किस्तान की सेना देश की आंतरिक व बाह्य सुरक्षा का मुख्य स्तंभ मानी जाती है। लेकिन इसके अंदर की वेतन संरचना और रैंक आधारित सुविधाओं पर नज़र डालें तो एक गहरी असमानता और वर्गभेद का चेहरा सामने आता है। जहां शीर्ष रैंक के अफसर करोड़ों के भत्ते और विशेषाधिकारों का लाभ लेते हैं, वहीं निचले स्तर के सैनिक न्यूनतम वेतन और सीमित सुविधाओं पर गुज़ारा करने को मजबूर हैं।
🪖 रैंक आधारित वेतन – अमीर अफसर, गरीब सिपाही
पाकिस्तानी सेना में रैंक तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटी जाती है:
- नॉन-कमीशंड ऑफिसर्स (जैसे सिपाही, लांस नायक, हवलदार)
- जूनियर कमीशंड ऑफिसर्स (जैसे नायब सूबेदार, सूबेदार)
- कमीशंड ऑफिसर्स (जैसे कैप्टन, मेजर, ब्रिगेडियर, जनरल)
निचले रैंक (NCOs) में आने वाले सिपाही जैसे जवानों का वेतन मात्र 20,000–25,000 पाकिस्तानी रुपये से शुरू होता है। वहीं, जनरल जैसे शीर्ष अफसरों को 3 लाख रुपये से भी अधिक का मासिक वेतन मिलता है, इसके अलावा आवास, वाहन, गार्ड, क्लब मेंबरशिप जैसी अनेक सुविधाएं मुफ्त मिलती हैं।
सुविधाओं में भी ऊंच-नीच
सिर्फ वेतन ही नहीं, सुविधाओं और भत्तों में भी भारी भेदभाव देखने को मिलता है:
| स्तर | वेतन (PKR) | सुविधाएं |
| सिपाही | ₹20,000 – ₹25,000 | सीमित राशन, बिना क्वार्टर के पोस्टिंग, सीमित मेडिकल सुविधा |
| अफसर (कैप्टन से जनरल) | ₹80,000 – ₹350,000 | बंगला, सरकारी गाड़ी, स्टाफ, क्लब, विदेश यात्राएं, विशेष मेडिकल |
यह वेतन नहीं, शोषण है
पाकिस्तानी सेना में एक सिपाही को दुर्गम क्षेत्रों में, कम संसाधनों में और लगातार खतरों के बीच ड्यूटी करनी पड़ती है। इसके बावजूद उन्हें न तो पर्याप्त वेतन मिलता है, न ही परिवार को बेहतर जीवन। वहीं जनरल स्तर के अधिकारी इस सेना का ‘कॉरपोरेट CEO’ की तरह आनंद लेते हैं।
2021 में वेतन में 25% की वृद्धि के बावजूद, यह वृद्धि भी अफसरों के लिए फायदेमंद रही, जबकि निचले स्तर के जवानों की हालत जस की तस रही।
क्या यह “एक समानता” है?
पाकिस्तानी सेना अक्सर खुद को एक ‘अनुशासित’ और ‘एकजुट’ संस्था बताती है, लेकिन उसके अंदर मौजूद आर्थिक असमानता इस छवि को खंडित करती है। सैन्य अनुशासन के नाम पर सिपाहियों के सवालों को दबा दिया जाता है, जिससे शोषण एक संरचनात्मक व्यवस्था बन चुका है।
सेना में सेवा करने वाले प्रत्येक सैनिक को समान सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए – न कि केवल पद और सत्ता के आधार पर लाभ। पाकिस्तानी सेना की वर्तमान वेतन संरचना असमानता और आर्थिक शोषण का प्रतीक बन चुकी है, जिस पर सवाल उठाना अब ज़रूरी है।


