अमेरिका में बर्ड फ्लू का एक खतरनाक रूप H5N1 अब सिर्फ पक्षियों तक सीमित नहीं रहा। ये वायरस अब गायों और इंसानों तक पहुंच चुका है, और इसी को लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है।
ग्लोबल वायरस नेटवर्क (Global Virus Network) नाम की एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्था ने साफ कहा है कि अगर यह वायरस इंसानों के बीच फैलने लगा, तो यह एक नई महामारी को जन्म दे सकता है।
वैज्ञानिकों की चेतावनी क्या कहती है?
द लानसेट (The Lancet) नामक मेडिकल जर्नल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में अब तक 995 गायों के झुंड और कम से कम 70 इंसान इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं।
वैज्ञानिकों ने कहा है कि यह वायरस अभी भी जंगली पक्षियों, घरेलू मुर्गियों और प्रवासी पक्षियों के बीच घूम रहा है। इसका मतलब है कि यह और देशों तक पहुंचने में देर नहीं लगाएगा।
फिलहाल इंसान से इंसान में फैलने का मामला नहीं देखा गया है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह वायरस म्यूटेट (बदलाव) हो गया और आसानी से इंसानों में फैलने लगा, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।
H5N1 वायरस इंसानों के लिए क्यों खतरनाक है?
H5N1 को पहली बार 1996 में चीन में देखा गया था। यह मुख्य रूप से पक्षियों को संक्रमित करता है, लेकिन कुछ मामलों में इंसानों को भी गंभीर रूप से बीमार कर चुका है।
यह वायरस पक्षियों में लार, नाक के स्राव और मल के ज़रिए फैलता है। मुर्गी पालन केंद्र और लाइव बर्ड मार्केट में इसका फैलाव बेहद तेज़ होता है। प्रवासी पक्षी इसे एक देश से दूसरे देश तक पहुंचा देते हैं।
इंसानों में यह वायरस आमतौर पर संक्रमित पक्षियों के सीधे संपर्क में आने से फैलता हैम, जैसे कि कच्चे मुर्गे को बिना सावधानी के छूना या पालन-पोषण करना। इसके लक्षण आम फ्लू जैसे हो सकते हैं, बुखार, खांसी, गले में दर्द। लेकिन कई बार मामला बहुत गंभीर हो जाता है, जैसे कि निमोनिया, सांस लेने में तकलीफ और यहां तक कि अंगों का फेल होना।
असली खतरा क्या है?
द लानसेट (The Lancet) की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अगर यह वायरस मौसमी फ्लू या सूअर से फैलने वाले वायरस से मिलकर कोई नया वायरस बना लेता है, तो वह इंसानों में आसानी से फैल सकता है, और वहीं से एक महामारी शुरू हो सकती है।
अमेरिकी CDC का कहना है कि फिलहाल यह वायरस ‘मध्यम स्तर’ का महामारी जोखिम रखता है, लेकिन हालात कभी भी बदल सकते हैं।
इससे कैसे निपटा जा सकता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी व्यक्ति में संक्रमण के गंभीर लक्षण दिखें, या वह किसी जोखिम समूह में हो, तो उसे जल्दी से जल्दी ओसेल्टामिविर (Oseltamivir) जैसे एंटीवायरल दवाओं से इलाज दिया जाना चाहिए। जल्दी इलाज मिलने से जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
इस वक्त ज़रूरत है सावधानी और तैयारी की, घबराने की नहीं। लेकिन अगर वायरस ने रूप बदला और इंसानों में आसानी से फैलने लगा, तो हमारे पास तैयारी का समय शायद नहीं बचे।


