दुबई एयर शो के दौरान भारतीय तेजस लड़ाकू विमान शुक्रवार दोपहर एक डेमो उड़ान के दौरान क्रैश हो गया। यह हादसा लगभग 2 बजकर 10 मिनट पर हुआ, जब विमान अपने एरोबेटिक प्रदर्शन के दौरान अचानक नियंत्रण खो बैठा। थोड़ी ही देर में घटनास्थल से काला धुआँ उठता दिखा, जिससे दर्शकों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया। दुर्घटना दुबई के अल मक्तूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास हुई, जहां तुरंत सुरक्षा बल और बचाव टीमें पहुँच गईं। भारतीय वायुसेना ने आधिकारिक रूप से पुष्टि कर दी है कि पायलट शहीद हो गए हैं। पायलट ने इजैक्शन सीट का उपयोग नहीं किया था।
तेजस लड़ाकू विमान भारत का स्वदेशी हल्का कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है जिसे हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड ने बनाया है। यह विमान “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” के प्रमुख प्रतीकों में से एक माना जाता है। हादसे के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें विमान के टेकऑफ के समय तरल पदार्थ गिरता दिखा। कई लोगों ने इसे तेल रिसाव बताया, लेकिन भारत सरकार और वायुसेना ने इस दावे को खारिज कर दिया। उनके अनुसार यह कोई रिसाव नहीं बल्कि विमान के Environmental Control System और On-Board Oxygen Generating System से निकलने वाली सामान्य वाष्प है जो उड़ान प्रणाली का प्राकृतिक हिस्सा है।
इस घटना ने भारतीय रक्षा तकनीक के लिए चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह तेजस विमान का पहला हादसा नहीं है। इससे पहले 12 मार्च 2024 में भी राजस्थान के जैसलमेर में एक तेजस विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, हालांकि उस समय पायलट सुरक्षित तरीके से बाहर निकल आया था। दुबई में हुए हालिया हादसे ने भारत की विमानन तकनीक और सुरक्षा मानकों पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिर भी, भारतीय वायुसेना ने जांच के लिए कोर्ट ऑफ इनक्वायरी गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि क्रैश के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
यह दुर्घटना ऐसे समय में हुई है जब भारत दुनिया के सामने अपनी रक्षा निर्माण क्षमता प्रदर्शित कर रहा है। तेजस विमान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से पहचान बना रहा था, और दुबई एयर शो जैसे बड़े मंच पर यह हादसा भारत की छवि पर असर डाल सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विकसित हो रही तकनीक को मजबूत बनाने के लिए ऐसी घटनाओं की गहन जांच और सुधार सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं।
दुबई में हुई यह दुर्घटना न केवल एक तकनीकी झटका है बल्कि यह भारत की उभरती हवाई क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन के लिए एक चुनौती भी है। वायुसेना और HAL की टीम अब इस घटना के हर पहलू को जांच रही है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे रोके जा सकें और तेजस कार्यक्रम मजबूती के साथ आगे बढ़ सके।
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