जम्मू-कश्मीर के पहलगाम इलाके में मंगलवार, 22 अप्रैल 2025 को हुए एक बड़े आतंकी हमले में 26 लोगों की जान चली गई, जिनमें 24 भारतीय नागरिक और 2 विदेशी शामिल हैं। हमला उस वक्त हुआ जब पर्यटक बैसारन घास के मैदान में घूम रहे थे — जिसे ‘मिनी स्विट्ज़रलैंड’ भी कहा जाता है।
कैसे हुआ हमला?
शाम करीब 3:45 बजे कुछ हथियारबंद आतंकी जंगल की तरफ से आए और अचानक पर्यटकों पर गोलियां बरसाने लगे। चश्मदीदों के अनुसार, हमलावरों ने लोगों की पहचान पूछकर फायरिंग की। कुछ पर्यटक घबरा कर भागे, लेकिन कई लोग वहीं मारे गए। घायल लोगों को हेलीकॉप्टर से श्रीनगर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
इलाके में अफरातफरी
हमले के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई। सुरक्षाबलों ने बैसारन और उसके आसपास का क्षेत्र घेर लिया। ड्रोन और स्निफर डॉग्स की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस बीच उरी में भी घुसपैठ की कोशिश को सेना ने नाकाम किया।
प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की त्वरित प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब दौरा बीच में छोड़कर दिल्ली लौटते ही आपात बैठक बुलाई। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल हुए।
गृह मंत्री अमित शाह उसी शाम श्रीनगर पहुंचे और उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक की। उन्होंने कहा, “दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
लोगों का ग़ुस्सा और विरोध प्रदर्शन
दोडा, किश्तवाड़ और जम्मू समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए। लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी की और सरकार से जवाब मांगा। मुस्लिम समुदाय के कई लोग भी हमले की निंदा करने सड़कों पर उतरे।
जांच में जुटी एजेंसियां
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने घटना की जांच शुरू कर दी है। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमलावर किस संगठन से जुड़े थे, लेकिन शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह हमला बाहरी आतंकी समूह की मदद से किया गया हो सकता है।
पर्यटन पर गहरा असर
हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में गर्मियों की छुट्टियों के लिए की गई हजारों होटल बुकिंग रद्द कर दी गई हैं। टूरिज्म सेक्टर को भारी नुकसान होने की आशंका है।
सवाल उठते हैं…
इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने सरकार की “कश्मीर में शांति” की कहानी को लेकर आलोचना की है।


