रामायण और महाभारत की तरह ही ग्रीक पौराणिक कथा पर आधारित यह फिल्म इन दिनों जबरदस्त चर्चा में है। इसकी आईमैक्स टिकटों के दाम आसमान छू रहे हैं। बहुत-से लोगों के मन में सवाल है कि आखिर निर्देशक क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म में ऐसा क्या है जिसकी दुनिया भर में इतनी चर्चा हो रही है। आइए, जानते हैं कि आखिर द ओडिसी में ऐसा क्या खास है इस लेख में आपको फिल्म की समीक्षा के साथ-साथ इसकी कहानी, ग्रीक पौराणिक कथा के प्रमुख पात्रों और स्थानों की जानकारी मिलेगी। साथ-साथ, आईमैक्स कैमरे की रोचक दुनिया से भी परिचित कराया जाएगा।
संजय वि. शाह
आईमैक्स कैमरे पर, आईमैक्स फॉर्मेट के लिए बनी किसी अंग्रेज़ी फिल्म को क्या सामान्य थिएटर में देखना चाहिए? वह भी हिन्दी में? पता नहीं… लेकिन पिछले शुक्रवार मैंने यही किया। द ओडिसी हिन्दी में देखी, एक सामान्य थिएटर में। शायद चालीस-पचास से भी कम दर्शक थे। उद्देश्य सिर्फ इतना था कि समय की सीमाओं के बीच क्रिस्टोफर नोलन की, पूरी तरह आईमैक्स कैमरों पर शूट की गई नई फिल्म को पहले ही दिन देख लिया जाए।
और हाँ, आईमैक्स का टिकट तो पहले ही ले रखा है। उस अनुभव का इंतज़ार अभी बाकी है।
फिल्म कैसी है? संक्षेप में कहूँ तो इतिहास और गहन विषयों पर बनी फिल्मों के शौकीनों को इसे कम से कम एक बार अवश्य देखना चाहिए। अब तक 13 फिल्में बना चुके निर्देशक क्रिस्टोफर नोलन की अपनी अलग फिल्ममेकिंग शैली है। एक-दो फिल्मों को छोड़ दें तो उनकी लगभग हर फिल्म अपने समय की उल्लेखनीय कृति रही है। इनमें द डार्क नाइट (2008) और इंटरस्टेलर (2014) सर्वोत्तम हैं। लगभग उसी स्तर पर इन्सेप्शन, द प्रेस्टिज और उनकी पिछली फिल्म ओपेनहाइमर भी आती हैं।
द ओडिसी पर आगे बढ़ने से पहले एक महत्वपूर्ण बात।

अगर यह फिल्म आईमैक्स में और अंग्रेज़ी में देखी होती तो अनुभव निश्चित रूप से अलग होता। मेरा बेटा देख चुका है। वह इसकी तारीफ़ करते नहीं थक रहा। दूसरी ओर, हिन्दी संस्करण देखने का अनुभव भी अपने आप में अलग और थोड़ा आश्चर्यजनक रहा। मेरे साथ बैठे अधिकांश दर्शकों को न तो ग्रीक महाकथा द ओडिसी के बारे में विशेष जानकारी थी और न ही क्रिस्टोफर नोलन के सिनेमा के बारे में। शायद उन्हें यह भी पता नहीं था कि फिल्म लगभग तीन घंटे लंबी है। फिर भी, आईमैक्स का वास्तविक अनुभव न मिलने के बावजूद भी, वे प्रभावित हुए। यही एक बेहतरीन फिल्म की असली ताकत होती है।
पढ़ने में सहजता बनी रहे, इसलिए इस लेख में दो बातों का विशेष ध्यान रखा गया है। पहली, फिल्म की कहानी अलग और विस्तार से दी गई है। दूसरी, फिल्म में दिखाई देने वाले तथा ग्रीक पौराणिक कथा में होने के बावजूद फिल्म में शामिल न किए गए पात्रों, स्थानों और अन्य महत्त्वपूर्ण शब्दों की सूची अलग से दी गई है। अगर आपने अभी तक फिल्म नहीं देखी है, तो उस सूची पर एक नज़र अवश्य डालिए।
तो आखिर द ओडिसी में ऐसा क्या खास है?
प्रामाणिकता। अन्य फिल्मों की तुलना में द ओडिसी कहीं अधिक वास्तविक महसूस होती है। कृत्रिम और बनावटी विजुअल इफेक्ट्स के बजाय यहाँ यथार्थ का जादू दिखाई देता है। शूटिंग के लिए चुने गए मोरक्को, आइसलैंड और माल्टा के वास्तविक लोकेशन्स इस अनुभव को अधिक प्रभावशाली बनाते हैं। लुडविग गोरान्सन का बैकग्राउंड म्यूज़िक मानो फिल्म का एक सशक्त पात्र बन जाता है। जो दर्शक इसे आईमैक्स में देखेंगे, वे इसकी वास्तविक शक्ति का भरपूर अनुभव कर सकेंगे।
पात्रों की वेशभूषा पहली नज़र में बहुत आकर्षक नहीं लगती। वास्तव में, जब फिल्म का फर्स्ट लुक जारी हुआ था तब मैट डेमन के ओडिसियस अवतार की काफी आलोचना हुई थी। लेकिन नोलन के प्रशंसकों और विषय के जानकारों ने इसके पीछे की सोच को समझाया। एक मत यह भी सामने आया कि फिल्म एमिली विल्सन के उस चर्चित अनुवाद से प्रेरित है जिसमें ओडिसियस को किसी राजसी वैभव में डूबे सम्राट के रूप में नहीं, बल्कि संघर्षों से जूझते, व्यावहारिक और थके-मांदे योद्धा के रूप में पेश किया गया है। यही कारण है कि उसके वस्त्रों में दस वर्षों तक युद्ध और भटकन झेलने वाले, अपने घर लौटने को व्याकुल राजा की छवि दिखाई देती है। केवल ओडिसियस ही नहीं, अन्य पात्रों की वेशभूषा भी उन पारंपरिक ऐतिहासिक फिल्मों से अलग है जिनमें अक्सर अत्यधिक भव्यता दिखाई जाती है।

अभिनय की बात करें तो मैट डेमन अपने किरदार में असाधारण हैं। उनके अलावा भी कई कलाकार प्रभाव छोड़ते हैं। सबसे अधिक प्रभावित करते हैं रॉबर्ट पैटिन्सन, जिन्होंने एंटिनोअस का किरदार निभाया है। उनका नकारात्मक अभिनय अत्यंत प्रभावशाली है। चुनिंदा दृश्यों में पेनेलोपी के रूप में ऐन हैथवे, सर्सी के रूप में सामंथा मॉर्टन, एथेना के रूप में ज़ेन्डाया और यूमेयस के रूप में जॉन लेगुइज़ामो बेहद अच्छे लगे हैं। हमारे अपने भारतीय मूल के मूल गुजराती अभिनेता हिमेश पटेल ने यूरिलोकस की महत्त्वपूर्ण भूमिका को पूरी गरिमा के साथ निभाया है। वहीं कैलिप्सो के रूप में चार्लीज़ थेरॉन अपने प्रशंसकों को निराश नहीं करेंगी।
यदि आप फिल्म हिन्दी में देखने जा रहे हैं, तो पहले से मानसिक तैयारी कर लीजिए। मूल आईमैक्स अंग्रेज़ी संस्करण की तुलना में हिन्दी संस्करण का प्रभाव स्वाभाविक रूप से कम महसूस होगा। स्थिति कुछ वैसी ही बन जाती है जैसे हमारी अपनी किसी पौराणिक कथा को किसी विदेशी भाषा में रूपांतरित कर दिया जाए। कुछ संवादों का हिन्दी रूपांतरण प्रभावी है, लेकिन अनेक संवादों में वही धार नहीं आ पाती। फिर भी, जो दर्शक अंग्रेज़ी संस्करण का पूरा आनंद लेने में सहज नहीं हैं, उनके लिए यह हिन्दी संस्करण अच्छा विकल्प है।
हिन्दी में द ओडिसी ज़रा-सी लंबी लग सकती है। अवधि 172 मिनट है। लेकिन यदि इसे आईमैक्स में देखेंगे तो शायद लंबाई बिल्कुल महसूस न हो। अत्यंत सूक्ष्म दृश्य-विन्यास और बारीक डिटेलिंग के कारण फिल्म हर क्षण दर्शक को अपने साथ बाँधे रखती है।
फिल्म निर्माण की दृष्टि से इसकी सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि कई बार ऐसा लगता है मानो अलग-अलग प्रसंगों को जोड़कर कहानी पेश की हुई हो। संभवतः इसका कारण यह है कि इतनी विस्तृत और बहुस्तरीय महागाथा को मात्र तीन घंटे में समेटना आसान नहीं था। विरह, भावनात्मक गहराई और मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति में द ओडिसी कुछ स्थानों पर अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाती। हालांकि, यह बात क्रिस्टोफर नोलन की पिछली फिल्मों में भी देखने मिली है। भव्यता और दृश्यात्मक प्रामाणिकता से दर्शकों को विस्मित करने की प्रक्रिया में नोलन भावनात्मक पक्ष को अपेक्षाकृत कम महत्त्व देते हैं। शायद यही उनकी रचनात्मक शैली का हिस्सा है।
सवाल यह नहीं है कि द ओडिसी हर किसी को पसंद आएगी या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या ऐसी फिल्में बननी चाहिए? इसका उत्तर है, हाँ, बिल्कुल।

क्योंकि ऐसी फिल्में सिनेमा को केवल मनोरंजन का माध्यम बनाकर नहीं छोड़तीं। वे उसे संस्कृति, इतिहास और पौराणिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बना देती हैं। नोलन ने होमर की अमर गाथा को अपनी विशिष्ट सिनेमैटिक अदा में पर्दे पर उतारा है। कहीं उन्होंने कथा को तीव्र गति दी है, कहीं संक्षिप्त किया है, कहीं निजी कल्पनाशक्ति का स्पर्श भी जोड़ा है। परिणाम स्वरूप जो फिल्म सामने आती है, वह हर दृष्टि से पूर्ण नहीं है, लेकिन अपनी भव्यता, तकनीकी उत्कृष्टता और महत्वाकांक्षा के कारण निश्चित रूप से प्रभावशाली है।
यदि आप केवल मसाला मनोरंजन की तलाश में सिनेमाघर जा रहे हैं, तो संभव है कि द ओडिसी आपके लिए न हो। लेकिन यदि आपको महाकाव्य, पौराणिक कथाएँ, विराट दृश्य और विचारोत्तेजक सिनेमा आकर्षित करते हैं, तो नोलन की इस सिनेमाई यात्रा में अवश्य शामिल हों।
और हाँ, संभव हो तो इसे आईमैक्स में और अंग्रेज़ी में ही देखें। शायद तब आपको स्वयं समझ में आ जाएगा कि दुनिया भर में द ओडिसी को लेकर इतनी चर्चा आखिर क्यों हो रही है।
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