अगर आप भी हर दिन बेस्ट बस पकड़कर ऑफिस, कॉलेज या घूमने जाते हैं, तो अब आपको अपनी जेब थोड़ी और कसनी पड़ेगी। क्योंकि मुंबई की सड़कों पर दौड़ने वाली हमारी प्यारी बेस्ट बसों का किराया अब दोगुना हो गया है। जी हां, अब हर छोटी दूरी के लिए भी आपको पहले से ज्यादा पैसे चुकाने पड़ेंगे। तो चलिए जानते हैं कि नया किराया क्या होगा और ये बदलाव कब से लागू होगा।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने बेस्ट बसों के किराए में बड़ी बढ़ोतरी को मंज़ूरी दे दी है। अब सामान्य और एसी, दोनों तरह की बसों में सफर पहले से काफी महंगा हो जाएगा।
कम से कम किराया हुआ दोगुना
जल्द ही, साधारण बेस्ट बसों का न्यूनतम किराया ₹5 से बढ़ाकर ₹10 कर दिया जाएगा। वहीं एसी बसों का शुरुआती किराया ₹6 से सीधे ₹20 कर दिया गया है। यानी कम दूरी का भी सफर अब पहले से दोगुनी कीमत पर करना पड़ेगा।
अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से बढ़ती परिचालन लागत के बावजूद किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया था, अब मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा है।
नया किराया चार्ट इस तरह रहेगा
साधारण बसों के लिए:
- 0-5 किलोमीटर: ₹10 (पहले ₹5)
- 5-10 किलोमीटर: ₹20 (पहले ₹10)
- 10-15 किलोमीटर: ₹30 (पहले ₹15)
- 15-20 किलोमीटर: ₹40 (पहले ₹20)
- 20 किलोमीटर से ज़्यादा: ₹50 (पहले ₹25)
एसी बसों के लिए:
- 0-5 किलोमीटर: ₹20 (पहले ₹6)
- 5-10 किलोमीटर: ₹30 (पहले ₹15)
- 10-15 किलोमीटर: ₹40 (पहले ₹20)
- 15-20 किलोमीटर: ₹50 (पहले ₹25)
- 20 किलोमीटर से ज़्यादा: ₹60 (पहले ₹30)
बेस्ट अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में ईंधन, बसों के रखरखाव और कर्मचारियों के वेतन में लगभग 40% तक बढ़ोतरी हुई है। लेकिन यात्रियों से लिया जाने किराया अब तक उसी स्तर पर था।
कब से लागू होगा नया किराया?
नई दरें ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की औपचारिक मंज़ूरी मिलने के बाद लागू कर दी जाएंगी। माना जा रहा है कि एक महीने के भीतर नया किराया लागू कर दिया जाएगा। बता दें कि 2019 के बाद यह पहला बड़ा किराया संशोधन है।
क्यों बढ़ाया गया किराया?
बेस्ट प्रशासन का कहना है कि महंगाई, ईंधन की लागत और स्टाफ सैलरी में बढ़ोतरी के चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। कोरोना महामारी के दौरान बेस्ट ने यात्रियों पर बोझ न बढ़ाने के लिए किराए में कोई बदलाव नहीं किया था, लेकिन अब स्थिति संभालना मुश्किल हो गया है।
मुंबईकरों का गुस्सा
जैसे ही किराया बढ़ाने की खबर आई, सोशल मीडिया पर कई यात्रियों ने नाराज़गी जताई। कुछ ने इसे “अचानक” और “अनुचित” करार दिया, तो कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि किराया बढ़ाने से पहले सेवा की गुणवत्ता में सुधार होना चाहिए था। वहीं छात्र संगठनों और वरिष्ठ नागरिक समूहों ने मांग की है कि उन्हें अब भी रियायतें मिलती रहें।


