आज के समय में नौकरी बदलना एक आम बात है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इसकी सबसे बड़ी वजह सैलरी नहीं है। एक हालि अध्ययन में पाया गया कि कर्मचारी अपनी नौकरी इसलिए छोड़ना चाहते हैं क्योंकि उन्हें कार्यस्थल पर सही माहौल, सम्मान और विकास के अवसर महसूस नहीं होते।
कई कर्मचारियों ने माना कि वेतन ठीक होने के बावजूद वे काम के दबाव, थकाने वाले लक्ष्यों और असंतुलित वर्क लाइफ की वजह से असंतुष्ट हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि दफ्तर का माहौल तनावपूर्ण है और उनकी मेहनत को पहचान नहीं मिलती। इससे वे लंबे समय तक एक ही नौकरी में टिके रहने का मन नहीं बना पाते।
एक और बड़ी वजह प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच संवाद की कमी है। कई लोग महसूस करते हैं कि उनकी बात सुनी नहीं जाती, उनके सुझावों को महत्व नहीं मिलता और न ही उनके करियर ग्रोथ को लेकर स्पष्ट दिशा मिलती है। इससे कर्मचारी मानसिक रूप से अलग-थलग महसूस करते हैं और नौकरी बदलने का फैसला लेते हैं।
इसके अलावा, कई कंपनियां अभी भी पुराने कार्य मॉडल को अपनाए हुई हैं जहां समय, फ्रीडम और काम करने की सुविधा को प्राथमिकता नहीं दी जाती। युवा कर्मचारी अब सिर्फ वेतन नहीं, बल्कि लचीला कार्य समय, रिमोट वर्क के मौके और सीखने के अवसर चाहते हैं। जब उन्हें यह सुविधाएं नहीं मिलतीं, तो वे बेहतर विकल्प तलाशने लगते हैं।
नए कर्मचारियों में यह भी बड़ी शिकायत है कि उनसे हाई परफॉर्मेंस की उम्मीद तो की जाती है, लेकिन उन्हें ट्रेनिंग, स्किल डेवलपमेंट या सही मार्गदर्शन नहीं दिया जाता। बिना तैयारी के काम में धकेले जाने से उनका आत्मविश्वास कम होता है और वे दूसरी नौकरी खोजने लगते हैं जहां सीखने की सुविधा और सपोर्ट सिस्टम मजबूत हो।
साथ ही, कई लोग ऑफिस पॉलिटिक्स, पक्षपात और असमान अवसरों को भी नौकरी छोड़ने की बड़ी वजह मानते हैं। जब प्रमोशन, जिम्मेदारी और पहचान कुछ लोगों तक सीमित रहती है, तो बाकी कर्मचारी खुद को अनदेखा महसूस करने लगते हैं। यह माहौल धीरे-धीरे उन्हें इस निष्कर्ष तक ले जाता है कि जगह बदलना ही बेहतर विकल्प है।
कुल मिलाकर, यह साफ है कि नौकरी छोड़ने का असली कारण तनख्वाह नहीं, बल्कि कार्यस्थल का अनुभव है। कर्मचारियों को सम्मान, संतुलन, मौका और सकारात्मक माहौल चाहिए। अगर कंपनियां इन बातों पर ध्यान दें तो कर्मचारी लंबे समय तक जुड़कर काम कर सकते हैं।
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