मुंबई के कांजुरमार्ग इलाके में फैले डंपिंग ग्राउंड को अब फिर से हरा-भरा मैंग्रोव वन बनाना होगा। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को साफ़ आदेश दिया है कि अगले तीन महीनों में इस इलाके को पूरी तरह से बहाल किया जाए।
यह आदेश साल 2007 से लंबित एक अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान आया, जिसे पर्यावरण संस्था ‘वंशक्ति’ ने दायर किया था। अदालत ने साफ़ किया कि यह ज़मीन पहले से ही 2005 में ‘रिज़र्व फ़ॉरेस्ट’ घोषित की जा चुकी है, ऐसे में यहां कचरा डालना पूरी तरह ग़ैरक़ानूनी है।
अब बहाने नहीं, नतीजे चाहिए
अदालत ने BMC की तीखी खिंचाई की और कहा कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद स्थिति नहीं बदली। आदेश दिए जाते रहे, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं हुआ, और कचरे का ढेर बढ़ता गया।
न्यायमूर्ति की बेंच ने स्पष्ट कहा कि मैंग्रोव की रक्षा कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक बाध्यता है। अब समय रिपोर्टें देने का नहीं, ज़मीन पर बदलाव दिखाने का है।
काम की डेडलाइन तय
हाईकोर्ट ने कुछ बेहद स्पष्ट निर्देश दिए हैं:
- कचरे की डंपिंग तुरंत रोकी जाए
- तीन महीने में पूरा क्षेत्र बहाल किया जाए
- संबंधित विभाग नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट दें
अगर आदेशों का पालन नहीं हुआ, तो अदालत ने संकेत दिया है कि सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी।
‘वंशक्ति’ की लंबी लड़ाई रंग लाई
यह याचिका संस्था ‘वंशक्ति’ ने 2007 में दायर की थी। संस्था ने आरोप लगाया कि इस इलाके में बड़े पैमाने पर अवैध कचरा डाला गया, मैंग्रोव नष्ट किए गए और अदालत के पुराने आदेशों की अवहेलना हुई।
अदालत ने संस्था की लगातार की गई कोशिशों की सराहना की और माना कि यह ज़मीन वन भूमि है, जिसे हर हाल में संरक्षित करना होगा।


