भारतीय ट्रायथलॉन में प्रतिभाओं की बढ़ती संख्या और पैरा-स्पोर्ट्स के मजबूत होते आधार की झलक पुणे में देखने को मिली। श्री शिव छत्रपति स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बालेवाड़ी में 14 से 16 अगस्त तक आयोजित इंडियन ट्रायथलॉन फेडरेशन मिनी ऑरेंज नेशनल एंड एज-ग्रुप ट्रायथलॉन चैंपियनशिप में देशभर से रिकॉर्ड 449 एथलीटों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता ने न केवल ट्रायथलॉन की लोकप्रियता को रेखांकित किया, बल्कि महिला, जूनियर और पैरा-एथलीटों की बढ़ती भागीदारी को भी सामने रखा।
इस चैंपियनशिप का सबसे खास आकर्षण महाराष्ट्र की शाश्रुति विनायक नकाड़े रहीं। उन्होंने महिलाओं की PTS4_5 श्रेणी में स्वर्ण पदक जीतकर पैरा-ट्रायथलॉन में अपनी प्रतिभा और मेहनत का शानदार प्रदर्शन किया। उनकी जीत ने प्रतियोगिता में मौजूद उत्साह को और बढ़ाया तथा भारतीय पैरा-स्पोर्ट्स के भविष्य को लेकर उम्मीदें मजबूत कीं। पेरिस पैरालंपिक के बाद अब लॉस एंजिल्स 2028 की तैयारियों की ओर बढ़ रहे भारतीय खेल जगत के लिए ऐसी प्रतिभाओं का उभरना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुणे में आयोजित इस राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कुल 81 पैरा-ट्रायएथलीटों ने हिस्सा लिया। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि भारत में पैरा-ट्रायथलॉन धीरे-धीरे अपनी मजबूत जगह बना रहा है। प्रतियोगिता में महिलाओं की कुल भागीदारी 24.5 प्रतिशत रही। वहीं जूनियर, सब-जूनियर और KidsTRI वर्गों में लगभग एक-तिहाई एथलीटों की मौजूदगी ने यह भी दिखाया कि ट्रायथलॉन का आधार अब युवा खिलाड़ियों के बीच तेजी से विस्तार कर रहा है।
ट्रायथलॉन एक ऐसा खेल है, जिसमें तैराकी, साइकिलिंग और दौड़ तीनों खेलों का संयोजन होता है। ऐसे में खिलाड़ियों को शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक मजबूती, अनुशासन और लंबे समय तक निरंतर अभ्यास की जरूरत होती है। पैरा-ट्रायथलॉन में यह चुनौती और बढ़ जाती है, क्योंकि खिलाड़ियों को अपनी व्यक्तिगत क्षमताओं के अनुरूप प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होना पड़ता है। शाश्रुति नकाड़े की जीत इसी दृढ़ता और समर्पण का उदाहरण बनकर सामने आई है।
इंडियन ट्रायथलॉन फेडरेशन के डेवलपमेंट ऑफिसर हरीश प्रसाद ने रिकॉर्ड भागीदारी को भारतीय ट्रायथलॉन के विकास में महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि जूनियर, महिलाओं, सीनियर और ParaTRI वर्गों में बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि देशभर में इस खेल के लिए मजबूत आधार तैयार हो रहा है।
पुणे की यह चैंपियनशिप इसलिए भी खास रही क्योंकि यहां सिर्फ अनुभवी खिलाड़ियों ने ही नहीं, बल्कि युवा और पैरा-एथलीटों ने भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में उभरती प्रतिभाओं की मौजूदगी भारतीय ट्रायथलॉन के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है। खास तौर पर शाश्रुति नकाड़े की स्वर्णिम कामयाबी ने यह संदेश दिया कि सही अवसर, प्रशिक्षण और मंच मिलने पर भारतीय पैरा-एथलीट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाने की क्षमता रखते हैं।
449 एथलीटों की रिकॉर्ड भागीदारी और 81 पैरा-ट्रायएथलीटों की मौजूदगी के साथ पुणे की यह चैंपियनशिप भारतीय ट्रायथलॉन के बदलते स्वरूप की कहानी कहती है। शाश्रुति नकाड़े की जीत ने इस कहानी में एक प्रेरणादायक अध्याय जोड़ दिया है। अब नजर उन खिलाड़ियों पर है, जो इसी मंच से आगे बढ़कर भारत को आने वाले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में गौरवान्वित करने का सपना देख रहे हैं।
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