भारत ने पीएम ई-ड्राइव के तहत ईवी चार्जिंग ग्रिड पर डाला फुल चार्ज
भारत ने ई-मोबिलिटी को गति देने के लिए पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत राष्ट्रीय ईवी चार्जिंग नेटवर्क के निर्माण को तेज़ कर दिया है। इस मिशन के तहत देशभर में 72,000 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए 2,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
योजना का उद्देश्य है – स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देना, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना, और भारत को नेट-जीरो मोबिलिटी के लिए तैयार करना।
हाईवे, हवाई अड्डे, और शहर – हर जगह चार्जिंग
चार्जिंग स्टेशन 50 राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारों, मेट्रो शहरों, रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों, पेट्रोल पंपों और टोल प्लाज़ा जैसे उच्च ट्रैफिक क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे। ये तैनाती देशभर के नागरिकों को किफायती और सुविधाजनक ई-मोबिलिटी विकल्प प्रदान करेगी।
इस महत्वाकांक्षी योजना की प्रगति की समीक्षा के लिए भारी उद्योग मंत्री ने विभिन्न मंत्रालयों के साथ अंतर-मंत्रालयी बैठक की अध्यक्षता की। इसमें पेट्रोलियम, सड़क परिवहन और भारी उद्योग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
बीएचईएल बनेगा डिजिटल कमांड सेंटर
योजना के डिजिटल और प्रशासनिक ढांचे के लिए बीएचईएल को नोडल एजेंसी के रूप में चुना गया है। बीएचईएल न केवल चार्जिंग स्टेशन प्रस्तावों को समन्वित करेगा, बल्कि एक एकीकृत ईवी सुपर ऐप भी विकसित करेगा।
इस सुपर ऐप में चार प्रमुख विशेषताएं होंगी:
- रियल-टाइम स्लॉट बुकिंग
- भुगतान एकीकरण
- चार्जर उपलब्धता ट्रैकर
- तैनाती प्रगति डैशबोर्ड
यह ऐप ईवी उपयोगकर्ताओं के लिए एक सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म बन जाएगा, जिससे पूरी चार्जिंग प्रक्रिया पारदर्शी और आसान होगी।
मिशन मोड में मंत्रालय और राज्य
बैठक में मंत्री ने इस योजना को “एक सरकार” की भावना से लागू करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि केवल ऊर्जा परिवर्तन से बदलाव संभव नहीं, बल्कि एकजुट प्रयास ज़रूरी हैं। सभी मंत्रालय, राज्य सरकारें और सार्वजनिक उपक्रम इस योजना के सफल कार्यान्वयन में अहम भूमिका निभाएंगे।
हरित उद्योग, रोजगार और भविष्य का ट्रांजिट
पीएम ई-ड्राइव से न केवल ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी, बल्कि देश में मेक इन इंडिया ईवी तकनीक और उपकरण निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। इससे हरित उद्योगों को नई ऊर्जा मिलेगी और हरित रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे।
यह योजना भविष्य की नेट-जीरो ट्रांसपोर्ट नीति की आधारशिला रखेगी, जिससे भारत ग्लोबल ग्रीन मोबिलिटी मार्केट में नेतृत्व की स्थिति में आ सकेगा।


