महाराष्ट्र सरकार ने अपने बजट में 30 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर 6% चार्ज लगाने की घोषणा की थी, जिसे अब हरी झंडी मिल गई है।
शुक्रवार को महाराष्ट्र मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन पर चर्चा के दौरान परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने साफ कहा कि इतने महंगे वाहन आम आदमी नहीं खरीदता। इस फैसले से सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा और इसका इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की प्रवृत्ति पर खास असर नहीं पड़ेगा।
क्या 6% चार्ज सही है?
सरकार का मानना है कि जो लोग 30 लाख से अधिक का वाहन खरीद सकते हैं, वे यह अतिरिक्त शुल्क भी आसानी से दे सकते हैं। लेकिन विधान परिषद में कुछ सदस्यों ने तर्क दिया कि यह चार्ज 30 लाख की बजाय 60 लाख रुपये से अधिक के वाहनों पर लगना चाहिए। हालांकि, सरकार ने इस सुझाव को खारिज कर दिया।
मुंबई में पार्किंग पॉलिसी की तैयारी
मुंबई में गाड़ियों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बन चुकी है। वेटर से लेकर मध्यम वर्गीय परिवारों तक के पास चारपहिया वाहन हैं। स्थिति यह है कि कई लोग वन बीएचके घर में रहते हुए भी कार मालिक हैं, और कुछ के पास तो 10-10 गाड़ियां हैं। बीजेपी नेता प्रवीण दरेकर ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब एक परिवार को इतनी गाड़ियों की जरूरत ही नहीं है, तो फिर इतनी कारें क्यों खरीदी जा रही हैं?
परिवहन मंत्री सरनाईक ने स्वीकार किया कि पार्किंग की समस्या गंभीर है। जल्द ही मुंबई में एक नई पार्किंग पॉलिसी लागू की जाएगी, जिससे सड़क पर बेतरतीब पार्किंग और ट्रैफिक की दिक्कतें कम हो सकें।
क्या गाड़ियों की संख्या पर लगेगी रोक?
सदन में यह भी सवाल उठा कि क्या सरकार पुरानी कारों को स्क्रैप करने और एक परिवार में गाड़ियों की संख्या तय करने जैसे नियम लागू करेगी? सरनाईक ने संकेत दिया कि इस दिशा में भी विचार किया जा रहा है।
बिना नंबर वाली इलेक्ट्रिक बाइकों पर नीति जल्द
बाजार में बिना नंबर प्लेट वाली इलेक्ट्रिक बाइकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इन्हें तेज गति से चलाया जाता है, लेकिन दुर्घटनाओं का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं रहता। इसे लेकर भी सरकार नीति बनाने की तैयारी कर रही है।
स्कूल बसों में सुरक्षा के नए नियम
स्कूली बसों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब सभी स्कूल बसों में पैनिक बटन, जीपीएस और सीसीटीवी लगाना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
क्या हैं फायदे और नुकसान?
फायदे:
- मुंबई में अनियंत्रित पार्किंग पर रोक लगेगी।
- बिना नंबर वाली इलेक्ट्रिक बाइकों की समस्या पर लगाम लगेगी।
- स्कूल बसों में सुरक्षा बढ़ेगी।
नुकसान:
- परिवारों की गाड़ी खरीदने की स्वतंत्रता सीमित हो सकती है।
- महंगे इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री पर असर पड़ सकता है।
- आम आदमी को भी पार्किंग पॉलिसी के चलते अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
आइए एक आम आदमी के पहलू से नजर डालते हैं:
इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर पड़ सकता है असर
देखिए, सरकार ने 30 लाख से ऊपर की इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर 6% चार्ज लगा दिया। सरकार कह रही है कि इतने महंगे वाहन आम लोग नहीं खरीदते, तो उन्हें फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन जरा सोचो, इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री पर कितना असर पड़ सकता है। क्यों? क्योंकि जो लोग महंगे ई-व्हीकल खरीदने का सोच रहे थे, अब शायद दो बार सोचें। इलेक्ट्रिक गाड़ियां वैसे ही पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों से महंगी होती हैं, ऊपर से यह चार्ज लग गया, तो लोगों के लिए और मुश्किल हो जाएगी। और जब बिक्री गिरेगी, तो ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर भी इसका असर पड़ेगा। और फिर जो सपना प्रदूषण मुक्त बनाने का है उसे तो भूल जो। लोग इलेक्ट्रिक गाड़ियां की बजाए फिर से डीजल-पेट्रोल गाड़ियों की तरफ दौड़ेंगे।
पार्किंग पॉलिसी
अब आते हैं पार्किंग पॉलिसी पर। सच बताओ, तुम्हें भी कभी-कभी अपनी गाड़ी पार्क करने के लिए घंटों जगह ढूंढनी पड़ती होगी, है ना? मुंबई जैसी जगहों पर पार्किंग मिलना किसी लॉटरी लगने जैसा है। अब सरकार कह रही है कि नई पार्किंग पॉलिसी लाएंगे, जिससे गाड़ियों की संख्या कंट्रोल में आएगी। लेकिन क्या होगा इससे?
हो सकता है कि सरकार हर जगह पार्किंग के लिए अलग से चार्ज लगाए। मान लो, तुम अपनी गाड़ी रोज़ ऑफिस ले जाते हो और फ्री पार्किंग एरिया में पार्क कर देते हो, अब उसी पार्किंग के लिए रोज़ाना पैसे खर्च करने पड़ेंगे। महीने के हिसाब से देखो, तो शायद यह अच्छा-खासा खर्चा बढ़ सकता है।
परिवारों की गाड़ी खरीदने की आजादी होगी सीमित?
लोग 2 या 3 गाड़ियां अपनी जरूरत के हिसाब से रखते हैं। और ये बार तो तय है कि 2-3 गाड़ियां अफोर्ड करना एक आम आदमी के बसकी बात नहीं है। लेकिन जरा सोचो, किसी अपर मिडिल क्लास फैमिली में हर सदस्य को जरूरत के हिसाब से गाड़ी चाहिए है, तो वो क्या करेगा? पिता का ऑफिस साउथ मुंबई मेनी है, और बेटे का ऑफिस उसके बिल्कुल विपरीत तो ऐसे में क्या हो? लोग अपनी सुविधा के हिसाब से हर चीज प्लान करते हैं। लेकिन अब सरकार सोच रही है कि गाड़ियों की संख्या सीमित कर दी जाए, यानी एक घर में कितनी गाड़ियां हो सकती हैं, इसकी भी कोई सीमा तय हो सकती है।
ऑटो वालों के लिए क्या?
अब जब पार्किंग नीति की बात हो रही है तो मुंबई के ऑटो वालों के क्या? इनका क्या करेगी सरकार? क्यूंकी सबसे ज्यादा सड़कों पे ऑटो दिखाई देते हैं? और शायद ऑटो वालों को पार्किंग शुल्क मेंहगा पड़े? अगर सरकार द्वारा नीति बनाने का फैसला कर ही लिया गया है तो सरकार को मुंबई के ऑटो वालों और टैक्सी वालों के बारे में भी खास ध्यान रखने की जरूरत है।
क्या पड़ेगा मुख्य असर
अब यह सुनने में तो ठीक लगता है कि भीड़ कम होगी, सड़कों पर ट्रैफिक कम होगा, लेकिन क्या ऐसा हर किसी के लिए सही रहेगा? सोचो, एक ही परिवार में तीन लोग अलग-अलग टाइम पर ऑफिस या काम पर जाते हैं, तो क्या वे एक ही गाड़ी शेयर कर पाएंगे? अगर एक गाड़ी का इस्तेमाल सबको करना पड़े, तो टाइमिंग मैच करना मुश्किल हो जाएगा। और फिर पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी तो हमेशा भरोसेमंद नहीं होता!
तो कुल मिलाकर, सरकार की नीयत अच्छी हो सकती है, लेकिन इन नीतियों का सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा। अमीरों के लिए तो कोई फर्क नहीं पड़ता, वे चार्ज देकर भी गाड़ी खरीद लेंगे, लेकिन जो लोग थोड़ा बहुत कर्ज लेकर या सेविंग करके गाड़ी खरीदने की सोच रहे थे, उनके लिए चीजें मुश्किल हो सकती हैं।
सबसे बड़ा सवाल है—क्या यह नियम सही तरीके से लागू हो पाएंगे? क्या सख्ती केवल छोटे वाहन मालिकों तक सीमित रहेगी, या फिर बड़े व्यवसायी और रसूखदार लोगों पर भी समान रूप से लागू होगी? या फिर कुछ चुनिंदा बड़े व्यापारी इस लिस्ट से बाहर होंगे? इन सवालों के जवाब वक्त ही देगा!

