भारत में हर साल लाखों लोगों को सांप काटते हैं। इनमें से सबसे ज्यादा ज़हरीला और खतरनाक सांप है — रसेल वाइपर। ये सांप पूरे देश में पाये जाते हैं, खासकर गांवों और खेतों के इलाकों में। कई बार जब कोई महिला या पुरुष खेत में काम कर रहे होते हैं या कहीं खुले में बैठे होते हैं, तो यह सांप आकर काट लेता है। अगर समय पर इलाज न मिले, तो इससे मनुष्य की जान तक जा सकती है।
वैज्ञानिकों ने क्या खोज निकाला है?
अब इस खतरे से निपटने के लिए भारत के एक बड़े विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु स्थित इंडियन इन्स्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिकों ने एक नया तरीका खोज निकाला है। दरअसल उन्होंने रसेल वाइपर के ज़हर का नक्शा (Venom Map) तैयार किया है। यह नक्शा दिखाता है कि भारत के अलग-अलग इलाकों में इस सांप का ज़हर कैसे बदलता है। आप सोचेंगे कि सांप तो एक ही है, फिर इसका ज़हर कैसे बदल सकता है? तो असल में रसेल वाइपर जैसे सांप जब अलग-अलग जगहों पर रहते हैं, जैसे कि गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश आदि; तो वहां के मौसम, मिट्टी और भोजन के हिसाब से उनके ज़हर की ताकत और असर में फर्क आ जाता है। कुछ जगहों पर उनके ज़हर में खून जमाने वाले तत्व ज्यादा होते हैं, तो अन्य जगहों पर मांस गलाने वाले तत्व ज्यादा होते हैं।
इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने 34 अलग-अलग जगहों से 115 रसेल वाइपर पकड़े। उनका ज़हर इकट्ठा किया और उनकी गहराई से जांच की। उन्होंने यह पड़ताल की कि कौन-से एंजाइम (ज़हर में मौजूद रसायन) किस जगह रसेल में ज्यादा हैं और किस जगह के रसेल में कम। इस तरह उन्होंने एक बड़ा और साफ़ नक्शा बना दिया कि भारत में कहां किस तरह का ज़हर पाया जाता है।
अब तक डॉक्टर एक ही तरह का एंटीवेनम (ज़हर का इलाज करने वाली दवा) पूरे भारत में इस्तेमाल करते थे। लेकिन चूंकि हर जगह का ज़हर एक जैसा नहीं था, इसलिए इलाज कई बार सही नहीं बैठता था। लेकिन इस रिसर्च के बाद डॉक्टर अब ये जान पाएंगे कि किस इलाके में सांप का ज़हर कैसा है? और फिर उसी के हिसाब से वे दवा भी देंगे।
कैसे बदलेगा इलाज?
सोचिए, जैसे उत्तर भारत में ज़हर का असर शरीर में खून जमाने वाला होता है, जैसा कि इस रिसर्च से पता चला है, तो वहां ऐसा एंटीवेनम दिया जाएगा जो खून को अतिशीघ्र पतला करे। दूसरी तरफ, दक्षिण भारत में जहाँ का ज़हर मांस को गला देने के गुण वाला पाया गया है, तो वहां ऐसा इलाज होगा जो मांस को बचाए। बस, यही मकसद है इस रिसर्च का। यानी इलाके के हिसाब से इलाज देना।
इस रिसर्च का सबसे बड़ा फायदा होगा भारत के गांवों और छोटे शहरों को। क्योंकि अक्सर वहीं पर सांप काटने के ज्यादा मामले आते हैं। और इलाज की सुविधा भी वहाँ पर अपेक्षाकृत कम होती है। अब अगर सरकार और दवा कंपनियां इस नक्शे के आधार पर दवा बनाएंगी, तो गांव में भी ज्यादा सटीक और असरदार इलाज मिल सकेगा।
अभी भारत में जो एंटीवेनम इस्तेमाल होती हैं, वो कुछ ही सांपों के ज़हर से बनती हैं, जैसे कि:
रसेल वाइपर
कोबरा
करैत
सॉ स्केल्ड वाइपर
पर इनकी दवाएं भी एक जैसे ज़हर के लिए बनायी जाती हैं। अगर किसी इलाके में सांप का ज़हर थोड़ा अलग निकला, तो दवा उतनी असरदार नहीं होती। इसलिए रिसर्चरों का मानना है कि अब “वन-साइज़ फिट्स ऑल” वाला फॉर्मूला यानी सब जगह एक जैसी दवा नहीं चल सकती।
IISc की रिसर्च में शामिल वैज्ञानिकों ने कहा, “हमने देखा कि जलवायु और भौगोलिक स्थिति के हिसाब से ज़हर बदलता है। इसलिए इलाज भी उसी के मुताबिक होना चाहिए।” वे आगे कहते हैं कि अगर एंटीवेनम दवाएं भी इलाके के अनुसार बनायी जाएंगी, तो बहुत सारी जानें बचायी जा सकती हैं।
भारत में सांप काटने के आंकड़ेः-
हर साल करीब 50 लाख लोगों को सांप काटता है।
इनमें से लगभग 50 हज़ार लोगों की मौत हो जाती है।
कई लोग ज़िंदा तो बचते हैं लेकिन हाथ-पैर खो बैठते हैं या जिंदगीभर के लिए विकलांग हो जाते हैं।
ये आंकड़े डराने वाले हैं और इसका इलाज अब ज्यादा वैज्ञानिक तरीके से किया जाना जरूरी है। इसलिए अब कुछ करने की बारी है सरकार और दवा कंपनियों की। उन्हें चाहिए कि इस रिसर्च के आधार पर वे अलग-अलग इलाके के लिए अलग एंटीवेनम बनाएं। सर्वप्रथम ग्रामीण अस्पतालों में इसका इस्तेमाल शुरू करें तथा डॉक्टरों और नर्सों को इसकी ट्रेनिंग दें। अगर ये सब हुआ, तो भारत में सांप के काटने से मरने वालों की संख्या काफी कम की जा सकती है।
अब सवाल यह कि क्या आप भी कुछ कर सकते हैं? बिलकुल! अगर आप गांव में रहते हैं या खेतों में काम करते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
रात को बाहर नंगे पांव न चलें।
खेत में काम करते वक्त लंबे बूट पहनें।
जमीन पर हाथ डालने से पहले देख लें।
अगर कोई सांप काट ले, तो तुरंत अस्पताल जाएं। झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें।
IISc की ये रिसर्च एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। इससे लाखों लोगों की जान बचायी जा सकती है। ज़हर का नक्शा बनाकर अब इलाज को सही दिशा दी जा सकती है। खासकर भारत जैसे देश में जहां सांप का काटना एक आम बात है, वहां इस तरह की वैज्ञानिक खोजें ही असली जीवनरक्षक साबित हो सकती हैं।
अगर आप चाहते हैं कि आपके गांव या मोहल्ले में सांप काटने पर बेहतर इलाज मिले, तो इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं।


