ट्रंप का फैसला और उसका अचानक पलटाव
इस वर्ष 2025 की शुरुआत में ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार पर एक बड़ा कदम उठाकर खलबली मचा दी थी। दरअसल उन्होंने लगभग सभी व्यापारिक साझेदारों पर “रेसिप्रोकल टैरिफ” लगाने की घोषणा की। और इसका मतलब था कि अमेरिका उन देशों पर उसी दर का शुल्क लगाएगा, जो दरें वे अमेरिका पर लागू करते हैं। यह घोषणा होते ही दुनियाभर में आर्थिक उथल-पुथल शुरू हो गई।
लेकिन घोषणा के महज 24 घंटे के भीतर ट्रंप ने इस फैसले पर 90 दिनों की अस्थायी रोक लगाने की घोषणा कर दी है। इस “पॉज” का मकसद, उनके अनुसार, बातचीत और रणनीतिक संतुलन बनाना है।
क्यों लिया अचानक यू-टर्न?
टैरिफ की घोषणा के तुरंत बाद वैश्विक शेयर बाजारों में तेज गिरावट आयी। उनके अपने ही देश में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स में उछाल आया और निवेशकों में भारी घबराहट फैल गई। और इस आर्थिक अस्थिरता को देखकर ट्रंप ने फैसला पलट दिया है। उन्होंने अपने बयान में कहा है, “लोग थोड़े ज्यादा चौंक गए, उन्हें थोड़ा समय चाहिए।”
चीन को छोड़कर सभी को राहत–रणनीति या सख्ती?
ट्रंप की घोषणा में एक खास बात यह रही कि चीन को इस टैरिफ पॉज से बाहर रखा गया है। इसका सीधा मतलब है कि अमेरिका अभी भी चीन पर सख्ती बरकरार रखना चाहता है। चीन के खिलाफ यह निर्णय इस बात की ओर इशारा करता है कि 2025 में भी अमेरिका-चीन ट्रेड वार थमा नहीं है।
वैश्विक प्रतिक्रियाएं:
यूरोप–एकता से ताकत
जर्मनी के नवनियुक्त चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा, “यूरोपीय एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। यह निर्णय दिखाता है कि साथ रहने से हम अमेरिका जैसी महाशक्ति से भी बातचीत कर सकते हैं।”
इटली के वित्त मंत्री ने भी इस पर संतोष जताया और कहा कि G7 देशों ने इस मसले को लेकर अमेरिका से शांति की बात की थी।
भारत–राहत, पर सतर्कता बरकरार
भारत के लिए इस निर्णय को सकारात्मक ही कहा जा सकता है। भारत को 90 दिन की छूट मिल गई है, जिससे टेक्सटाइल, स्टील और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों में राहत मिलेगी। हालांकि, भारत सरकार ने इसे “अस्थायी राहत” मानते हुए टैरिफ रणनीति को लेकर सतर्क रुख बनाये रखा है। सूत्रों के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता इस अवधि में तेज हो सकती है।
बांग्लादेश–भारी राहत
बांग्लादेश को अमेरिकी बाजार में 37% टैरिफ का खतरा था। लेकिन 90 दिन की राहत से उसकी टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बड़ा सहारा मिला है। अंतरिम नेता मुहम्मद यूनुस ने कहा, “हम अमेरिका के साथ सहयोग करते रहेंगे।”
वियतनाम–डील की उम्मीद
ट्रंप की टैरिफ घोषणा में वियतनाम पर 46% शुल्क लगने वाला था। रोक के बाद हनोई और वॉशिंगटन के बीच बातचीत शुरू हो गई है और दोनों पक्ष गैर-टैरिफ बाधाएं हटाने पर भी चर्चा कर रहे हैं।
ताइवान–अवसर की तलाश
ताइवान ने इसे “संवाद की नई खिड़की” बताया है। विदेश मंत्री लिन चिया-लुंग ने कहा कि अब हम अमेरिका के साथ तकनीक, व्यापार और टैलेंट पर साझा रणनीति बना सकते हैं।
आर्थिक असर: बाजार की तात्कालिक प्रतिक्रिया
अमेरिकी स्टॉक मार्केट में टैरिफ घोषणा के बाद 2.3 ट्रिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज हुई थी जिसमें अब सुधार की उम्मीद की जा सकती है।
बॉन्ड यील्ड्स अचानक बढ़े, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाया था। अब इसमें भी सुधदार हो सकता है।
टैरिफ पॉज के बाद बाजारों में थोड़ी स्थिरता लौट सकती है, लेकिन असमंजस अभी भी कायम है।
चीन – बहिष्करण से नाराजगी
चीन ने अमेरिका के इस कदम पर “प्रोटेक्शनिज्म” का आरोप लगाया है। चीन का कहना है कि उसे अलग रखना व्यापारिक दुश्मनी को बढ़ावा देता है। इसलिए बीजिंग ने खुली चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने रवैया नहीं बदला, तो वह भी जवाबी कदम उठाएगा।
क्या है 90 दिन का मतलब?
यह अवधि सिर्फ “समझौते की गुंजाइश” है। यदि कोई ठोस समझौता नहीं होता, तो अमेरिका फिर से टैरिफ लागू कर सकता है। इसलिए यह पॉज एक डील का प्रस्ताव भर है, अंतिम समाधान नहीं।
भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?
व्यापार घाटे को संतुलित करने का अवसर—अमेरिका भारत से ज्यादा आयात करता है, इस पॉज से भारत को अपने निर्यात को बढ़ावा देने का मौका मिला है।
टेक्सटाइल, फार्मा, स्टील को राहत—इन क्षेत्रों में भारत को टैरिफ में कटौती मिलने की उम्मीद है।
डिजिटल टैक्स विवाद हल करने का मौका—अमेरिका भारत के डिजिटल टैक्स से नाराज़ रहा है। अब बातचीत से समाधान होने की उम्मीद दिखाई देती है।
राजनीतिक विश्लेषण: ट्रंप की रणनीति
विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय राजनीतिक दबाव और चुनावी रणनीति से जुड़ा है। अमेरिकी किसान, निर्माता और उपभोक्ता वर्ग इस टैरिफ नीति से नाराज थे। साथ ही बाजारों में आयी भारी गिरावट ने ट्रंप को यह दिखा दिया कि जल्दबाज़ी नुकसानदेह हो सकती है।
तो क्या यह राहत स्थायी होगी?
90 दिन की इस टैरिफ पॉज को लेकर दुनियाभर में उम्मीद और चिंता दोनों है। यदि बातचीत सकारात्मक रही, तो वैश्विक व्यापार संतुलित हो सकता है। लेकिन अगर चीन और अमेरिका के बीच टकराव बढ़ा, तो यह राहत जल्द ही समाप्त भी हो सकती है।


