वियतनाम एक बार फिर प्रकृति के प्रकोप से जूझ रहा है। चक्रवात ‘मैटमो’ ने देश के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में भारी तबाही मचाई है। तेज़ हवाओं, लगातार बारिश और बाढ़ ने हज़ारों परिवारों को बेघर कर दिया है। खबरों के अनुसार करीब दो लाख घर पानी में डूब चुके हैं और कई इलाके पूरी तरह से बाढ़ में समा गए हैं।
यह चक्रवात समुद्र से टकराने से पहले ही बेहद शक्तिशाली हो गया था, जिसकी रफ्तार करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। समुद्र तटीय इलाकों में पेड़ उखड़ गए, बिजली की लाइनें टूट गईं और मछुआरों की नावें बर्बाद हो गईं। कुछ ही घंटों में नदियां अपने किनारों से बाहर निकल आईं और बस्तियां पानी में डूबने लगीं। लोगों के लिए यह एक डरावनी रात थी — बिजली गुल, चारों ओर पानी और कोई रास्ता नहीं बचा था जिससे वे सुरक्षित स्थान पर पहुंच सकें।

सरकार ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। सेना और स्थानीय स्वयंसेवक राहत के लिए मैदान में उतर आए। नावों के ज़रिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। स्कूलों और पंचायत भवनों को अस्थायी शरण स्थलों में बदला गया, जहाँ लोग सिर्फ़ अपने बदन पर पहने कपड़ों के साथ पहुंचे। रेडक्रॉस और स्थानीय संगठनों ने खाने-पीने का सामान, दवाइयां और कपड़े वितरित करना शुरू कर दिया है, लेकिन कई गांव अब भी बाढ़ के पानी और भूस्खलन के कारण कटे हुए हैं।
फू येन, बिन दिन्ह और क्वांग न्गाई जैसे प्रांतों में हालात सबसे ज़्यादा खराब हैं। यहाँ की गलियाँ नदियों में बदल गई हैं। कई परिवारों के घर पूरी तरह ढह गए हैं, मवेशी बह गए और लोगों की सालों की मेहनत एक पल में मिट्टी में मिल गई। एक बुजुर्ग व्यक्ति ने आँसू भरकर कहा — “ऐसा लगा जैसे आसमान ही टूट पड़ा हो।”
मौसम विभाग के अनुसार, मैटमो अपने साथ भारी नमी लेकर आया था, जिसके कारण समुद्र तट पार करने के बाद भी लगातार बारिश होती रही। इससे बाढ़ की स्थिति और बिगड़ गई। कई पहाड़ी इलाकों में अचानक आई बाढ़ ने रास्ते बंद कर दिए। हालाँकि सरकार ने पहले से चेतावनी जारी की थी, लेकिन तबाही का स्तर इतना बड़ा था कि सब कुछ संभालना मुश्किल हो गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे तूफानों की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ रही है। समुद्र का बढ़ता तापमान और असामान्य मानसूनी पैटर्न एशिया के तटीय देशों के लिए खतरे का संकेत हैं। वियतनाम, जिसकी लम्बी समुद्री सीमा और घनी आबादी वाले डेल्टा इलाके हैं, अब बार-बार ऐसे संकटों का सामना कर रहा है।
डा नांग और न्हा ट्रांग जैसे शहरों में बुनियादी ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है। सड़कों पर दरारें पड़ गई हैं, पुलों की मिट्टी बह गई है और संचार लाइनें ठप हैं। नुकसान का अनुमान करोड़ों डॉलर में लगाया जा रहा है, जिससे स्थानीय व्यापार, कृषि और मत्स्य पालन बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। जैसे-जैसे पानी उतर रहा है, लोगों को अब बीमारियों और साफ पानी की कमी का डर सताने लगा है।
लेकिन इस तबाही के बीच भी उम्मीद की किरणें नज़र आ रही हैं। लोग एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं, युवा अपनी नावों से फंसे परिवारों को निकाल रहे हैं, और स्वयंसेवक कीचड़ में उतरकर राशन बांट रहे हैं। यह सब वियतनाम की उस जज़्बे की मिसाल है जो हर संकट में और मज़बूत हो जाता है।

सरकार ने वादा किया है कि पुनर्निर्माण का कार्य तेज़ी से शुरू किया जाएगा और प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाएगी। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है और राहत सामग्री भेजनी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में जब बारिश कुछ कम होगी, तब असली चुनौती शुरू होगी — ज़िंदगियाँ और उम्मीदें फिर से बसाने की।
चक्रवात मैटमो की यह त्रासदी याद दिलाती है कि प्रकृति के संतुलन से छेड़छाड़ कितनी भारी पड़ सकती है। यह तूफान चला जाएगा, लेकिन जो निशान उसने छोड़े हैं — धरती पर भी और दिलों में भी — उन्हें मिटने में वक़्त लगेगा। फिर भी, इस संकट में वियतनाम ने दुनिया को दिखा दिया कि एकता और साहस के सामने कोई भी तूफान ज़्यादा दिन नहीं टिक सकता।


