लगभग ढाई दशक पहले भारतीय सिनेमा को एक ऐसी फिल्म मिली थी जिसने न सिर्फ देश में बल्कि दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बनाई। 15 जून 2001 को रिलीज हुई फिल्म लगान आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में गिनी जाती है। अब इस ऐतिहासिक फिल्म के 25 साल पूरे होने के मौके पर इसकी पूरी टीम एक बार फिर साथ नजर आई और पुरानी यादों को ताज़ा किया।
फिल्म के 25वें वर्ष का जश्न मनाने के लिए अभिनेता और निर्माता आमिर खान ने एक विशेष रीयूनियन और स्क्रीनिंग का आयोजन किया। इस खास मौके पर निर्देशक आशुतोष गोवारिकर के साथ फिल्म से जुड़े कई कलाकार और क्रू सदस्य मौजूद रहे। यह मुलाकात सिर्फ एक सेलिब्रेशन नहीं थी, बल्कि उस सिनेमाई सफर को याद करने का अवसर भी थी जिसने भारतीय फिल्मों के इतिहास में एक अलग अध्याय लिखा।
इस रीयूनियन में अभिनेता पॉल ब्लैकथॉर्न, राजेंद्रनाथ जुत्शी, आदित्य लाखिया, यशपाल शर्मा, अखिलेंद्र मिश्रा और दयाशंकर पांडे सहित कई कलाकार शामिल हुए। वर्षों बाद सभी को एक साथ देखकर फिल्म के प्रशंसकों के लिए भी यह पल बेहद खास बन गया।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में आमिर खान और आशुतोष गोवारिकर अपनी टीम के साथ बातचीत करते और पुरानी यादों को साझा करते दिखाई दिए। वीडियो को दर्शकों से भी शानदार प्रतिक्रिया मिली। फिल्म प्रेमियों ने इसे भारतीय सिनेमा के एक स्वर्णिम दौर की याद बताते हुए अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं।
लगान केवल एक सफल फिल्म नहीं थी, बल्कि यह एक सांस्कृतिक घटना बन गई थी। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान वर्ष 1893 की पृष्ठभूमि पर आधारित इस कहानी में एक ऐसे गाँव की दास्तान दिखाई गई थी जो भारी कर यानी लगान से परेशान था। गाँव के लोग अपने ब्रिटिश शासकों को क्रिकेट मैच की चुनौती देते हैं और जीत की स्थिति में कर माफ कराने का प्रयास करते हैं। खेल, संघर्ष, भावनाओं और देशभक्ति से भरपूर इस कहानी ने दर्शकों का दिल जीत लिया था।
फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक इसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान था। लगान को 74वें अकादमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी के लिए नामांकन मिला था। यह उपलब्धि हासिल करने वाली यह केवल तीसरी भारतीय फिल्म बनी थी। इसके अलावा फिल्म ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी अपने नाम किए।
फिल्म की सफलता में इसके संगीत का भी बड़ा योगदान रहा। संगीतकार ए. आर. रहमान द्वारा तैयार किए गए गीत आज भी लोकप्रिय हैं। घनन घनन, मितवा, राधा कैसे ना जले और ओ रे छोरी जैसे गीत आज भी श्रोताओं की पसंद बने हुए हैं।
25 साल बाद आयोजित यह रीयूनियन केवल एक मुलाकात नहीं थी, बल्कि उस विरासत का उत्सव था जिसे लगान ने भारतीय सिनेमा को दिया। यह फिल्म आज भी नई पीढ़ियों को प्रेरित करती है और साबित करती है कि अच्छी कहानी समय की सीमाओं से परे होती है।
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