कामदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित वर्ष की पहली एकादशी मानी जाती है। यह व्रत सभी पापों का नाश करता है और मनोकामनाओं की पूर्ति करता है। इस वर्ष यह व्रत 8 अप्रैल 2025, बुधवार को रखा जा रहा है।
तिथि और पारण समय
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 7 अप्रैल 2025, रात 8:00 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 8 अप्रैल 2025, रात 9:12 बजे
- पारण (व्रत खोलने) का समय: 9 अप्रैल 2025, सुबह 6:01 बजे से 8:34 बजे तक
कामदा एकादशी व्रत की मान्यता
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार रत्नपुर राज्य में ललिता नाम की एक अप्सरा और उसका पति ललित रहते थे। ललित ने गलती से राजा के दरबार में गलत सुर में गान कर दिया, जिससे नाराज होकर ऋषि ने उसे राक्षस बनने का श्राप दे दिया। बाद में, ललिता ने कामदा एकादशी का व्रत रखा जिससे ललित को श्राप से मुक्ति मिल गई।
इस कथा से यह माना जाता है कि कामदा एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति दिलाता है और दुखों को दूर करता है।
व्रत की विधि
- स्नान और संकल्प: सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु की पूजा: पीले फूल, तुलसी दल, दीपक और भोग अर्पित करें।
- भजन-कीर्तन: दिनभर विष्णु सहस्त्रनाम या रामनाम का जप करें।
- रात्रि जागरण: संभव हो तो पूरी रात भगवान का नाम लेकर जागरण करें।
- पारण: अगले दिन द्वादशी तिथि में उचित समय पर व्रत खोलें।
क्या करना चाहिए
- भगवान विष्णु की उपासना करें
- सात्विक भोजन करें या फलाहार करें
- गरीबों को दान दें
क्या न करें
- तामसिक भोजन से बचें
- क्रोध या अपशब्दों का प्रयोग न करें
- अनादर या अशुद्धता से पूजा न करें
कामदा एकादशी सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि जीवन को शुद्ध करने और आत्मा को सकारात्मक ऊर्जा देने का अवसर है। श्रद्धा और नियम से किया गया यह व्रत पापों को हरता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।


