मुंबई में मॉनसून करीब है, और हर साल की तरह इस बार भी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने पुरानी और खतरनाक इमारतों की पहचान की है। 2025 में BMC ने 134 ऐसी इमारतों को C1 श्रेणी में रखा है, यानी ये इमारतें बेहद खतरनाक हैं और रहने लायक नहीं हैं। इनमें से 57 इमारतें खाली करवाई जा चुकी हैं, लेकिन 77 में अब भी लोग रह रहे हैं, जिससे उनका जीवन खतरे में है। हर साल बीएमसी मॉनसून से पहले सर्वे करती है। खासकर 30 साल से पुरानी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट जरूरी होता है। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर बीएमसी C1 श्रेणी की इमारतों को चिन्हित करती है, जिन्हें तुरंत खाली करवाकर गिराना अनिवार्य होता है। बीते कुछ वर्षों में यह संख्या घट रही है – 2023 में 188, और 2022 में 226 इमारतें खतरनाक पाई गई थीं। बीएमसी का कहना है कि ध्वस्तीकरण और पुनर्वास कार्य में तेजी आई है।
कहां हैं ये इमारतें?
134 खतरनाक इमारतों में से सबसे ज्यादा पश्चिमी उपनगरों (बांद्रा, खार, सांताक्रूज़ और गोरेगांव) में हैं – यहां 15-15 इमारतें चिन्हित की गईं। पूर्वी उपनगरों में 47 और द्वीप शहर (साउथ मुंबई) में 35 इमारतें हैं। बीएमसी ने निवासियों को नोटिस जारी कर 15 दिन में खाली करने को कहा है।
खाली करवाने में आ रही परेशानी
57 इमारतें खाली हो चुकी हैं, लेकिन बाकी 77 में लोग अब भी रह रहे हैं। इनमें से 56 इमारतें कोर्ट केस में फंसी हैं। कई लोग बीएमसी की C1 रिपोर्ट को चुनौती देते हैं और दोबारा ऑडिट की मांग करते हैं। जब दो रिपोर्ट में फर्क होता है तो टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी (TAC) जांच करती है। फिलहाल 9 मामले TAC के पास हैं और 110 केस कोर्ट में लंबित हैं।
निवासियों की मजबूरी
कई लोग इन इमारतों में दशकों से पगड़ी सिस्टम पर रह रहे हैं, जहां किराया सिर्फ 100 से 500 रुपये महीना होता है। वैकल्पिक मकान का किराया और खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल है। रीडेवलपमेंट में धोखा मिलने का डर भी उन्हें हटने नहीं देता। हालांकि 2023 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने नियम बनाया कि 51 से 70% किरायेदारों की सहमति से रीडेवलपमेंट हो सकता है, लेकिन फिर भी कानूनी विवाद जारी रहते हैं।
बीएमसी की सख्ती और हादसे
बीएमसी ने कई मामलों में सख्त कदम उठाए हैं, जैसे बिजली-पानी काटना और पुलिस की मदद लेना। 2022 में कुर्ला में एक जर्जर इमारत गिरने से 19 लोगों की मौत हुई थी। 2019 में डोंगरी की केसरबाई मेंशन दुर्घटना में 13 लोगों की जान गई थी। इन घटनाओं के बाद बीएमसी ने प्राथमिकता सूची बनाई और कार्रवाई तेज की।
पुरानी इमारतों का रिकॉर्ड
2020 में मुंबई में 499 इमारतें खतरनाक पाई गई थीं। बीएमसी का कहना है कि हर साल ध्वस्तीकरण में तेजी लाई जा रही है – 2023 में 250 इमारतें गिराई गईं। फिर भी भारी बारिश में पुरानी इमारतें खतरा बनी रहती हैं।
नीतियों में बदलाव
2018 में बीएमसी ने नई नीति बनाई जिसके अनुसार अब मालिक अपनी मर्जी से इमारत को जर्जर घोषित नहीं कर सकते। स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करना जरूरी है जिससे किरायेदारों को अधिकार मिल सकें। 2022 में हाई कोर्ट ने सुझाव दिए कि रीडेवलपमेंट योजना ऑनलाइन उपलब्ध होनी चाहिए।
क्या है आगे की राह?
मुंबई की गैर-सेस्ड इमारतें यानी निजी मालिकों वाली इमारतें ज्यादा खराब हालत में होती हैं क्योंकि इनमें रखरखाव कम होता है। MHADA के अंतर्गत आने वाली सेस्ड इमारतों की हालत अपेक्षाकृत बेहतर होती है। बीएमसी को अब तेजी से ध्वस्तीकरण के साथ वैकल्पिक आवास पर भी ध्यान देना होगा। नागरिकों और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा ताकि मॉनसून में जान-माल की हानि रोकी जा सके।
क्या मुंबई सुरक्षित हो पाएगी? इसका जवाब आने वाला समय देगा।


