मुंबई, देश की आर्थिक राजधानी, जहां चमचमाती गगनचुंबी इमारतें और मल्टीनेशनल कंपनियों के हेडक्वार्टर हैं, वहीं दूसरी ओर लाखों लोग आज भी साफ पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। पानी की असमान आपूर्ति, खराब स्वच्छता व्यवस्था और बीमारियों की बढ़ती संख्या ने शहर के बुनियादी ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
24 घंटे जल आपूर्ति सिर्फ एक वार्ड को
मुंबई में कुल 24 प्रशासनिक वार्ड हैं, लेकिन केवल एक वार्ड को ही दिनभर निरंतर जल आपूर्ति मिलती है। अधिकांश क्षेत्रों में पानी कुछ घंटों के लिए ही उपलब्ध होता है। औसतन, मुंबई के नागरिकों को दिन में सिर्फ 5 से 6 घंटे पानी मिलता है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 135 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।
स्लम बस्तियों की बदतर स्थिति
शहर की 42% आबादी स्लम क्षेत्रों में रहती है। इन बस्तियों में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन केवल 45 लीटर पानी उपलब्ध है, जो मानक से काफी कम है। इन इलाकों में पाइपलाइन की कमी, अवैध कनेक्शन और खराब जल प्रबंधन के कारण लोगों को बाल्टी से पानी भरने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।
स्वच्छता संकट गहराया
सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है। मुंबई में लगभग 6,800 सामुदायिक शौचालय हैं, जिनमें से 60% में बिजली नहीं है और 70% में नियमित पानी की आपूर्ति नहीं होती। इसके अलावा, महिलाओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं — सार्वजनिक शौचालयों की केवल 25% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
बढ़ रहे हैं बीमारियों के मामले
हालांकि हाल के वर्षों में पानी की गुणवत्ता में सुधार आया है, लेकिन हैजा, दस्त और टाइफाइड जैसे जलजनित रोगों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। गंदा पानी, खुले नाले और स्वच्छता की कमी बीमारी फैलने के मुख्य कारण हैं। 2024 में डायरिया और हैजा के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जो चिंता का विषय है।
समाधान की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि पानी संकट का समाधान केवल सप्लाई बढ़ाने से नहीं, बल्कि वितरण प्रणाली को बेहतर बनाकर भी किया जा सकता है। शहर में मीटरयुक्त कनेक्शन, लीकेज रोकने के उपाय और पाइपलाइन नेटवर्क का आधुनिकीकरण जरूरी है। साथ ही, स्वच्छता के क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालयों की संख्या और गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता है।
स्थायी विकास की जरूरत
मुंबई की स्थिति देश के अन्य महानगरों के लिए चेतावनी है। यदि अब भी जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो जल संकट और स्वास्थ्य समस्याएं भविष्य में और गंभीर रूप ले सकती हैं। सरकार, नगरपालिका और आम जनता — तीनों की सामूहिक भागीदारी से ही एक स्वच्छ और सुरक्षित मुंबई की कल्पना साकार हो सकती है।


