महाराष्ट्र के कई हिस्सों में इस साल बारिश ने साथ नहीं दिया। मॉनसून की लंबी खामोशी के बाद अब राज्य के कई जिलों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। खेतों में फसलें सूख रही हैं, जानवरों के लिए चारा कम पड़ रहा है, और पीने के पानी की भी दिक्कत बढ़ती जा रही है।
हालात कितने गंभीर हैं, ये मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान से समझा जा सकता है। वाशिम जिले के सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद उन्होंने कहा कि स्थिति “बेहद गंभीर” है। अमरावती एयरपोर्ट पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि राज्य सरकार केंद्र की मदद का इंतजार किए बिना राज्य के सूखा राहत कोड के तहत ‘ट्रिगर 1’ के जरिए तुरंत सहायता देगी।
सरकार ने यह भी कहा है कि 25 सितंबर को किसानों को राहत देने के लिए एक अहम आदेश जारी किया जाएगा। इसके अलावा स्थिति पर नजर रखने के लिए एक कैबिनेट सब-कमेटी भी बनाई गई है, जो लगातार जमीनी हालात का जायजा लेगी।
तीन मोर्चों पर संकट
इस सूखे का असर सिर्फ एक चीज़ पर नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग मोर्चों पर एक साथ पड़ रहा है। पहला और सबसे बड़ा असर फसलों पर है। कम बारिश की वजह से कई इलाकों में खड़ी फसलें खराब हो चुकी हैं या सूख रही हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
दूसरा संकट चारे का है। पानी की कमी से घास और चारे की फसलें भी ठीक से नहीं उग पा रहीं, जिसका सीधा असर पशुपालकों और उनके मवेशियों पर पड़ रहा है। तीसरा और सबसे बुनियादी संकट पानी की उपलब्धता का है, जो आने वाले महीनों में और गंभीर हो सकता है अगर बारिश की स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
प्रशासन मैदान में उतरा
हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया है। नांदेड़ जिले के कलेक्टर राहुल कार्डिले ने गुरुवार को एक सर्कुलर जारी कर राजस्व, कृषि, ग्रामीण विकास, शहरी विकास, महावितरण, पशुपालन, जल संसाधन, जल संरक्षण, सहकारिता और भूमि अभिलेख जैसे विभागों के अधिकारियों को सूखा राहत के काम को सबसे ऊपर रखने का निर्देश दिया है।
सर्कुलर के मुताबिक अधिकारियों को फसल नुकसान का आकलन करने, किसानों के कर्ज की पुनर्संरचना करने और उन्हें हर संभव सहायता पहुंचाने पर ध्यान देने को कहा गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि पानी की उपलब्धता, चारे की कमी और फसल नुकसान को देखते हुए तैयारियां पहले से बढ़ा दी गई हैं।
जब तक हालात नहीं सुधरते, तब तक जिले के अधिकारी बिना जिला कलेक्टर की मंजूरी के मुख्यालय नहीं छोड़ पाएंगे, सिवाय बेहद जरूरी मामलों के। जो अधिकारी बिना इजाजत मुख्यालय से गायब पाए जाएंगे या बिना मंजूरी छुट्टी बढ़ाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
पुराना दर्द, नई शक्ल में
मराठवाड़ा और आसपास के इलाके सूखे की समस्या के लिए नए नहीं हैं। नांदेड़, परभणी, हिंगोली, लातूर जैसे जिले पहले भी कम बारिश और पानी की किल्लत से जूझ चुके हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि यही नांदेड़ जिला बीते साल भारी बारिश और बाढ़ की वजह से भी प्रभावित हुआ था, जब कई गांव पूरी तरह पानी में डूब गए थे।
यानी एक ही इलाका कभी बाढ़ की मार झेलता है, तो कभी सूखे की। यह असंतुलन दिखाता है कि मौसम का मिजाज कितना अनिश्चित होता जा रहा है, और इसका सबसे ज्यादा नुकसान किसानों और आम ग्रामीण परिवारों को उठाना पड़ता है।
आगे की राह
फिलहाल राज्य सरकार का पूरा फोकस राहत कार्यों पर है। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि केंद्र की मदद का इंतजार किए बिना राज्य अपने स्तर पर मदद शुरू करेगा। जिला प्रशासन को दिए गए सख्त निर्देश और बनाई गई कैबिनेट सब-कमेटी इस बात का संकेत हैं कि सरकार इस संकट को हल्के में नहीं ले रही।
लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह राहत किसानों और पशुपालकों तक समय पर और पर्याप्त मात्रा में पहुंच पाएगी। फसल, चारा और पानी, तीनों मोर्चों पर एक साथ लड़ाई लड़ना आसान नहीं है, और आने वाले कुछ हफ्ते यह तय करेंगे कि महाराष्ट्र का यह सूखा कितना गहरा असर छोड़ता है।
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