अभिनेता मुकेश खन्ना ने एक बार फिर नई पीढ़ी, भारतीय टेलीविजन और सांस्कृतिक मूल्यों को लेकर अपनी बेबाक राय रखी है। ज्योतिषाचार्य और साइकि‍क गीतू परमार के साथ बातचीत में उन्होंने ‘शक्तिमान’, ‘महाभारत’ और आज के बच्चों के बदलते परिवेश पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि आज के बच्चों को 1997 के मुकाबले कहीं अधिक शक्तिमान जैसे प्रेरणादायक किरदारों की जरूरत है।

बातचीत के दौरान जब गीतू परमार ने पूछा कि क्या आज के टीवी और फिल्मी हीरो बच्चों को कोई सीख दे पा रहे हैं, तो मुकेश खन्ना ने अपने लोकप्रिय किरदारों को याद किया। उन्होंने कहा कि 1989 में प्रसारित ‘महाभारत’ और 1997 में आए ‘शक्तिमान’ ने उन्हें ऐसी पहचान दी, जो आज भी लोगों के दिलों में कायम है।

मुकेश खन्ना ने एक पुराना किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी के समय जब वह चुनाव प्रचार के लिए देशभर में जाते थे, तो आयोजक माइक पर घोषणा करते थे कि बड़ों के लिए भीष्म पितामह और बच्चों के लिए शक्तिमान आ रहे हैं। उनके अनुसार, उस समय बच्चे केवल अपने पसंदीदा किरदार को देखने और उसका उत्साह बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते थे।

उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी पहले से कहीं अधिक भ्रमित दिखाई देती है। उनके मुताबिक, आज के बच्चे बिना किसी स्पष्ट लक्ष्य के सिर्फ इसलिए भाग रहे हैं क्योंकि बाकी सभी भाग रहे हैं। उन्होंने इसे आधुनिक जीवन की सबसे बड़ी चुनौती बताया। उनका मानना है कि जब युवा अपने उद्देश्य को समझे बिना आगे बढ़ते हैं, तो अंत में उन्हें यह एहसास होता है कि जिस दौड़ में वे शामिल थे, उसका कोई अर्थ ही नहीं था।

देश के भविष्य पर बात करते हुए मुकेश खन्ना ने कहा कि भारत आने वाले वर्षों में दुनिया की सबसे युवा आबादी वाला देश बन सकता है। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उस समय युवाओं के कंधे इतनी जिम्मेदारी उठाने के लिए मजबूत होंगे। उनका कहना था कि अगर युवा मानसिक और नैतिक रूप से मजबूत नहीं होंगे, तो देश की प्रगति भी प्रभावित होगी।

‘महाभारत’ के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि 1989 के बाद कई बार इस महाकाव्य को छोटे पर्दे पर दोबारा पेश किया गया, लेकिन कोई भी संस्करण दर्शकों के दिलों में वैसी जगह नहीं बना सका। उन्होंने इसका श्रेय लेखक डॉ. राही मासूम रज़ा, कवि पंडित नरेंद्र शर्मा और निर्माता बी. आर. चोपड़ा की टीम को दिया। उनके अनुसार, इन लोगों ने कहानी और संवादों को जिस गहराई से प्रस्तुत किया, वही उसकी सबसे बड़ी ताकत थी।

मुकेश खन्ना ने कहा कि बाद के संस्करणों में मूल कहानी के साथ कई बदलाव किए गए, जिससे उसकी आत्मा ही खत्म हो गई। उनका मानना है कि भारतीय महाकाव्यों और परंपराओं को आधुनिक बनाने के नाम पर उनकी मूल भावना से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी बताया कि मूल ‘महाभारत’ के कलाकारों का चयन बेहद कड़ी प्रक्रिया के बाद हुआ था। उन्होंने खुद भी पूरी वेशभूषा में ऑडिशन दिया था, जबकि उस समय उनके पैर में चोट थी। उनके अनुसार, आज कलाकारों के चयन में पहले जैसी गंभीरता कम दिखाई देती है।

बातचीत के अंत में मुकेश खन्ना ने कहा कि देश की परंपराओं, वेदों और सांस्कृतिक विरासत को बदला नहीं जा सकता। उनका मानना है कि नई पीढ़ी को मनोरंजन के साथ ऐसे किरदारों और कहानियों की भी जरूरत है, जो उन्हें सही दिशा, नैतिक मूल्य और जीवन का उद्देश्य समझा सकें।

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