90 दिनों में हो सकता है ऐतिहासिक करार, दोनों देशों ने पारस्परिक शुल्क को अस्थायी रूप से स्थगित किया
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। दोनों देशों के नेतृत्व ने परस्पर व्यापार-विवादों को पीछे छोड़ते हुए एक ठोस समझौते की दिशा में कदम बढ़ाये हैं। बीते वर्षों में व्यापार शुल्क (टैरिफ), आईटी सेवाएं, कृषि और रक्षा सौदों को लेकर दोनों देशों के बीच तनातनी देखी गई थी, लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि आगामी 90 दिनों के भीतर एक प्रारंभिक व्यापार समझौता (Early Harvest Deal) हो सकता है। इससे न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार जगत को भी नई दिशा दे सकता है।
व्यापार शुल्क और द्विपक्षीय चुनौतियां
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों में कई मुद्दे उभरे, जिनमें टैरिफ विवाद प्रमुख रहा। अमेरिका लंबे समय से भारत के “उच्च आयात शुल्क” पर आपत्ति जताता रहा है। विशेष रूप से मोटरसाइकिल, शराब, और आईटी प्रोडक्ट्स पर भारत के ऊंचे टैरिफ ने तथाकथित रूप से अमेरिकी कंपनियों को प्रभावित करता रहा है। इसके जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी दुबारा चुनकर आने के बाद कुछ भारतीय उत्पादों पर शुल्क लगा दिया। यह घटना इसी महीने के शुरुआती हफ्ते की है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पिछले टर्म में 2019 में भारत को ‘जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज’ (GSP) से बाहर कर दिया था, जिससे भारत को अमेरिका में मिलने वाली शुल्क-मुक्त पहुंच खत्म हो गई थी। हालांकि हालिया वार्ताओं के संकेत बताते हैं कि यह सुविधा फिर से बहाल हो सकती है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस (साभार) और रॉयटर्स (साभार) की रिपोर्टों के अनुसार, भारत और अमेरिका के वरिष्ठ व्यापार अधिकारियों के बीच हुई वार्ताओं के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है कि दोनों देश एक प्रारंभिक व्यापार समझौते को 90 दिनों के भीतर अंतिम रूप दे सकते हैं। इसी क्रम में भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि “हमने एक बुनियादी रूपरेखा पर सहमति बनाई है। और अब तकनीकी स्तर पर उसके डिटेल्स पर काम चल रहा है। अगले 90 दिनों में हम इस समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं।” इस समझौते में कृषि उत्पादों, डिजिटल व्यापार, चिकित्सा उपकरण, डेटा स्थानीयकरण और टैरिफ कटौती जैसे कुछ महत्त्वपूर्ण मुद्दे शामिल होंगे। समाचार यह भी है कि इसी महीने 21 तारीख को अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे. डी. वैन्स भारत पहुँचने वाले हैं। उनके साथ भी कई सकारात्मक वार्ता होने की उम्मीद है।
इस बीच एक बड़ी राहत की खबर यह भी है कि दोनों देशों ने फिलहाल पारस्परिक शुल्क (reciprocal tariffs) को स्थगित कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि भारत पर नए शुल्क लगाने की योजना को स्थगित रखा जाएगा, बशर्ते कि भारत भी जवाबी शुल्क लगाने से परहेज करे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सिलसिले में जो कुछ कहा, वह बेहद गौर करने लायक है, “मैंने प्रधानमंत्री मोदी से कहा, जो भी शुल्क आप हमारे उत्पादों पर लगाते हैं, हम भी उतना ही शुल्क लगाएंगे। यह पारस्परिकता है और निष्पक्ष भी।” हालांकि मोदी सरकार ने संयम बरतते हुए अमेरिका के साथ रचनात्मक वार्ता को ही प्राथमिकता दी है।
वर्तमान व्यापार स्थिति और आँकड़े
भारत और अमेरिका के बीच वित्तीय वर्ष 2023-24 में द्विपक्षीय व्यापार 118 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है। और अमेरिका पूर्व की तरह आज भी भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना हुआ है।
| वर्ष | भारत-अमेरिका व्यापार (अमेरिकी डॉलर में) |
| 2019-20 | $88 अरब |
| 2022-23 | $128 अरब |
| 2023-24 | $118 अरब (आंशिक आंकड़े) |
दोनों देशों का लक्ष्य है कि 2030 तक यह व्यापार बढ़कर $500 अरब तक पहुंच जाए। लेकिन इसके लिए व्यापार बाधाओं को हटाना, नीतिगत स्पष्टता और रणनीतिक साझेदारी को मज़बूती देना जरूरी होगा। वैसे भारत ने अमेरिका से एलएनजी (LNG), कच्चे तेल और रक्षा उपकरणों की खरीद बढ़ाने की सहमति दी है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा आधुनिकीकरण के लिए अमेरिका एक प्रमुख साझेदार बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत न केवल चीन पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगा, बल्कि वैश्विक रणनीतिक समीकरणों में अमेरिका के साथ मजबूती से खड़ा भी हो सकेगा।
आज के हालात में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ताओं में सकारात्मक प्रगति दोनों देशों के लिए आर्थिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। चूंकि अमेरिका भारत से ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ की मांग करता रहा है, इसलिए भारत भी अमेरिकी बाजार में अपनी सेवाओं और उत्पादों की बेहतर पहुंच चाहता है। और यदि यह प्रारंभिक व्यापार समझौता 90 दिनों के भीतर हो जाता है, तो यह दोनों देशों के बीच विश्वास, सहयोग और पारस्परिक समर्पण का परिचायक होगा।
वैसे आगामी महीनों में भारत-अमेरिका व्यापारिक वार्ताओं के परिणाम वैश्विक व्यापार पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। यह केवल शुल्कों की बात नहीं है, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था, जलवायु तकनीक, क्वाड रणनीति और इंडो-पैसिफिक संतुलन जैसे मुद्दों को भी प्रभावित करेगा। इसलिए यह आवश्यक है कि दोनों देश पारस्परिक सम्मान, पारदर्शिता और दीर्घकालिक सोच के साथ आगे बढ़ें।


