By: Ragini Chaubey
फिल्म: बंदर
निर्देशक: अनुराग कश्यप
कलाकार: बॉबी देओल, सान्या मल्होत्रा, सपना पब्बी, सबा आज़ाद, इंद्रजीत सुकुमारन, राज बी. शेट्टी, जितेंद्र जोशी और अन्य
अनुराग कश्यप का नाम सुनते ही एक बात तो पक्की हो जाती है। जो फिल्म आएगी, वह आपको बेचैन ज़रूर करेगी, लेकिन सोचने पर मजबूर भी करेगी। “बंदर” के साथ भी यही हुआ है। यह फिल्म एक ऐसे इंसान की कहानी है, जो बलात्कार के आरोप में जेल जाता है। आरोप लगाती है उसकी पूर्व प्रेमिका गायत्री (सपना पब्बी)। मुख्य किरदार समर मेहरा का रोल निभाया है बॉबी देओल ने, जो एक गिरा हुआ गायक है। उस पर लगा यह इल्ज़ाम उसकी ज़िंदगी को एक पल में पलट देता है।
यह फिल्म एक सच्ची घटना से प्रेरित है। अनुराग कश्यप ने इस सच्चाई को पर्दे पर उतारने में कोई कसर नहीं छोड़ी। फिल्म की स्क्रीनप्ले सुदीप शर्मा और अभिषेक बनर्जी ने लिखी है, और इसमें एक तरह की कड़वी सच्चाई है, जो आपको अपनी सीट से हिलने नहीं देती।
कहानी और स्क्रीनप्ले
फिल्म सीधे मुद्दे पर आती है। कोई फिल्मी नाटकबाज़ी नहीं, कोई बनावटी मोड़ नहीं। समर को गिरफ्तार किया जाता है, और उसके बाद जो होता है, वह एक आम आदमी की दर्दनाक यात्रा है। थाने की पूछताछ से लेकर जेल की दुनिया तक, एक व्यक्ति को गिरफ्तारी के बाद कितनी मुसीबतों से गुज़रना पड़ता है, यह अनुराग कश्यप ने बखूबी दिखाया है, बिना किसी चमक-दमक के।
फिल्म में गालियों का इस्तेमाल कई दृश्यों में किया गया है, लेकिन यह सिर्फ़ चौंकाने के लिए नहीं है। यह उस दुनिया की भाषा है, जहां समर फंस जाता है, और यही इस फिल्म को असली बनाता है। फिल्म का हर दृश्य दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखता है।
अनुराग कश्यप ने एक ऐसी कहानी बुनी है, जो दर्शकों की समझ को बार-बार चुनौती देती है। सीधे अदालती नाटक की जगह, फिल्म सोशल मीडिया के फैसले, जनता के आक्रोश और सच सामने आने से पहले ही न्याय तय कर लेने की प्रवृत्ति को परखती है।
बॉबी देओल लाजवाब हैं
अगर एक चीज़ है, जो इस फिल्म को यादगार बनाती है, तो वह बॉबी देओल की अदाकारी है। इतने लंबे वक्त के बाद भी, जब वह पर्दे पर आते हैं, तो अपनी अदाकारी से दर्शकों का पूरा ध्यान अपनी तरफ खींच लेते हैं। वह एक ऐसे शख्स का किरदार निभा रहे हैं, जो न पूरी तरह निर्दोष लगता है और न पूरी तरह दोषी, और इसी दोहरेपन को बॉबी ने बखूबी पकड़ा है।
बॉबी देओल इस फिल्म का धड़कता दिल हैं। अपनी हालिया फिल्मों के दबंग और खलनायक वाले अंदाज़ को परे रखकर, उन्होंने एक गहरी, कमज़ोर और संजीदा अदाकारी पेश की है। पहले दृश्य से लेकर आखिरी दृश्य तक, बॉबी का हर पल पर्दे पर इस बात को साबित करता है कि एक ऐसे इंसान के भीतर क्या चलता है, जो बाहर से बड़ा और चमकदार दिखता है, लेकिन अंदर से टूटा हुआ है।
बाकी कलाकार
सान्या मल्होत्रा ने समर की बहन का किरदार पूरी ईमानदारी से निभाया है। सपना पब्बी पूर्व प्रेमिका गायत्री के रूप में बहुत दमदार हैं। सबा आज़ाद, इंद्रजीत सुकुमारन, राज बी. शेट्टी और जितेंद्र जोशी, सभी ने अपना-अपना किरदार बखूबी निभाया है। पूरी मंडली में से कोई भी कमज़ोर नहीं लगता।
अगर आप सिनेमा को लेकर थोड़े खुले विचारों वाले हैं, अगर आप सीधा जवाब नहीं, बल्कि सवालों से भरी फिल्म देखना चाहते हैं, तो “बंदर” आपके लिए है। कोई भावनात्मक नाटकबाज़ी नहीं, कोई हाथ थामने वाला सरलीकरण नहीं, बस एक कहानी, जो आपको अंदर तक हिला देती है।
बॉबी देओल की यह अदाकारी सिर्फ़ वापसी नहीं है। यह उनका नया परिचय है, जहां उन्होंने साबित कर दिया है कि वह सिर्फ़ खलनायक नहीं, बल्कि एक पूर्ण और गहरे अभिनेता हैं।
Rating: ⭐⭐⭐⭐☆ (4/5)
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