केरल नाम सुनते ही प्रकृति याद आ जाती है। साथ में याद आते हैं मुन्नार, आलाप्पुझा यानी अलेप्पी, चाय के बागान, हाउसबोट्स और कोच्चि। केरल में कडमक्कुडी भी है। यह बेमिसाल और मनमोहक है। कोच्चि से दूर नहीं होने के बावजूद यह व्यस्तता और चहल-पहल से पूरी तरह मुक्त है। कडमक्कुडी द्वीपसमूह है। केरल के बैकवॉटर्स को करीब से महसूस करने के लिए इसकी तरह की जगहें बहुत कम होंगी।
एर्नाकुलम जिले के उत्तरी भाग में कडमक्कुडी स्थित है। यह पिझाला, मुरिक्कल, पोथुवाइप, वल्लारपडम और अन्य द्वीपों को जोड़ता है। इसका क्षेत्र वेम्बनाड झील और अरब सागर के बीच के विशाल जलप्रदेश का हिस्सा है। पानी की संकरी नहरें, मैंग्रोव के जंगल, नौकाएँ, नारियल के पेड़ और शांत ग्रामीण जीवन इसकी विशेषताएँ हैं।
बरसाती मौसम में कडमक्कुडी का रंग बदल जाता है। आसमान में धीरे-धीरे विहरते बादल, बारिश से साफ और चमकदार हुई हरियाली और दूर तक फैला बैकवॉटर। सब मिलकर आँखों को ठंडक पहुँचाते हैं। सबसे बड़ा आकर्षण असाधारण निरांत का अनूठा अनुभव है। मन में सवाल उठता हो कि कडमक्कुडी में देखना-महसूस करना क्या है, तो यही है जवाब।
कडमक्कुडी का पूरा इलाका सुंदर है। एक द्वीप से दूसरे द्वीप पर पहुँचते हुए दृश्य लगातार बदलते रहते हैं। कहीं संकरी नहरें हैं, कहीं मैंग्रोव हैं, कहीं छोटे गाँव हैं, मछुआरों की बस्तियाँ हैं। सबसे पहले बात कडमक्कुडी बैकवॉटर्स की। इन्हें महसूस करने के लिए छोटी मोटरबोट या पारंपरिक नौका में घूमना चाहिए। नहरों से गुजरते हुए दोनों तरफ नारियल के पेड़, पानी पर तैरते पक्षी और काम करते स्थानीय लोग दिखते हैं। सब मिलकर सरल ग्रामीण जीवन की झलक पेश करते हैं। इनमें भी सुबह जल्दी और शाम का समय खास बन जाता है।
पिझाला द्वीप पक्षीप्रेमियों के लिए स्वर्ग है। यहाँ प्रवासी और स्थानीय पक्षी देखने को मिलते हैं। बरसाती पानी और हरियाली के बीच उड़ते श्वेत बगुले, किंगफिशर, इग्रेट और अन्य जलचर पक्षी घंटों रोके रखते हैं। मुरिक्कल और पोथुवाइप की रास्तों पर यातायात कम होने से निरांत साइकिलिंग की जा सकती है। इसके अलावा द्वीपों पर कई सुंदर चर्च हैं। उनमें से एक या अधिक चर्च जाने की योजना बनाई जा सकती है।
पंद्रह-सत्रह हजार की आबादी इन द्वीपों पओर का इलाका यहाँ के ग्रामीण जीवन को महसूस करने का मौका देता है। इसके छोटे पुल, संकरे रास्ते, नौकाएँ और पानी विशेष रूप से ध्यान खींचते हैं। शहरी पर्यटन से अलग दुनिया यहाँ महसूस होती है।
कडमक्कुडी में सूर्योदय और सूर्यास्त अवश्य देखें। पानी पर पड़ती किरणें और बरसाती बादलों के बीच बनते रंग मंत्रमुग्ध करने की क्षमता रखते हैं। फोटोग्राफी के लिए यह समय लोकप्रिय है। साइकिलिंग के लिए कडमक्कुडी के आइलैंड रोड पहुँच जाएँ। पानी के दोनों तरफ केर है। कुल मिलाकर 14 द्वीप हैं। मुश्किल इतनी है कि इतनी सुंदर जगह पर पर्यटन संबंधी सुविधाएँ अपेक्षा के अनुरूप विकसित नहीं हुई हैं। इसके लिए प्रयास जारी हैं। अभी जाना हो तो थोड़ी असुविधाओं के बीच जल, प्रकृति और निरांत को महसूस करने का मन बनाकर जाएँ। ऐसा करने पर निराशा के बजाय पूरा संतोष अनुभव किया जा सकेगा।
कहाँ रहें? क्या खाएँ?
कडमक्कुडी में रहने का मजा शांत और प्रकृति के करीब का होता है। बड़ी और सुविधाओं से लैस होटल की यहाँ उम्मीद न रखें। बैकवॉटर के किनारे होमस्टे, विला और छोटे रिसॉर्ट्स में रुकना बेहतर है। ऐसे ठहरने में सुबह खिड़की खोलते ही सामने जल, नारियल के पेड़ और पक्षियों की चहचहाहट दोस्ती करने आ गई-सी लगती है। यही यहाँ की सबसे बड़ी लक्जरी है। इससे अलग और अधिक विकल्प चाहिए तो कोच्चि में रहें। दोनों के बीच करीब तीस किलोमीटर की दूरी है। कोच्चि में फाइव स्टार होटल में भी रुका जा सकता है। कई पर्यटक दिनभर कडमक्कुडी में घूमकर कोच्चि में ठहरते हैं।
कडमक्कुडी का भोजन केरल की पारंपरिक व्यंजनों से भरा है। समुद्री भोजन ज्यादा मिलता है। फिर भी शाकाहारी भोजन की कोई समस्या नहीं है। साउथ इंडियन व्यंजन जैसे इडली, डोसा, उत्तपम, अप्पम, पुट्टू, इडियप्पम, वेजिटेबल स्ट्यू, सांभर, थोरन, अवियल, ओलन और कूट्टू करी आसानी से मिलते हैं। रसम, मोरू करी और विभिन्न प्रकार की दाल तो हैं ही। यात्रा में सद्य (केरल का पारंपरिक थाली भोजन) मिलने का मौका मिले तो जरूर लें। केले के पत्ते पर परोसा जाने वाला केरल का यह भोजन छप्पनभोग महसूस कराने वाला है। फिल्टर कॉफी, नारियल पानी और केले के चिप्स याद दिलाने की जरूरत नहीं, राइट? कडमक्कुडी में भोजन की जगहें छोटी और स्थानीय किस्म की हैं। जैन भोजन या उत्तर भारतीय भोजन के लिए कोच्चि सुविधाजनक है।
कैसे पहुँचें?
मुंबई से तेजी से कडमक्कुडी पहुँचने के लिए फ्लाइट सबसे बेहतर माध्यम है। हमारे शहर से कोच्चि के लिए अच्छी संख्या में फ्लाइट्स हैं। अच्छी बात यह है कि अग्रिम बुकिंग करने पर टिकट सस्ती मिल सकती है। कोच्चि एयरपोर्ट से कडमक्कुडी 35-40 किलोमीटर दूर है। यह रास्ता टैक्सी से करीब एक घंटे में तय किया जा सकता है। ट्रेन से जाने के लिए मुंबई से एर्नाकुलम जंक्शन या एर्नाकुलम टाउन पहुँचना होगा। इसके लिए भी अच्छी संख्या में ट्रेनें हैं। एक बार वहाँ पहुँचने के बाद कडमक्कुडी आसानी से पहुँचा जा सकता है। दोनों के बीच करीब 15 से 20 किलोमीटर की दूरी है। टैक्सी, रिक्शा या बस से यह दूरी तय की जा सकती है। स्थानीय आवागमन के लिए कार, टैक्सी या अन्य वाहन लिया जा सकता है।
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