Author: Aazeem Hamida Khaan

Creative Writer, Journalist, Sub-Editor

आज हम शादी के आमंत्रण से समझ जाते हैं की शादी शानदार होगी, या फिर साधारण। और उसी से हम तय करते हैं की शादी में जाना चाहिए या नहीं। आज के युग में शादियाँ केवल एक मनोरंजन का साधन बन चुकी हैं। हमे बड़ा मज़ा आता है जब हम किसी बड़ी शादी में जाते हैं, और हम उन शादियों की बुराई भी करते हैं, जो साधारण सी होती हैं। ये मानसिकता सिर्फ किसी एक की नहीं है। ज़्यादातर लोग इसी मानसिकता का शिकार हैं। अब इसी कहानी को माँ-बाप के नजरिए से देखते हैं। क्या वाकई में शादियों के…

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अच्छा, आज आप लोगों ने चाय पी कि नहीं? देखो, हमारे यहां तो चाय बिना दिन शुरू ही नहीं होता। सुबह उठे नहीं कि सबसे पहला ख्याल… ‘चाय बन गई क्या?’नहा कर आए तो चाय चाहिए, शाम को काम से लौटो, तो एक प्याली चाय चाहिए। सरदर्द हो, थकावट हो, बारिश हो, या बस मन उदास हो… चाय चाहिए। मेहमान आ जाएं तो भी… “पहले चाय तो लो यार।”और बाहर अगर दोस्तों के साथ बैठे हों, सड़क किनारे टपरी पर, तो बिना चाय के बात भी अधूरी लगती है। टपरी की कटिंग हो या ट्रेन की कुल्हड़ वाली गरम चाय……

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या फिर, काम के बोझ तले दबे हुए, गुस्से में बड़बड़ाते हुए खुद को पाया? अगर इनमें से कुछ भी आपको जाना-पहचाना लगता है, तो बधाई हो! आप आधिकारिक तौर पर ओवरवर्क के चक्र में फंस चुके हैं। ये सुबह 9 से शाम 6 का जॉब (जो असल में सुबह 9 से अनंत तक चलता है) सिर्फ नौकरी नहीं है। ये एक ऐसा चक्कर है जो आपका सबकुछ चूस लेता है: और बदले में आपको क्या मिलता है? निराशा, तनाव, और एक ऐसा कॉरपोरेट सिस्टम जो आपको एक सेकंड में बदल देगा, जब उसे आपसे बेहतर कोई और मिल जाएगा।…

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बात 1947 की है, जब भारत आज़ादी की सैर पर निकला, लेकिन एक खूबसूरत वादी, जम्मू और कश्मीर, दो नए देशों… भारत और पाकिस्तान के बीच खींचतान में फंस गई। सोचिए, बर्फीली चोटियां, हरी-भरी घाटियां, और शांत झीलें, फिर भी एक ऐसी जंग का मैदान जो आज, 2025 में भी, शांति की तलाश में है। यह कहानी है सपनों के टूटने की, जानों के खोने की, और एक ऐसी गुत्थी की जो सुलझने का नाम नहीं लेती। आइए, मैं आपको बताता हूँ कि यह सब कैसे शुरू हुआ और 2025 में भी यह घाव क्यों नहीं भर पा रहा। एक…

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रात में जब तुम छत पर लेटे हो, तो आसमान की तरफ देखते देखना, तुम्हें एक दूधिया-सी चमकती लकीर दिखेगी। पता है वो क्या है? वो है हमारा घर… मिल्की-वे आकाशगंगा! ये कोई छोटा-मोटा ठिकाना नहीं है, बल्कि तारों, ग्रहों, और ढेर सारे रहस्यों का एक विशाल समंदर है। तो चलिए, आज मैं आपको इस आसमानी घर का चक्कर लगवाता हूँ, और वो भी 2025 तक की ताज़ा खोजों के साथ! हमारा आसमानी घर कैसा है? तो सबसे पहले मिल्की-वे को समझने के लिए एक सर्पिल चकरी की कल्पना कीजिए। इसका बीच का हिस्सा मोटा-सा है, और चारों तरफ तारों…

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कल्पना करो, स्वतंत्रता दिवस का दिन है। हर दुकान, हर घर भारतीय तिरंगा लहरा रहा है। वो केसरिया, सफेद, और हरा रंग। ये सिर्फ़ कपड़ा नहीं, भारत की धड़कन है, हर भारतीय की शान है। लेकिन क्या तुम्हें पता है इस तिरंगे को किसने बनाया? चलो, मैं तुम्हें बताता हूँ पिंगली वेंकैया की कहानी, वो शख़्स जो पिंगली वेंकैया भारतीय ध्वज डिज़ाइनर के नाम से जाना जाता है। आंध्र के एक छोटे से गाँव का वो नौजवान, जिसने बड़ा सपना देखा। वो सिर्फ़ स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे। वो एक विद्वान थे। एक सपने देखने वाले, जिन्होंने भारत की पहचान को…

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Imagine a billion people, one in eight of us… silently grappling with mental health struggles, often with no way to get help. That’s the global mental health crisis, a human emergency that’s shaking lives, economies, and communities worldwide. The COVID-19 pandemic made things worse, spiking anxiety and depression by 25%. From teens facing rising suicide rates to trillions in economic losses, this crisis touches everyone. Stigma, scarce resources, and discrimination block access to care, yet hope is emerging through AI therapy apps, community efforts, and a bold global plan. Let’s dive into the scale, the barriers, the costs, and the…

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क्या आप मानोगे? अगर मैं यह कहूं की दुनिया में आज भी एक ऐसी जनजाति है जिसका संपर्क हमारी बाहरी दुनिया से बिल्कुल भी नहीं है, और न ही वो चाहती है की बाहरी दुनिया उनसे कोई संपर्क करे। यह बात बिल्कुल सच है… हमारे भारत की बंगाल की खाड़ी में, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के बीच, एक छोटा-सा टापू है… नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड। यहाँ रहते हैं सेंटिनलीज़, दुनिया की सबसे अलग-थलग जनजातियों में से एक। लगभग 100-150 लोगों की यह छोटी-सी आबादी हज़ारों सालों से बाहरी दुनिया से कटी हुई है, शिकार करके, मछली पकड़कर और अपनी ज़मीन को…

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बच्चा बाज़ी… नाम सुनकर लगता है जैसे कोई खेल हो, लेकिन यह खेल नहीं, एक ऐसा अपराध है जो इंसानियत को शर्मसार करता है। अफ़ग़ानिस्तान के कुछ हिस्सों और पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा जैसे इलाक़ों में यह घिनौनी प्रथा चलती है, जहाँ 10-18 साल के मासूम लड़कों को लड़कियों की तरह सजाया जाता है, गुप्त पार्टियों में नचाया जाता है, और उनका जिस्मानी शोषण किया जाता है। आइए, इस काले सच को हर कोण से समझें। क्या है बच्चा बाज़ी? बच्चा बाज़ी का मतलब होता है ‘लड़कों का खेल’। यह अफ़ग़ानिस्तान के कुछ हिस्सों और थोड़ी सी जगह पाकिस्तान के…

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In this article, we dive into a jaw-dropping story about Pakistan’s Air Force and its so-called ‘welfare’ arm, the Shaheen Foundation. Sounds noble, right? Think again. This is not about protecting the skies. It’s about a multi-billion-dollar business empire that’s bleeding Pakistan dry while lining the pockets of retired generals. Let’s unpack this mess and see how a military wing turned into a corporate giant, leaving ordinary Pakistanis in the dust. A ‘Welfare’ front with a catch Back in 1977, the Shaheen Foundation was born with a promise… support Air Force personnel, retirees, and their families. Sounds heart-warming. But fast-forward…

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