भारतीय सेना ने अपने सैनिकों के लिए एक नया और पूरी तरह स्वदेशी कॉम्बैट कोट लॉन्च कर दिया है। यह कोट न सिर्फ़ आधुनिक दिखता है, बल्कि कड़कती ठंड, जलती गर्मी और दुश्मन की नज़र तीनों से एक साथ बचाता है। सबसे खास बात यह है कि इसे भारत में ही डिज़ाइन और बनाया गया है तथा इसका पूरा बौद्धिक अधिकार (IPR) भारतीय सेना के पास सुरक्षित है।
नया कोट तीन खास परतों से बना है। सबसे बाहर की परत में नया डिजिटल छलावरण प्रिंट लगा है जो पहाड़, जंगल, रेगिस्तान और शहर – हर इलाके में सैनिक को छिपा देता है। बीच की परत ठंड से बचाती है और हवा रोकती है, फिर भी सैनिक को तेज़ दौड़ने-लड़ने में कोई दिक्कत नहीं होती। सबसे अंदर की परत पसीना सोख लेती है, जिससे गर्मी में भी सैनिक सूखा और तरोताज़ा रहता है।
इस कोट को आर्मी डिज़ाइन ब्यूरो और देश के मशहूर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) ने मिलकर तैयार किया है। इसका डिज़ाइन नंबर 449667-001 है और यह Designs Act, 2000 के तहत रजिस्टर्ड है। यानी कोई विदेशी कंपनी या दूसरा देश इसे कॉपी नहीं कर सकता। कपड़ा हल्का, मज़बूत, जल्दी सूखने वाला और बहुत टिकाऊ है। लेह-लद्दाख की माइनस 40 डिग्री ठंड से लेकर राजस्थान की 50 डिग्री गर्मी तक यह कोट हर मौसम में सैनिक का साथ देगा।
यह नया कोट “आत्मनिर्भर भारत” की एक और मिसाल है। पहले हम विदेशों से महँगी वर्दियाँ मंगवाते थे, अब सब कुछ देश में ही बनेगा। इससे न सिर्फ़ अरबों रुपये बचेंगे, बल्कि देश की कंपनियों को बड़ा ऑर्डर मिलेगा और हज़ारों नई नौकरियाँ भी पैदा होंगी। भारतीय सैनिक अब और भी गर्व से कह सकेंगे – हमारा हथियार भी स्वदेशी, हमारी वर्दी भी स्वदेशी!
भारतीय सेना के इस नए कॉम्बैट कोट ने साबित कर दिया है कि हमारा देश अब सिर्फ़ हथियार ही नहीं, बल्कि सैनिक की आखिरी सिलाई तक हर चीज़ खुद बनाने में सक्षम है।
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