भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला सहित एक्सिओम मिशन-4 (Ax-4) के चार अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 18 दिन बिताने के बाद पृथ्वी पर वापसी की यात्रा शुरू कर दी है। यह मिशन भारत, पोलैंड और हंगरी के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि यह इन देशों के अंतरिक्ष यात्रियों की ISS पर पहली यात्रा थी। यह भारत के लिए 41 साल बाद दूसरा मानव अंतरिक्ष मिशन है, जब 1984 में राकेश शर्मा ने सोवियत संघ के सैल्यूट-7 स्टेशन की यात्रा की थी।
एक्सिओम मिशन-4 एक निजी अंतरिक्ष मिशन है, जो नासा, स्पेसएक्स और एक्सिओम स्पेस के सहयोग से संचालित किया गया। इस मिशन का नेतृत्व अनुभवी अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री पेगी व्हिटसन ने किया। चालक दल में भारत के शुभांशु शुक्ला (मिशन पायलट), पोलैंड के स्लावोश उज़नांस्की-विस्निव्स्की (मिशन विशेषज्ञ), और हंगरी के टिबोर कापु (मिशन विशेषज्ञ) शामिल थे। मिशन 25 जून 2025 को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए लॉन्च हुआ और 26 जून को ISS के हार्मनी मॉड्यूल से जुड़ा।
चालक दल ने ISS पर 18 दिन के दौरान 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग किए। इनमें माइक्रोग्रैविटी में मानव स्वास्थ्य, मांसपेशियों की हानि, सूक्ष्म शैवाल की क्षमता, और अंतरिक्ष में फसल उगाने जैसे विषय शामिल थे। शुभांशु शुक्ला ने भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए आउटरीच गतिविधियाँ भी आयोजित कीं, जो अगली पीढ़ी को अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण रहीं। इन गतिविधियों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भारतीय स्कूलों और विश्वविद्यालयों के साथ संवाद शामिल था।
14 जुलाई 2025 को शाम 4:35 बजे (भारतीय समयानुसार), स्पेसएक्स का ड्रैगन अंतरिक्ष यान ISS के हार्मनी मॉड्यूल से अलग हुआ। यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित थी, और ड्रैगन ने पृथ्वी की ओर अपनी 22.5 घंटे की यात्रा शुरू की। चालक दल 15 जुलाई 2025 को दोपहर 3:01 बजे (भारतीय समयानुसार) कैलिफोर्निया तट के पास प्रशांत महासागर में उतरेगा। पृथ्वी के वायुमंडल में पुन: प्रवेश के दौरान अंतरिक्ष यान को 1,600 डिग्री सेल्सियस के तापमान का सामना करना पड़ेगा। पैराशूट दो चरणों में तैनात होंगे—पहले 5.7 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थिरीकरण पैराशूट और फिर 2 किलोमीटर की ऊंचाई पर मुख्य पैराशूट। स्प्लैशडाउन के बाद, स्पेसएक्स की रिकवरी टीम चालक दल को सुरक्षित निकालेगी और प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच करेगी।
नासा ने इस प्रक्रिया का सीधा प्रसारण 14 जुलाई को दोपहर 2:00 बजे (भारतीय समयानुसार) से शुरू किया, जिसमें हैच बंद होने और चालक दल के अंतरिक्ष यान में प्रवेश को दिखाया गया। अनडॉकिंग और री-एंट्री के प्रसारण को एक्सिओम स्पेस और स्पेसएक्स ने अपनी वेबसाइटों और सोशल मीडिया हैंडल पर उपलब्ध कराया।
शुभांशु शुक्ला, जो भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट हैं, ने इस मिशन में मिशन पायलट की भूमिका निभाई। रविवार को ISS पर आयोजित विदाई समारोह में उन्होंने अपने आदर्श राकेश शर्मा के 1984 के कथन को दोहराते हुए कहा, “आज का भारत महत्वाकांक्षी, निडर, आत्मविश्वास से भरा और गर्व से पूर्ण दिखता है। आज भी भारत सारे जहां से अच्छा दिखता है।” इस संदेश ने देशवासियों में गर्व और उत्साह की भावना जागृत की।
शुक्ला ने इसरो, नासा, स्पेसएक्स और एक्सिओम स्पेस के सहयोग की सराहना की और कहा कि यह मिशन भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है। उनके परिवार ने भी इस उपलब्धि पर गर्व जताया। उनके पिता शंभु दयाल शुक्ला ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इसरो के सहयोग के बिना यह संभव नहीं था। यह पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है।”
मिशन की वापसी में कुछ देरी हुई, क्योंकि प्रशांत महासागर में खराब मौसम और ISS के रूसी ज़व्ज़ेदा मॉड्यूल में हवा के रिसाव की समस्या सामने आई थी। नासा और रोस्कोस्मोस ने इसकी मरम्मत की, लेकिन अतिरिक्त जांच के लिए चालक दल को कुछ अतिरिक्त दिन ISS पर बिताने पड़े। इस दौरान चालक दल ने अतिरिक्त प्रयोग और रखरखाव कार्य किए, जिससे मिशन की वैज्ञानिक उपलब्धियाँ और समृद्ध हुईं।
एक्सिओम मिशन-4 भारत के गगनयान कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो 2026 में भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन लॉन्च करने की योजना बना रहा है। शुभांशु शुक्ला और बैकअप अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन प्रसंथ बालकृष्ण नायर ने गगनयान के लिए प्रशिक्षण लिया है, और यह मिशन उनके अनुभव को और मजबूत करेगा। इसरो ने इस मिशन के लिए लगभग 550 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो भारत के स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन ‘भारती’ की योजना को भी गति देगा।
एक्सिओम मिशन-4 न केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि है, बल्कि भारत, पोलैंड और हंगरी के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और अंतरिक्ष अनुसंधान में एक नया मील का पत्थर है। शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ेगी और अगली पीढ़ी को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, और अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। इस मिशन ने भारत को वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में और मजबूत स्थिति प्रदान की है।


