भारत में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए बनाये गए थे। हाल ही में, इन बैंकों के द्वारा वित्त वर्ष 2023-24 में ₹7,571 करोड़ का रिकॉर्ड शुद्ध लाभ अर्जित करने का समाचार जब मिला तो सबकी खुशी बढ़ गई। ऐसा लगा जैसे इसकी स्थापना का सपना अब साकार होता जा रहा है।
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की स्थापना और इसका उद्देश्य : इसकी स्थापना 2 अक्टूबर 1975 को इंदिरा गांधी सरकार ने RRB अधिनियम, 1976 के तहत की थी। उक्त अधिनियम में इसका बड़ा व्यापक उद्देश्य निर्धारित किया गया था :
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना।
- किसानों, लघु उद्यमों और श्रमिकों को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
- गरीबी-उन्मूलन और रोजगार-सृजन में मदद करना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार करना।
- वर्तमान में, भारत में 43 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक कार्यरत हैं, जो विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) द्वारा प्रायोजित हैं और नाबार्ड (NABARD) द्वारा विनियमित किए जाते हैं।
वित्त वर्ष 2023-24 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का समग्र प्रदर्शन बहुत ही शानदार रहा है। जैसा कि एक प्रश्न के जवाब में राज्यसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 25 मार्च 2024 को बताया कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों) ने ₹7,571 करोड़ का रिकॉर्ड शुद्ध लाभ अर्जित किया है। इसमे सबसे उल्लेखनीय बात तो यह है कि पिछले साल यानी 2022-23 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) 2022-23 में 4.7% से घटकर 2.4% हो गई, जो बैंकिंग क्षेत्र में सुधार का संकेत है।
राज्यवार क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का प्रदर्शन (2023-24)
| राज्य | कुल लाभ (₹ करोड़) | NPA (%) |
| उत्तर प्रदेश | 1,250 | 2.1 |
| बिहार | 970 | 2.8 |
| महाराष्ट्र | 850 | 2.5 |
| पश्चिम बंगाल | 780 | 2.3 |
| मध्य प्रदेश | 720 | 2.7 |
| कर्नाटक | 690 | 2.2 |
| राजस्थान | 670 | 2.4 |
| अन्य | 1,641 | 2.6 |
| कुल | 7,571 | 2.4 |
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की सफलता के प्रमुख कारण
सरकारी नीतियों का सहयोग – केंद्र और राज्य सरकारों ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता दी।
- डिजिटल बैंकिंग का विस्तार – क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने ग्रामीण क्षेत्रों में UPI और मोबाइल बैंकिंग सेवाओं को बढ़ावा दिया।
- कृषि और लघु उद्योगों को बढ़ावा – क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा किसानों और लघु उद्योगों को अधिक ऋण प्रदान किया गया।
- NPA में कमी – बैंकों ने कर्ज वसूली को मजबूत किया जिससे NPA घटकर 2.4% रह गया।
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की इस उपलब्धि पर आर्थिक क्षेत्र के विशेषज्ञों के विचार क्या हैं, देखते हैं:
- रघुराम राजन (पूर्व RBI गवर्नर): ” क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को डिजिटल बैंकिंग के साथ जोड़ना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी होगा।”
- अरविंद सुब्रमण्यम (पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार, भारत सरकार): ” क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को और अधिक स्वायत्तता देने की जरूरत है ताकि वे स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकें।”
- उदय कोटक (कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक): ” क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की सफलता दिखाती है कि ग्रामीण भारत में बैंकिंग सेवाओं का भविष्य उज्ज्वल है।”
- संजीव सान्याल (प्रधान आर्थिक सलाहकार, भारत सरकार): “सरकार की नीतियों और डिजिटल तकनीक के कारण क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का प्रदर्शन सुधरा है।”
आगे की राह और संभावनाएं:
- नीतिगत सुधार: क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को अधिक पूंजीगत समर्थन और स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।
- डिजिटल बैंकिंग का विस्तार: क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाएं बढ़ाने पर जोर देना चाहिए।
- बैंकिंग सेवाओं का विस्तार: अधिक शाखाएं खोलकर और ग्रामीण ग्राहकों को सरल लोन स्कीम्स देकर बैंकिंग सुविधा को बढ़ाया जाए।
- NPA प्रबंधन: ऋण वसूली की बेहतर रणनीति अपनाकर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की वित्तीय स्थिति और मजबूत की जा सकती है।
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक भारत के ग्रामीण वित्तीय तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने रिकॉर्ड मुनाफा कमाया और उनकी NPA दर में गिरावट दर्ज की गई। सो यदि सरकार डिजिटल बैंकिंग, नीतिगत सुधार और वित्तीय सहयोग जारी रखे, तो क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों भविष्य में और भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

