राजकुमार थापा की दुखद मृत्यु ने 9 मई 2025 को जम्मू-कश्मीर को हिलाकर रख दिया। डॉक्टर से अफसर बने थापा की जान तब गई, जब पाकिस्तान की गोलीबारी ने राजौरी में उनके घर को निशाना बनाया। उनकी कहानी, मरीजों को ठीक करने से लेकर खतरनाक इलाके में सेवा तक, एक ऐसे इंसान की है, जिसने सब कुछ दूसरों के लिए दिया।
डॉक्टरी से सेवा तक
28 अप्रैल 1971 को जन्मे राजकुमार थापा ने एमबीबीएस की डिग्री हासिल की। उनके बचपन या परिवार के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन लोगों की मदद का जुनून उनके काम में दिखता था। अस्पतालों में रहने की बजाय, उन्होंने जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा चुनी। ये एक बड़ा कदम था, क्योंकि ये इलाका हमेशा तनाव में रहता है।
राजौरी में नेतृत्व
2021 में थापा राजौरी में अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त बने। उनका काम था सीमाई इलाके में विकास को बढ़ावा देना, जहाँ खतरा हर पल मंडराता है। वो प्रोजेक्ट्स संभालते, स्थानीय लोगों से मिलते और काम को आगे बढ़ाते। मरने से एक दिन पहले, 8 मई को, वो उपमुख्यमंत्री के साथ दौरे पर थे और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की बैठक में शामिल हुए। वो ऐसे मेहनती इंसान थे।
खतरे में डटकर मुकाबला
थापा को राजौरी में रहने की जरूरत नहीं थी। डॉक्टर की डिग्री के साथ वो सुरक्षित जिंदगी चुन सकते थे। मगर उन्होंने खतरे को गले लगाया, जहाँ गोले और ड्रोन आम बात हैं। उनकी प्रतिबद्धता साफ थी… जनता की सेवा, चाहे जोखिम कितना भी हो। आखिरी पल तक वो राजौरी के लिए काम करते रहे।
पाकिस्तान का घातक हमला
9 मई 2025 को पाकिस्तान ने सीमा पार से गोलीबारी की। राजौरी में एक गोला थापा के घर पर गिरा और उनकी जान ले ली। मिसाइलों और ड्रोन हमलों के बीच ये हमला सबको स्तब्ध कर गया। उमर अब्दुल्ला ने एक्स पर दुख जताया, उनकी कुछ घंटे पहले की मेहनत की तारीफ की। एक्स पर लोगों ने उन्हें शहीद कहा, गुस्से में सीमाई इलाकों की सुरक्षा की मांग की।
क्यों है ये दर्दनाक
राजकुमार थापा की दुखद मृत्यु सिर्फ एक इंसान की कहानी नहीं। ये दिखाता है कि राजौरी जैसे इलाकों में अफसर कितने खतरे में काम करते हैं। उनके काम ने जिंदगियाँ बदलीं, मगर उनकी मौत सवाल उठाती है। हम सेवा करने वालों को कैसे बचाएँ? ये हिंसा कैसे रुके? थापा की कहानी हमें झकझोरती है, भारत-पाकिस्तान तनाव की इंसानी कीमत दिखाती है।
अमर विरासत
थापा की जिंदगी, डॉक्टर से अफसर तक, हर किसी को प्रेरित करती है। राजौरी में उनकी मेहनत का निशान बाकी है। उनकी शहादत हमें याद दिलाती है कि सार्वजनिक सेवकों का सम्मान करें और शांति के लिए लड़ें। नौजवानों, इतिहासकारों और साहस की कहानियों को चाहने वालों के लिए, थापा की कहानी दिल को छूती है।
राजकुमार थापा दूसरों के लिए जिए, चाहे डॉक्टर के तौर पर या अफसर के। पाकिस्तान की गोलीबारी ने उन्हें जम्मू-कश्मीर से छीन लिया, मगर उनकी विरासत जिंदा है। उन्हें एक ऐसे नायक के तौर पर याद करें, जो खतरे में भी डटा रहा। उनकी कहानी हमें और बेहतर करने की चुनौती देती है।


