देशभर में यूपीआई ट्रांजैक्शन बार-बार फेल हो रहे हैं। इससे यूज़र्स परेशान हैं और फिनटेक कंपनियों के बीच चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अब समय आ गया है जब भुगतान प्रणाली में बड़े बदलाव होने चाहिए।
बार-बार की रुकावटें
हाल के महीनों में कई बार यूपीआई सेवा बाधित हुई। त्योहारों के मौसम, सैलरी के दिनों और ऑनलाइन शॉपिंग के पीक टाइम पर यह समस्या ज्यादा देखने को मिली।
बैंकों और थर्ड पार्टी ऐप्स से शिकायतों की संख्या बढ़ी है। ट्रांजैक्शन फेल हो रहे हैं या देर से हो रहे हैं।
तकनीकी दबाव में मौजूदा सिस्टम
फिनटेक विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा यूपीआई सिस्टम इतना बड़ा लोड उठाने के लिए तैयार नहीं था।
CredAble के CEO निरव चोक्सी ने कहा कि यूपीआई को छोटी व्यक्तिगत लेन-देन के लिए तैयार किया गया था, न कि लाखों की संख्या में होने वाले बड़े भुगतान के लिए।
अब नए समाधान की जरूरत
कई फिनटेक कंपनियां मानती हैं कि भारत को अब एक नया, मजबूत और स्केलेबल भुगतान सिस्टम चाहिए। ऐसा सिस्टम जो तेज़ हो, भरोसेमंद हो और भारी ट्रैफिक में भी काम करता रहे।
कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिस्ट्रीब्यूटेड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि सर्वर पर दबाव कम हो और सिस्टम बार-बार न फेल हो।
यूज़र का भरोसा सबसे जरूरी
एक बार ट्रांजैक्शन फेल होने पर यूज़र का भरोसा डगमगा सकता है।
फिनटेक संस्थानों को डर है कि बार-बार की समस्या लोगों को फिर से कैश या दूसरे विकल्पों की ओर ले जा सकती है।
क्या किया जा रहा है?
एनपीसीआई का कहना है कि वे इस समस्या से वाकिफ हैं। वे बैंकों और तकनीकी पार्टनर्स के साथ मिलकर समाधान पर काम कर रहे हैं। हालांकि, फिलहाल कोई ठोस समयसीमा तय नहीं की गई है।
स्टार्टअप कंपनियां अपने स्तर पर काम कर रही हैं। वे नई टेक्नोलॉजी, बैकअप नेटवर्क और स्मार्ट पेमेंट रूटिंग जैसी सुविधाएं तैयार कर रही हैं।
आगे की राह
यूपीआई अब भारत के डिजिटल भुगतान का आधार बन चुका है। इसलिए इसमें रुकावट किसी भी समय बड़ी समस्या बन सकती है। फिनटेक जगत की राय है कि अब भुगतान प्रणाली को मजबूत और भविष्य के लिए तैयार बनाना जरूरी है।
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