भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए NICMAR ने मुंबई में ‘भारत नव-निर्माण चैलेंज 2026’ के पहले संस्करण का भव्य ग्रैंड फिनाले आयोजित किया। इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता का उद्देश्य देश के युवा इंजीनियरों और तकनीकी छात्रों को नवाचार, शोध और व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करना था। प्रतियोगिता में देशभर के 500 से अधिक शिक्षण संस्थानों के 20,000 से ज्यादा छात्रों ने भाग लिया, जिससे यह आयोजन भारत के सबसे बड़े छात्र नवाचार मंचों में से एक बन गया।

प्रतियोगिता के ग्रैंड फिनाले में पिंपरी चिंचवड़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विजेता बनने का गौरव प्राप्त किया। विजेता टीम को 30 लाख रुपये के पुरस्कार पूल के साथ ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर एक्सीलेंस टूर का अवसर भी प्रदान किया गया। इस सम्मान का उद्देश्य छात्रों को वैश्विक स्तर पर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीकों और नवाचारों से परिचित कराना है, ताकि वे भविष्य में भारत के विकास में और प्रभावी योगदान दे सकें।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश के युवा इंजीनियर नई सोच और अत्याधुनिक तकनीकों के साथ आगे आएंगे।

उन्होंने कहा, “भविष्य के विकास के लिए भविष्यवादी शोध बेहद जरूरी है। हमारे युवा इंजीनियर लागत कम रखते हुए गुणवत्ता से समझौता किए बिना नई तकनीकों का विकास कर सकते हैं। यही नवाचार भारत को आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।”

गडकरी ने छात्रों से शोध और तकनीकी नवाचार को केवल अकादमिक गतिविधि तक सीमित न रखने, बल्कि उसे समाज और देश की वास्तविक समस्याओं के समाधान से जोड़ने का भी आह्वान किया।

NICMAR के चेयरमैन अजीत गुलाबचंद ने कहा कि भारत नव-निर्माण चैलेंज का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं है, बल्कि ऐसे पेशेवर तैयार करना है जो भविष्य की चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत कर सकें।

उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि छात्र केवल डिग्री लेकर संस्थानों से बाहर न निकलें, बल्कि वे नवाचार के माध्यम से समाज और उद्योग की वास्तविक समस्याओं का समाधान करने वाले पेशेवर बनें। मजबूत भारत का निर्माण मजबूत प्रतिभाओं और सशक्त विचारों से ही संभव है।”

प्रतियोगिता के साथ इंडस्ट्री-एकेडेमिया कॉन्क्लेव का भी आयोजन किया गया, जिसमें नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस दौरान भविष्य की टिकाऊ, तकनीक-संचालित और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा संस्थानों, उद्योग और सरकार के बीच बेहतर सहयोग से भारत वैश्विक स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।

यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवा प्रतिभाओं, उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने का प्रभावी मंच भी बना। बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी ने यह साबित किया कि देश के युवाओं में नवाचार और तकनीकी समाधान विकसित करने की अपार क्षमता है।

भारत नव-निर्माण चैलेंज 2026 ने यह संदेश दिया कि यदि युवा इंजीनियरों को सही अवसर, मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो वे विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Subscribe Deshwale on YouTube

Join Our Whatsapp Group

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version