मराठी सिनेमा की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘तुझ्या आईला’ का टीजर हाल ही में लोकप्रिय अभिनेत्री अमृता खानविलकर ने लॉन्च किया। नेशनल अवॉर्ड विजेता निर्देशक सुजय डहाके के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक ऐसे सामाजिक विषय को सामने लाती है, जिस पर आम जिंदगी में अक्सर खुलकर बात नहीं होती। पैनोरमा स्टूडियोज, कल्ट डिजिटल और प्रकाश फिल्म्स के रणनीतिक सहयोग से निर्मित यह फिल्म 25 सितंबर को महाराष्ट्र के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
टीजर लॉन्च के मौके पर अमृता खानविलकर ने सुजय डहाके की अलग तरह की कहानी कहने की शैली की तारीफ की। उन्होंने कहा कि सुजय की फिल्मों की पहली झलक हमेशा दर्शकों में उत्सुकता पैदा करती है और ‘तुझ्या आईला’ का टीजर भी कुछ ऐसा ही अनुभव देता है। उनके मुताबिक, टीजर शुरुआत से ही दर्शकों को अपनी दुनिया में खींच लेता है और फिल्म के विषय को बिना किसी झिझक के सामने रखता है।
अमृता ने फिल्म के टीजर को बचपन की यादों से जोड़ते हुए इसे कच्चा, नॉस्टैल्जिक, अराजक और बेहद जाना-पहचाना अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि फिल्म दर्शकों को अपनी सीट से बांधे रखने का वादा करती है। उनके मुताबिक, सुजय डहाके का अंदाज फिल्म को बाकी फिल्मों से अलग बनाता है और टीजर देखने के बाद फिल्म की कहानी को लेकर उत्सुकता और बढ़ जाती है।
‘शाला’ और ‘श्यामची आई’ जैसी चर्चित फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले सुजय डहाके इस बार भी एक अलग और प्रयोगात्मक कहानी लेकर आए हैं। ‘तुझ्या आईला’ में वह रोजमर्रा की बातचीत में सामान्य होती जा रही गाली-गलौज और मौखिक दुर्व्यवहार की संस्कृति पर सवाल उठाते हैं। खासतौर पर मां के संदर्भ में इस्तेमाल होने वाली अपमानजनक भाषा को फिल्म एक गंभीर सामाजिक सवाल के रूप में देखती है।
फिल्म की कहानी का मुख्य रहस्य अभी सामने नहीं आया है। टीजर में एक गेम की झलक दिखाई देती है, लेकिन उसके पीछे की असली कहानी और संदेश को जानबूझकर छिपाकर रखा गया है। फिल्म की टैगलाइन “Shivi nay, khelach naav hay te” यानी “गाली नहीं, खेल का नाम है” इस रहस्य को और गहरा करती है। यह टैगलाइन फिल्म के केंद्रीय विचार की ओर भी इशारा करती है कि किस तरह अपमानजनक शब्द धीरे-धीरे हमारी भाषा और व्यवहार का सामान्य हिस्सा बन जाते हैं।
निर्देशक सुजय डहाके ने बताया कि मौखिक दुर्व्यवहार उन्हें लंबे समय से परेशान और आकर्षित करता रहा है। उनका मानना है कि समाज में कई अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल इतना सामान्य हो चुका है कि लोग उनके प्रभाव पर विचार करना भी छोड़ देते हैं। खासकर जब ऐसे शब्द मां के संदर्भ में इस्तेमाल किए जाते हैं, तो यह सवाल उठता है कि इस तरह की भाषा की जड़ें आखिर कहां हैं। फिल्म के जरिए निर्देशक इस विषय पर ऑनलाइन और ऑफलाइन बातचीत शुरू करना चाहते हैं।
फिल्म में राजश्री देशपांडे, रोहिणी हट्टंगड़ी, संभाजी भगत, अभिजीत थिटे, सोहम बाबर और अभिषेक झेंडे अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। इनके साथ कई प्रतिभाशाली बाल कलाकार भी फिल्म का हिस्सा हैं।
‘तुझ्या आईला’ का निर्माण पैनोरमा स्टूडियोज के तहत कुमार मंगत पाठक, अभिषेक पाठक और मुरलीधर छतवानी, कल्ट डिजिटल के तहत सुनील जैन और आदित्य जोशी तथा प्रकाश फिल्म्स के राजेश सिंह ने किया है। सुशांत वेंगुर्लेकर, मोहित अरोड़ा और मेघना प्रामाणिक फिल्म के सह-निर्माता हैं।
25 सितंबर को रिलीज होने वाली ‘तुझ्या आईला’ सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि हमारी भाषा और उसमें छिपे व्यवहार पर सवाल उठाने वाली फिल्म के रूप में सामने आ रही है।
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