वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद ने आज एक महत्वपूर्ण दो दिवसीय बैठक शुरू की, जिसमें भारत की जीएसटी संरचना में आमूल-चूल परिवर्तन पर चर्चा हो रही है। केंद्र सरकार का महत्वाकांक्षी ‘नेक्स्ट-जेन’ जीएसटी सुधार प्रस्ताव वर्तमान चार-स्तरीय कर संरचना (5%, 12%, 18%, और 28%) को केवल दो स्लैब—5% और 18%—तक सीमित करने का है। इसका उद्देश्य रोजमर्रा की जरूरी चीजों और इलेक्ट्रॉनिक सामानों को सस्ता करना है, साथ ही लक्जरी और ‘सिन’ वस्तुओं के लिए नया 40% कर स्लैब लागू करना है।
जीएसटी सुधार के प्रमुख प्रस्ताव
प्रस्तावित पुनर्गठन में जुलाई 2017 में शुरू किए गए 12% और 28% कर स्लैब को समाप्त करने की योजना है। इस योजना के तहत:
- जरूरी और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं पर कर में कमी: वर्तमान में 12% कर स्लैब में आने वाली 99% से अधिक वस्तुएं, जैसे घी, मेवे, पैकेज्ड पेयजल (20 लीटर के डिब्बे), गैर-कार्बोनेटेड पेय, नमकीन, दवाइयां, और चिकित्सा उपकरण, 5% स्लैब में स्थानांतरित होने की उम्मीद है। पेंसिल, साइकिल, छाता, और हेयरपिन जैसे घरेलू सामान भी 5% कर के दायरे में आ सकते हैं। इसके अलावा, कुछ टेलीविजन, वॉशिंग मशीन, और रेफ्रिजरेटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जो वर्तमान में 28% कर के अधीन हैं, 18% स्लैब में आएंगे, जिससे उपभोक्ताओं के लिए कीमतें कम हो सकती हैं।
- लक्जरी और सिन वस्तुओं के लिए नया 40% स्लैब: उच्च-स्तरीय ऑटोमोबाइल, एसयूवी, और अन्य प्रीमियम वाहनों जैसे लक्जरी सामानों के लिए 40% का नया कर स्लैब प्रस्तावित है, जो वर्तमान में 28% जीएसटी और मुआवजा उपकर के अधीन हैं। तंबाकू उत्पाद, पान मसाला, और सिगरेट भी इस श्रेणी में शामिल होने की उम्मीद है, और इस खंड के लिए अतिरिक्त उपकर पर भी विचार किया जा रहा है।
- इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी): केंद्र सरकार ईवी को बढ़ावा देने के लिए 5% जीएसटी की वकालत कर रही है, हालांकि इस बात पर चर्चा जारी है कि क्या प्रीमियम ईवी पर किफायती और लक्जरी मॉडल के बीच अंतर को दर्शाने के लिए अधिक कर लगाया जाना चाहिए।
संभावित चुनौतियां और राज्यों की चिंताएं
प्रस्तावित कर कटौती ने विपक्षी शासित राज्यों, जैसे पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पंजाब, तेलंगाना, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, और झारखंड, में चिंता पैदा की है। ये राज्य राजस्व में भारी कमी की आशंका जता रहे हैं और एक स्पष्ट मुआवजा तंत्र की मांग कर रहे हैं। जब 2017 में जीएसटी लागू किया गया था, तब केंद्र ने राज्यों को पांच साल तक राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए लक्जरी और हानिकारक वस्तुओं पर 1% से 290% तक का मुआवजा उपकर लगाया था, जो जून 2022 में समाप्त हो गया था। अब राज्य चाहते हैं कि प्रस्तावित 40% स्लैब पर कोई अतिरिक्त उपकर उनके राजस्व पूल के लिए निर्धारित किया जाए।
सुधार अब क्यों?
यह सुधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने जीएसटी व्यवस्था को सरल बनाने और उपभोग को बढ़ावा देने के लिए बड़े कर सुधारों का वादा किया था। मंत्रियों के समूह (जीओएम) ने पहले ही इस योजना को सैद्धांतिक रूप से समर्थन दे दिया है, जिससे 3 और 4 सितंबर 2025 को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में औपचारिक चर्चा का रास्ता साफ हो गया है।
संभावित प्रभाव
यदि मंजूरी मिलती है, तो यह सुधार जीएसटी की शुरुआत के बाद से भारत की कर संरचना में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक हो सकता है, जिससे जरूरी सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स उपभोक्ताओं के लिए सस्ते हो जाएंगे, जबकि लक्जरी और सिन वस्तुओं पर कर बढ़ जाएगा। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना, अनुपालन को बढ़ाना और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना है।
जीएसटी परिषद के विचार-विमर्श के परिणामों का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि ये भारत के कर परिदृश्य को नया आकार दे सकते हैं और विभिन्न क्षेत्रों में उपभोक्ता कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।


