मुंबई में बुधवार को भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा और सुरों की खूबसूरती का अनूठा संगम देखने को मिला। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की प्रस्तुति, ‘मधु मूर्छना’ और शारदा ज्ञानपीठ इंटरनेशनल स्कूल (SGIS) के सहयोग से आयोजित चार शहरों की शास्त्रीय संगीत कॉन्सर्ट श्रृंखला ‘भारतीय संगीत परंपरा’ के तहत पद्मश्री डॉ. सोमा घोष ने अपनी शानदार गायन प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री कृपाशंकर सिंह और श्री अनिल मुरारका मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में शारदा ज्ञानपीठ इंटरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। डॉ. सोमा घोष की प्रस्तुति के दौरान बच्चों ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया और संगीत की लय-ताल के साथ अपनी सहभागिता दिखाई। विद्यार्थियों की इस आत्मीय प्रतिक्रिया ने संगीत संध्या को और भी खास बना दिया। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी बच्चों का उत्साह कम नहीं हुआ। वे डॉ. घोष से मिलने और उनका ऑटोग्राफ लेने के लिए उत्सुक दिखाई दिए। इस दौरान विद्यालय के प्राचार्य और शिक्षकों का सहयोग भी सराहनीय रहा।
इस संगीत समारोह में डॉ. सोमा घोष के साथ श्रद्धा पृथ्वीराज, जाने-माने संगीतकार श्री विवेक प्रकाश और अन्य कुशल संगीतकारों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। कलाकारों ने डॉ. घोष की गायन प्रस्तुति में संगत की और अपनी स्वतंत्र प्रस्तुतियों के माध्यम से भी श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया। संगीत और सुरों से सजे इस आयोजन ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की विविधता और उसकी सांस्कृतिक महत्ता को सामने रखा।
‘भारतीय संगीत परंपरा’ श्रृंखला का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों और युवा पीढ़ी को भारत की समृद्ध शास्त्रीय संगीत विरासत से परिचित कराना है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों को संगीत की बारीकियों को करीब से समझने और इस कला के प्रति रुचि विकसित करने का अवसर मिलता है। साथ ही, उन्हें भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का मौका भी मिलता है।
मुंबई में कार्यक्रम को मिली उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया से आयोजक बेहद प्रसन्न हैं। विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी और कलाकारों के प्रति उनका सम्मान इस बात को दर्शाता है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत आज भी नई पीढ़ी के बीच अपनी जगह बना सकता है।
चार शहरों की इस कॉन्सर्ट श्रृंखला के आगामी कार्यक्रम कोलकाता, वाराणसी और दिल्ली में आयोजित किए जाएंगे। आयोजकों को उम्मीद है कि इन शहरों में भी श्रोताओं और विद्यार्थियों से ऐसा ही स्नेह और उत्साह मिलेगा। ‘भारतीय संगीत परंपरा’ के जरिए भारतीय शास्त्रीय संगीत की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उसे जीवंत बनाए रखने का प्रयास जारी रहेगा।
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