भारत ने 78वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में दोहराई वैश्विक स्वास्थ्य की प्रतिबद्धता
“One World for Health” थीम पर बोलते हुए, भारत ने यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज की ओर अपने मजबूत कदम दुनिया के सामने रखे।
78वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के उद्घाटन सत्र में भारत ने एक बार फिर वैश्विक स्वास्थ्य न्याय और समावेशी चिकित्सा प्रणाली की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुन्या सलीला श्रीवास्तव ने सभा को संबोधित किया।
उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना ने कैसे देश में स्वास्थ्य के परिदृश्य को बदला है। इस योजना ने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाई है, बल्कि उन्नत इलाज के लिए वित्तीय सुरक्षा भी प्रदान की है और डिजिटल हेल्थ को तेज़ी से अपनाने में मदद की है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियाँ
भारत को हाल ही में WHO द्वारा ट्रेकोमा मुक्त देश घोषित किया गया है। साथ ही देश टीबी, कुष्ठ रोग, लिम्फेटिक फाइलेरिया, खसरा-रूबेला और कालाजार जैसी बीमारियों के उन्मूलन की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा, “हमने सभी 70 साल से अधिक उम्र के नागरिकों को आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना के तहत कवर किया है – आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना।”
पिछले 10 वर्षों में चिकित्सा कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 780 हो गई है, जिससे देश में हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स की नई पीढ़ी तैयार हो रही है।
महामारी संधि पर भारत का रुख
सभा में भारत ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि प्रस्तावित महामारी संधि (Pandemic Treaty) एक कानूनी रूप से बाध्यकारी ढांचा होना चाहिए, जो:
- सभी देशों को समय पर और पारदर्शी डेटा और रोगजनकों की जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित करे।
- मेडिकल संसाधनों तक समान पहुँच सुनिश्चित करे।
- ग्लोबल साउथ के लिए तकनीकी साझेदारी और क्षमतावृद्धि को बढ़ावा दे।
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि महामारी संधि को राष्ट्रीय संप्रभुता और देशों की क्षमताओं का सम्मान करते हुए तैयार किया जाना चाहिए।
“किसी को भी पीछे नहीं छोड़ना” – यही भारत की सोच
अपने संबोधन के अंत में, भारत ने WHO और सभी सदस्य देशों को महामारी संधि की दिशा में ऐतिहासिक प्रगति के लिए बधाई दी और दोहराया कि भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से लड़ने के लिए वैश्विक एकता और साझेदारी ही रास्ता है।


