान था। अगर आपका जज़्बा सच्चा है तो ये सावधानी बरतनी जरूरी थी जो की नहीं बरती गई।
इन सब परिस्थितियों को अगर देखा जाए, तो ये कहना गलत नहीं होगा की, कहीं ना कहीं मेकर्स ने परिस्थिति का सही इस्तेमाल किया है। अब देखना ये है की ये फिल्म आने के बाद लोग इसे पसंद करते हैं या नहीं।


