अमेरिका में ग्रीन कार्ड यानी स्थायी प्रवासन की प्रक्रिया अब पहले से भी ज्यादा सख्त होने वाली है। ट्रम्प प्रशासन ने एक नया प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत उन विदेशी निवासियों को ग्रीन कार्ड मिलने से रोक दिया जा सकता है, जो सरकार की किसी भी तरह की सहायता लेते हैं या भविष्य में लेने की संभावना रखते हैं। इसमें स्वास्थ्य सेवा, खाद्य सहायता या आवास जैसी मदद शामिल है। इसे “पब्लिक चार्ज” नीति के पुनरुद्धार के तौर पर देखा जा रहा है, जो पिछले कुछ वर्षों में काफी विवादों में रही है।
यह नियम केवल आपके आर्थिक हालात पर नहीं बल्कि आपकी उम्र, स्वास्थ्य, परिवार की स्थिति, संपत्ति और पिछले सरकारी मदद के इस्तेमाल पर भी नजर रखेगा। अधिकारी यह तय करेंगे कि क्या आप भविष्य में सरकारी मदद पर निर्भर रहेंगे या नहीं। यदि हाँ, तो आपका ग्रीन कार्ड आवेदन खारिज भी हो सकता है।
यह प्रस्ताव बाइडेन प्रशासन के नरम नियमों को पलटने की कोशिश है। बाइडेन सरकार ने 2022 में इसे आसान बनाया था ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के विदेशी निवासी ज़रूरत पड़ने पर मदद ले सकें और सुरक्षित महसूस करें। ट्रम्प प्रशासन इस नीति को वापस लाकर, उन लोगों को कड़ी सजा देना चाहता है जो सार्वजनिक सुरक्षा जाल का सहारा लेते हैं।
विशेषज्ञ और प्रवासन अधिकार समूह इस नए नियम को लेकर काफी चिंतित हैं। उनका कहना है कि अगर यह लागू हुआ, तो कई लोग जो सच में मदद के हकदार हैं, वे सरकारी सहायता लेने से डरेंगे। इससे उनकी सेहत, जीवन स्तर और सामाजिक सुरक्षा पर बुरा असर पड़ेगा। इसके साथ ही, विदेश में बसे लोगों में भय और असुरक्षा की भावना भी बढ़ेगी।
यह नियम अमेरिका में रहने वाले लाखों विदेशी निवासियों के लिए चिंता की वजह बन गया है, खासकर उन भारतीयों के लिए जो बेहतर नौकरी, पढ़ाई या जीवन की तलाश में वहां गए हैं। भारत से अमेरिका आने वाले कई लोग मध्यम या निम्न आय वर्ग से आते हैं, जो शुरुआत में कुछ हद तक सरकारी सहायता पर निर्भर हो सकते हैं। यह बदलाव उनकी सुरक्षा और भविष्य दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि अमेरिका में आने वाले लोगों को पूरी तरह आत्मनिर्भर होना चाहिए और सरकारी संसाधनों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। लेकिन आलोचक इसे गरीबों और कमजोर वर्ग के खिलाफ भेदभावपूर्ण नीति मानते हैं, जो उनकी जिंदगी को और मुश्किल बना देगी।
भारत पर इसका असर भी काफी गहरा होगा। सबसे पहले, अमेरिका में बसे भारतीयों की संख्या और उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ेगा। जिन लोगों को अस्थायी या स्थायी मदद की जरूरत होती है, वे बिना सहायता के खुद को संभालने को मजबूर होंगे, जिससे उनकी सेहत, शिक्षा और जीवन स्तर प्रभावित होगा।
दूसरी तरफ, यह नीति भारत से आने वाले छात्रों, पेशेवरों और परिवारों को अमेरिका जाने से रोक सकती है। अगर ग्रीन कार्ड पाना मुश्किल हो जाएगा, तो बहुत से लोग अमेरिका आने से पहले ही रुक जाएंगे। इससे दोनों देशों के बीच ज्ञान, संस्कृति और आर्थिक सहयोग पर असर पड़ेगा।
इसके अलावा, जो भारतीय अमेरिका में काम करते हैं और अपने परिवार को वहां लाना चाहते हैं, वे इस नीति के कारण झिझक सकते हैं। परिवार के साथ जुड़ने में रुकावटें आएंगी, और विदेश में बसे लोगों की मनोस्थिति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
यह नीति भारत की अर्थव्यवस्था पर भी अप्रत्यक्ष रूप से असर डालेगी। भारतीय विदेशी निवासी अमेरिका की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, खासकर टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में। उनकी संख्या कम होने से भारत को भी नुकसान होगा। साथ ही, जो धन वे परिवार को भेजते हैं, वह भी कम हो सकता है, जिससे घरेलू अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ेगा।
भारत सरकार के लिए जरूरी है कि वह इस मुद्दे पर सक्रिय हो और अमेरिका के साथ बातचीत कर इस नीति के नकारात्मक प्रभावों को कम करने का प्रयास करे। साथ ही, भारत में रह रहे लोगों को इस नियम के बारे में पूरी जानकारी देना और कानूनी सलाह उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा, ताकि वे अपने अधिकारों और विकल्पों को समझ सकें।
यह भी ध्यान में रखना होगा कि यह प्रस्ताव अभी समीक्षा के दौर में है और यदि व्यापक विरोध हुआ तो इसे बदला या रद्द किया जा सकता है। इसलिए भारत के विदेशी निवासी समुदाय, मानवाधिकार संगठन और नीति निर्माता मिलकर इस मुद्दे पर आवाज उठाएं तो फर्क पड़ सकता है।
अगर यह नीति लागू हो गई, तो भारतीय विदेशी निवासियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी। उन्हें बेहतर भविष्य के लिए पहले से ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। ऐसे वक्त में भारत और अमेरिका के बीच मजबूत संवाद और सहयोग की जरूरत और बढ़ जाती है ताकि दोनों देशों के नागरिकों के हित सुरक्षित रहें।
इस पूरे मामले का यह भी संदेश है कि दुनिया भर में प्रवासन नीतियां तेजी से कड़ी हो रही हैं। इसलिए जो लोग विदेश में बेहतर जिंदगी की तलाश में हैं, उन्हें बदलावों पर नजर रखनी चाहिए और अपनी योजना उसी के अनुसार बनानी चाहिए।
Subscribe Deshwale on YouTube


